
चेहरे से उम्र के निशान कम करने के लिए कराई गई कॉस्मेटिक सर्जरी एक महिला के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई। ग्लूकोमा से पीड़ित 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिला ने आरोप लगाया कि फेसलिफ्ट सर्जरी के बाद उनकी आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्या बढ़ गई। महिला का कहना है कि उन्होंने ऑपरेशन से पहले अपनी आंखों की बीमारी और संभावित जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन उनकी आशंकाओं का समाधान ठीक तरह से नहीं किया गया।
दूसरी ओर, सर्जरी करने वाले डॉक्टर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए महिला की दृष्टि संबंधी शिकायतों को उनकी पहले से मौजूद आंखों की बीमारी से जोड़ा है। इस मामले ने कॉस्मेटिक सर्जरी से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, सूचित सहमति और इलाज के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सर्जरी से पहले ही महिला को थी आंखों की चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे की कॉपीराइटर उमा डोंगरे चेहरे पर झुर्रियों और उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए फेसलिफ्ट कराना चाहती थीं। हालांकि, वह ग्लूकोमा से पीड़ित थीं। यह आंखों की ऐसी बीमारी है, जिसमें ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है और दृष्टि प्रभावित हो सकती है।
महिला का कहना है कि उन्होंने सर्जरी से पहले डॉक्टर को अपनी बीमारी के बारे में बताया था। उन्होंने आंखों की सुरक्षा, ब्लड प्रेशर और ऑपरेशन के दौरान संभावित जटिलताओं को लेकर भी सवाल उठाए थे।
उमा के मुताबिक, उन्होंने डॉक्टर से यह अनुरोध भी किया था कि चेहरे की सर्जरी के साथ आंखों के आसपास की कुछ अतिरिक्त प्रक्रियाएं न की जाएं या उन्हें बाद के लिए टाल दिया जाए। उनका कहना था कि सौंदर्य संबंधी परिणाम से ज्यादा उनके लिए आंखों की सुरक्षा महत्वपूर्ण थी।
ऑपरेशन के बाद महसूस हुआ दृष्टि में बदलाव
महिला के अनुसार, 5 अगस्त 2026 को उनकी सर्जरी हुई थी। उसी शाम उन्हें अपनी दृष्टि में बदलाव महसूस हुआ। बाद में कराए गए विजुअल-फील्ड टेस्ट में भी उन्होंने ऑपरेशन से पहले की तुलना में स्थिति बिगड़ने की बात कही।
उमा ने दावा किया कि उन्होंने सर्जरी के दौरान और बाद में अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि ऑपरेशन में लगभग 10 घंटे लगे, जबकि उन्हें शुरुआत में करीब 8 घंटे का अनुमान दिया गया था।
महिला ने स्टेरॉयड दवाएं दिए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ग्लूकोमा के कारण वह इन दवाओं के संभावित प्रभावों को लेकर पहले से सतर्क थीं और उन्होंने इन्हें लेने से इनकार किया था।
हालांकि, दृष्टि में बदलाव का वास्तविक कारण क्या था और क्या उसका सर्जरी से सीधा संबंध था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
डॉक्टर ने क्या दी सफाई?
सर्जरी करने वाले डॉ. आशीष दवलभक्त ने महिला के आरोपों को खारिज किया है। डॉक्टर के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान महिला का ब्लड प्रेशर सामान्य सीमा में बनाए रखा गया और सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई।
उन्होंने दृष्टि संबंधी शिकायतों को महिला की पहले से मौजूद आंखों की बीमारी से जोड़ा। डॉक्टर के अनुसार, महिला को नेत्र विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी गई थी और आगे की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में भी भेजा गया था।
डॉक्टर का कहना है कि आंखों के आसपास फैट ग्राफ्टिंग पहले से चर्चा की गई प्रक्रिया का हिस्सा थी और इसके लिए महिला की सहमति ली गई थी।
इस प्रकार, महिला और डॉक्टर के दावों में अंतर है। मामले में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दृष्टि संबंधी समस्या के लिए सर्जरी ही जिम्मेदार थी या चिकित्सा लापरवाही हुई थी।
ग्लूकोमा के मरीजों के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी कितनी जोखिम भरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लूकोमा होने का अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज के लिए फेसलिफ्ट या दूसरी कॉस्मेटिक सर्जरी पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, ऑपरेशन से पहले बीमारी की गंभीरता, आंखों की मौजूदा स्थिति, इस्तेमाल की जा रही दवाओं और एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिमों का आकलन जरूरी है।
सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी होनी चाहिए। कुछ दवाएं, ब्लड प्रेशर में बदलाव और ऑपरेशन के दौरान शरीर की स्थिति आंखों पर प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए हर मरीज के लिए जोखिम का आकलन अलग-अलग किया जाना चाहिए।
सर्जरी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
कॉस्मेटिक सर्जरी कराने से पहले मरीज को इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
- डॉक्टर को अपनी सभी बीमारियों, एलर्जी और नियमित दवाओं के बारे में बताएं।
- संभावित जटिलताओं, वैकल्पिक उपचार और सर्जरी टालने के विकल्पों पर चर्चा करें।
- जरूरत पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञ, जैसे नेत्र रोग विशेषज्ञ, से राय लें।
- सर्जरी के साथ प्रस्तावित अतिरिक्त प्रक्रियाओं के लाभ और जोखिम अलग-अलग समझें।
- एनेस्थीसिया से पहले अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को स्पष्ट रूप से बताएं।
- सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले प्रक्रिया और संभावित जोखिमों को समझें।
कॉस्मेटिक सर्जरी का उद्देश्य बाहरी रूप में बदलाव लाना होता है, लेकिन किसी भी प्रक्रिया से पहले स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
भारत में बढ़ रहा है कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं का चलन
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी (ISAPS) की रिपोर्ट में भारत में कॉस्मेटिक और एस्थेटिक प्रक्रियाओं के बढ़ते चलन का उल्लेख किया गया है। ऐसी प्रक्रियाओं में सर्जिकल और बिना सर्जरी वाले उपचार दोनों शामिल होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रक्रियाओं की लोकप्रियता बढ़ने के साथ मरीजों को संभावित लाभों के अलावा जोखिम, रिकवरी में लगने वाले समय और परिणामों की सीमाओं के बारे में भी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। महिला के आरोपों और डॉक्टर की सफाई की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। किसी भी कॉस्मेटिक सर्जरी से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें और अपनी मेडिकल हिस्ट्री की पूरी जानकारी दें।



