गुजरात के कलोल में गौहत्या के मामले में 3 दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है. जिला एवं सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान जज ने वेद की ऋचाओं का उल्लेख किया. कहा कि गाय सृष्टि की माता है. ऐसे में गाय की रक्षा करना धर्म और करुणा का काम है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गौहत्या का अपराध सिद्ध हो जाए तो अपराधी को उचित दंड मिलना ही चाहिए.

केस डायरी के मुताबिक मामला 22 अगस्त 2024 का है. उस दिन पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कलोल के जमला गांव में रहने वाले लालाभाई सेन्मा के घर में दबिश दी थी. इस दौरान पुलिस ने मौके से 277 किलो गौमांस बरामद करते हुए छह लोगों को अरेस्ट किया था. पुलिस ने मौके से वारदात में इस्तेमाल हथियार और मांस ले जाने का वाहन भी सीज किया था. आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि यह गौमांस वह गुलाम मोइन कुरैशी नामक व्यक्ति को बेचने वाले थे.
सबूतों के अभाव में बरी हुए तीन आरोपी
पुलिस ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश किया, लेकिन ट्रॉयल में तीन आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए. वहीं बाकी बचे तीन आरोपियों जुहापुरा के वसीम कुरैशी, बहरामपुरा के मोहम्मद रफीक कुरैशी और फतेहवाड़ी के आसफाक बेहलीम के खिलाफ दोष साबित हुआ. इसके बाद अदालत ने गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है. अदालत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए तीनतीन लाख का जुर्माना भी लगाया है.
जज ने कह दी बड़ी बात
फैसला सुनाते हुए जज ने वेदों का हवाला दिया. कहा कि वेदों में गाय को सृष्टि की माता कहा गया है. यह मानव जीवन और समाज के लिए उपयोगी है. ऐसे में गौहत्या के मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. यदि साक्ष्य से आरोपी का अपराध सिद्ध होता है, तो उसे कठोर दंड मिलना चाहिए.



