
आजकल शहरों में जगह की कमी और आधुनिक डिजाइन के चलते L-शेप वाले मकान भी काफी देखने को मिलते हैं। ऐसे घर सामान्य चौकोर या आयताकार मकानों से अलग होते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार, मकान का कोई कोना कटा हुआ होने पर उसे वास्तु दोष से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि अलग-अलग दिशाओं के कोने कटने का प्रभाव घर के वातावरण और परिवार के जीवन पर पड़ सकता है।
हालांकि, हर L-शेप मकान को अशुभ मानना सही नहीं है। घर की बनावट, रोशनी, हवा और कमरों की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है। आइए जानते हैं कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार किस दिशा का कोना कटने पर क्या प्रभाव बताया गया है और बिना बड़े निर्माण कार्य के कौन से उपाय किए जा सकते हैं।
1. उत्तर-पूर्व दिशा का कोना कटना
वास्तुशास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इसे पूजा, आध्यात्मिकता और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि L-शेप मकान में यह कोना कटा होने पर परिवार के सदस्यों के बीच तनाव और मानसिक अस्थिरता की स्थिति बन सकती है।
क्या करें: इस हिस्से को साफ और व्यवस्थित रखें। यहां पर्याप्त रोशनी और हवा आने की व्यवस्था करें। छोटे इंडोर पौधे भी रख सकते हैं। शीशा लगाने का उपाय कुछ वास्तु मान्यताओं में बताया जाता है, लेकिन इसे किसी वास्तविक कमी को ठीक करने का वैज्ञानिक तरीका नहीं समझना चाहिए।
2. दक्षिण-पश्चिम दिशा का कोना कटना
दक्षिण-पश्चिम दिशा को नैऋत्य कोण कहा जाता है। वास्तु मान्यताओं में इसे स्थिरता, जिम्मेदारी और मजबूती से जोड़ा जाता है। इस दिशा का कोना कटा होने पर परिवार में निर्णय लेने में परेशानी और कामकाज में रुकावट आने की बात कही जाती है।
क्या करें: इस हिस्से को भारी सामान से पूरी तरह भरने के बजाय व्यवस्थित रखें। यदि यहां कमरा है, तो उसे साफ-सुथरा और उपयोगी बनाएं। घर की बनावट में बदलाव करने से पहले किसी वास्तु विशेषज्ञ के साथ-साथ आर्किटेक्ट की सलाह लेना बेहतर है।
3. दक्षिण-पूर्व दिशा का कोना कटना
दक्षिण-पूर्व दिशा को आग्नेय कोण कहा जाता है। इसका संबंध अग्नि तत्व से माना जाता है। वास्तु के अनुसार, इस हिस्से का कटा होना घर में असंतुलन और आर्थिक परेशानियों का संकेत माना जाता है।
क्या करें: रसोई की व्यवस्था सुरक्षित और सुविधाजनक रखें। बिजली के उपकरणों को सही तरीके से लगवाएं और वायरिंग में किसी तरह की खराबी न रहने दें। इस हिस्से में पर्याप्त रोशनी और हवा का ध्यान रखें।
4. उत्तर-पश्चिम दिशा का कोना कटना
उत्तर-पश्चिम दिशा को वायव्य कोण कहा जाता है। वास्तु मान्यताओं में इसे रिश्तों, मेलजोल और बदलाव से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिशा का हिस्सा कटने से सामाजिक संबंधों और कामकाज में परेशानियां आ सकती हैं।
क्या करें: इस कोने को साफ रखें और वहां अनावश्यक सामान जमा न होने दें। पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था करें। घर के इस हिस्से का इस्तेमाल ऐसा रखें कि वहां घुटन या अव्यवस्था न हो।
5. घर के बीच यानी ब्रह्मस्थान का रखें ध्यान
वास्तुशास्त्र में घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहा जाता है। इसे खुला और हल्का रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, इस जगह पर भारी सामान, अनावश्यक दीवार या कबाड़ जमा करने से बचना चाहिए।
क्या करें: घर के बीच के हिस्से को साफ और व्यवस्थित रखें। वहां आवाजाही में रुकावट न हो। हालांकि, केवल वास्तु के नाम पर किसी दीवार या शौचालय को तोड़ने की जरूरत नहीं है। बदलाव से पहले निर्माण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी है।
6. L-शेप मकान के अंदरूनी मोड़ पर न रखें कबाड़
L-आकार के घर में जहां दो दीवारें मिलकर अंदर की तरफ मोड़ बनाती हैं, वहां अक्सर अंधेरा या कम इस्तेमाल होने वाली जगह बन जाती है। ऐसे स्थान पर पुराना सामान और कूड़ा जमा होने से सफाई करना मुश्किल हो सकता है।
क्या करें: इस हिस्से को साफ रखें। संभव हो तो खिड़की, रोशनदान या उचित लाइट की व्यवस्था करें। पौधे तभी रखें, जब वहां पर्याप्त रोशनी और हवा उपलब्ध हो।
7. कमरों की दिशा और व्यवस्था पर दें ध्यान
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मालिक या परिवार के बड़े सदस्य का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में, रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में और बैठक उत्तर-पूर्व दिशा में होना अच्छा माना जाता है।
हालांकि, मकान का नक्शा, परिवार की जरूरतें और उपलब्ध जगह देखकर ही कमरों की व्यवस्था तय करनी चाहिए। केवल वास्तु के नियमों के कारण घर की सुविधाओं और सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए।
बिना तोड़फोड़ L-शेप मकान के लिए बताए जाते हैं ये उपाय
वास्तु मान्यताओं में L-शेप मकान के कटे हुए कोनों को संतुलित दिखाने के लिए कुछ उपाय बताए जाते हैं।
- तांबे या पीतल की तार: कुछ वास्तु विशेषज्ञ जमीन पर तांबे या पीतल की तार लगाकर मकान को अलग-अलग चौकोर हिस्सों में बांटने का सुझाव देते हैं। हालांकि, इसका वास्तु दोष दूर करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। फर्श या जमीन में किसी भी तरह की तार लगाने से पहले बिजली और निर्माण सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
- शीशे का इस्तेमाल: कटे हुए कोने में शीशा लगाने से वह हिस्सा बड़ा दिखाई दे सकता है। इससे कमरे में खुलापन महसूस होता है, लेकिन मकान की वास्तविक बनावट नहीं बदलती।
- रोशनी की व्यवस्था: अंधेरे कोनों में उचित लाइट लगाएं। प्राकृतिक रोशनी के लिए खिड़की या रोशनदान की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है।
- छोटे पौधे: जहां पर्याप्त धूप और हवा आती हो, वहां छोटे इंडोर पौधे रख सकते हैं। इससे घर का वातावरण बेहतर और ताजा महसूस हो सकता है।
- अनावश्यक सामान हटाएं: घर के कोनों में कबाड़, पुराने डिब्बे और अनुपयोगी वस्तुएं जमा न होने दें।
क्या L-शेप मकान खरीदना अशुभ होता है?
सिर्फ मकान का L-आकार होना उसे अशुभ नहीं बनाता। वास्तुशास्त्र में दिशाओं और कोनों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं, लेकिन इनका परिवार की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य या रिश्तों पर सीधा प्रभाव पड़ने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
यदि आप L-शेप मकान खरीदने जा रहे हैं, तो सबसे पहले उसकी बनावट, वेंटिलेशन, प्राकृतिक रोशनी, पानी की निकासी, निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच करें। पहले से ऐसे घर में रह रहे हैं, तो केवल वास्तु दोष के डर से तोड़फोड़ कराने की जरूरत नहीं है। छोटे बदलावों से घर को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
Satya Report Disclaimer: इस लेख में बताए गए वास्तु दोष और उपाय पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य या जीवन में होने वाली परेशानियों का निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।



