
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर स्थायी बहाली की मांग को लेकर डीएलएड और टेट पास बेरोजगार अभ्यर्थियों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। राज्य में पिछले कई सालों से कोई बड़ी प्राथमिक शिक्षक भर्ती न आने से नाराज युवाओं ने राजधानी लखनऊ स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद , निशातगंज कार्यालय पर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में प्रदेशभर से आए सैकड़ों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिनका नेतृत्व मुख्य रूप से आकाश द्विवेदी, अमित कुमार, दिलीप ठाकुर, रोहित और धीरज जैसे युवा प्रतिनिधियों ने किया।
60,000 पदों पर विज्ञापन जारी करने की मांग
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि सरकार बेसिक शिक्षा विभाग में खाली पड़े कम से कम 60,000 पदों पर प्राथमिक शिक्षक भर्ती का नया विज्ञापन तुरंत जारी करे। आंदोलनकारियों का कहना है कि हाल ही में विभाग की ओर से शहरी क्षेत्रों के लिए कुछ पदों की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन यह संख्या ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। प्रदेश में लाखों की संख्या में युवा डीएलएड और शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करके सालों से घर बैठे हैं और ओवरएज हो रहे हैं। ऐसे में सिर्फ 60 हजार या उससे अधिक पदों पर बड़ी भर्ती ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।
बारिश में डटे रहे शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी
उपसचिव से वार्ता और आश्वासन
SCERT कार्यालय के बाहर अभ्यर्थियों के भारी विरोध और नारेबाजी को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई। स्थिति को संभालने और युवाओं की बात सुनने के लिए विभाग के उपसचिव ने अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
वार्ता के दौरान उपसचिव ने प्रदर्शनकारी युवाओं को सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभाग खाली पड़े पदों का ब्योरा लगातार तैयार कर रहा है। उपसचिव ने भरोसा दिलाया कि आगामी अक्टूबर महीने के प्रथम सप्ताह में ग्रामीण क्षेत्रों के खाली पदों पर भर्ती के लिए नया विज्ञापन जारी करने की पूरी कोशिश की जाएगी। इस आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों में थोड़ी उम्मीद जगी है, हालांकि युवाओं का कहना है कि अगर अक्टूबर के पहले हफ्ते में विज्ञापन नहीं आया तो वे दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलगअलग होगी भर्ती
अधिकारियों के साथ हुई इस बातचीत में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कुछ बेहद महत्वपूर्ण और नए नियम भी सामने आए हैं। विभाग की तरफ से यह साफ किया गया है कि इस बार उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पूरी तरह से अलगअलग आयोजित की जाएगी। दोनों ही क्षेत्रों के पदों के लिए अलग से विज्ञापन, आवेदन और चयन सूची तैयार होगी। इससे पहले शहरी और ग्रामीण पदों को एक साथ शामिल करने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों संवर्गों की नियुक्तियां अपनीअपनी व्यवस्था के अनुसार अलग की जाएंगी।
परीक्षा में लागू रहेगा नॉर्मलाइजेशन का नियम
भर्ती परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस बार एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, यदि आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण लिखित परीक्षा एक से अधिक पालियों में आयोजित करानी पड़ती है, तो अंकों के मूल्यांकन के लिए ‘नॉर्मलाइजेशन’ की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाएगा। इस नियम के आने से अलगअलग पालियों के प्रश्नपत्रों के कठिन या आसान होने की वजह से किसी भी अभ्यर्थी को नुकसान या अनुचित लाभ नहीं मिलेगा और सभी को बराबरी का मौका मिलेगा।
युवाओं ने दी चेतावनी
धरने में शामिल आकाश द्विवेदी और अमित कुमार ने कहा कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। वहीं दिलीप ठाकुर, रोहित और धीरज ने संयुक्त रूप से कहा कि उपसचिव के वादे के अनुसार वे अक्टूबर के पहले सप्ताह तक इंतजार करेंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी शिक्षक भर्ती का विज्ञापन सामने नहीं आता है, तो पूरे उत्तर प्रदेश के डीएलएड छात्र लखनऊ में एक बार फिर से ऐतिहासिक और अनवरत आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


