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​राकेश मेहता कौन थे? दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव का निधन, शीला दीक्षित सरकार में निभाई अहम भूमिका

​राकेश मेहता कौन थे? दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव का निधन, शीला दीक्षित सरकार में निभाई अहम भूमिका

डिजिटल डेस्क लकनऊः दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश मेहता का निधन हो गया है।  उनके मौत की खबर सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। 75 साल के राकेश मेहता नोएडा के सेक्टर82 स्थित केंद्रीय विहार2 सोसाइटी में रह रहे थे। रविवार, 6 सितंबर 2026 को उनकी मौत की जानकारी सामने आई।

मौके से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और मानसिक तनाव से जूझने की बात लिखी थी। नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

आपको बता दें कि राकेश मेहता को दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े फैसलों के लिए याद किया जाता है। वह तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत शीला दीक्षित के कार्यकाल में दिल्ली सरकार के प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे थे।

सेंट स्टीफंस से LSE तक शानदार शैक्षणिक सफर

उत्तराखंड के देहरादून निवासी राकेश मेहता का शैक्षणिक सफर भी काफी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से बीए की पढ़ाई की। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमए किया और आगे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एमएससी की डिग्री हासिल की।

साल 1975 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में उनका चयन हुआ और उन्हें एजीएमयूटी कैडर मिला। तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालीं।

2007 से 2010 तक रहे दिल्ली के मुख्य सचिव

राकेश मेहता नवंबर 2007 से नवंबर 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव रहे। इस दौरान दिल्ली में बुनियादी ढांचे और शहरी प्रशासन से जुड़े कई बड़े बदलाव हुए।

शीला दीक्षित सरकार के साथ काम करते हुए उन्होंने दिल्ली के परिवहन, बिजली, नगर निकाय और पर्यावरण से जुड़े सुधारों में जरूरी भूमिका निभाई।

ब्लू लाइन बसों से लोफ्लोर बसों तक बदलाव

दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बदलाव के दौरान राकेश मेहता की भूमिका अहम रही। उस समय कुछ दुर्घटनाओं की वजह से चर्चा में रहने वाली ब्लू लाइन बसों को हटाने और डीटीसी की आधुनिक लोफ्लोर बसों को लाने की योजना से उन्हें जोड़ा जाता है।

इस बदलाव का उद्देश्य दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाना था।

बिजली सुधार और निजीकरण में भी अहम भूमिका

दिल्ली में बिजली व्यवस्था में सुधार और 24 घंटे बिजली आपूर्ति की दिशा में किए गए प्रयासों में भी राकेश मेहता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बिजली क्षेत्र में निजीकरण और सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया में उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अहम जिम्मेदारी निभाई।

MCD में लागू किया यूनिट एरिया सिस्टम

दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर के तौर पर भी राकेश मेहता ने महत्वपूर्ण काम किया। उनके कार्यकाल में संपत्ति कर के आकलन के लिए यूनिट एरिया सिस्टम लागू किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना था।

इसके अलावा दिल्ली में पर्यावरण सुधार के लिए एयर एंबियंस फंड की स्थापना में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।

2010 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में निभाई अहम भूमिका

साल 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों से पहले राजधानी में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास का काम चल रहा था। राकेश मेहता उस समय मुख्य सचिव थे और खेलों से जुड़ी तैयारियों को समय पर पूरा कराने में प्रशासनिक स्तर पर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

फ्लाईओवर, मेट्रो विस्तार और स्टेडियमों के नवीनीकरण जैसे कई कामों को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी प्रशासन के सामने थी।

उनके साथ काम कर चुके पूर्व IAS अधिकारियों के मुताबिक मेहता फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के पक्ष में नहीं थे। बैठकों के बाद निर्णयों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए वह अधिकारियों के बीच जाने जाते थे।

प्रशासनिक परिवार से था संबंध

राकेश मेहता का परिवार भी प्रशासनिक सेवा से जुड़ा रहा। उनकी पत्नी सुमति मेहता भी दिल्ली कैडर की रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं।

उनका बेटा अविवाहित है और पीएचडी कर रहा है तथा अपनी मां के साथ देहरादून के वसंत विहार में रहता था। उनकी बेटी शादीशुदा है और अपने पति के साथ लंदन में रहती है।

पिछले कुछ वर्षों से नोएडा में अकेले रह रहे थे

नवंबर 2010 में सेवानिवृत्त होने के बाद राकेश मेहता कुछ समय तक परिवार के साथ रहे। बाद में उन्होंने नोएडा के सेक्टर82 स्थित केंद्रीय विहार2 में किराए का फ्लैट लेकर अकेले रहना शुरू कर दिया था।

परिवार के मुताबिक पत्नी और बेटा समयसमय पर देहरादून से उनसे मिलने आते थे।

पत्नी से फोन पर हुई थी आखिरी बातचीत

जानकारी के मुताबिक शनिवार रात राकेश मेहता की पत्नी सुमति मेहता से फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद रविवार को जब सुमति ने उन्हें कई बार फोन किया और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने सोसाइटी के सुरक्षा सुपरवाइजर को फ्लैट पर भेजा।

सुरक्षा कर्मचारी के पहुंचने पर राकेश मेहता मृत पाए गए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सोमवार शाम दिल्ली के लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार को मामले की औपचारिक जानकारी सामने आई।

राकेश मेहता का निधन ऐसे समय में हुआ है जब प्रशासनिक जगत उन्हें दिल्ली के शहरी विकास, परिवहन सुधार और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में निभाई गई भूमिका के लिए याद कर रहा है।

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