
लखनऊ अमृत विचार : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले समय को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। मशहूर वित्तीय संस्था डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने हाल ही में भारत के आर्थिक भविष्य पर अपने विचार रखे हैं। उनके मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 202627 के दूसरे हाफ में देश की आर्थिक विकास दर में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है।
शुरुआत रही है बेहद शानदार
रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने काफी मजबूत शुरुआत की है। देश में घरेलू मांग, लोगों द्वारा खर्च , सरकार द्वारा किया जाने वाला खर्च और विनिर्माण काफी अच्छी स्थिति में रहे हैं। इन सभी की बदौलत पहली तिमाही में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। डीबीएस बैंक का यह अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष 202627 के दौरान देश की औसत आर्थिक वृद्धि दर लगभग 7.3 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.8 प्रतिशत थी।
दूसरी छमाही में क्यों आ सकती है सुस्ती?
अर्थशास्त्री राधिका राव का मानना है कि साल के आखिरी महीनों में कुछ ऐसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जो रफ्तार को थोड़ा धीमा कर सकती हैं:
1. सख्त वित्तीय स्थितियां बाजार में पैसों के लेनदेन और लोन के नियमों में सख्ती के कारण कारोबार और निवेश पर असर पड़ सकता है।
2. ऊर्जा की ऊंची कीमतें दुनिया भर में बिजली, ईंधन और ऊर्जा की लागत बढ़ने से सामानों को बनाने और लानेले जाने का खर्च बढ़ रहा है।
3. आधार प्रभाव पिछले साल के आंकड़े ऊंचे होने के कारण इस बार उस स्तर को पार करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा।
राहत की बात और आगे की स्थिति
इन छोटीमोटी अड़चनों के बावजूद देश के अंदर आर्थिक गतिविधियां अभी भी काफी मजबूत बनी हुई हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जीएसटी कलेक्शन, ईवे बिल, बिजली की खपत और ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट के आंकड़े लगातार बेहतर बने हुए हैं।
दूसरी ओर, बढ़ती महंगाई के दबाव को काबू में रखने के लिए जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक और सरकार का मुख्य ध्यान केवल और केवल ‘मूल्य स्थिरता’ पर ही रहेगा। कुल मिलाकर, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर टिकी है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ बाहरी और अंदरूनी दबावों के कारण रफ्तार में थोड़ी नरमी आ सकती है।
रिपोर्ट अर्पित शुक्ल
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