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​World Literacy Day 2026: 20 डिग्रियां, 28 गोल्ड मेडल, 42 परीक्षाएं… भारत का सबसे पढ़ा लिखा शख्स कौन?

भारत में सबसे पढ़ेलिखे व्यक्ति के रूप में अक्सर डॉ. श्रीकांत जिचकर का नाम लिया जाता है. उन्हें देश के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में गिना जाता है. उनके पास कई विषयों में डिग्रियां थीं. उन्होंने चिकित्सा, कानून, प्रशासन, पत्रकारिता और समाजशास्त्र जैसे अलगअलग क्षेत्रों में पढ़ाई की थी. डॉ. श्रीकांत जिचकर केवल डिग्रियां लेने वाले व्यक्ति नहीं थे. वे एक कुशल प्रशासक, राजनेता, लेखक और विचारक भी थे. उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है. उन्होंने यह दिखाया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. आज चर्चा इसलिए क्योंकि 8 सितंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है. इसकी घोषणा यूनेस्को ने 17 नवंबर 1965 में करते हुए इसके लिए आठ सितंबर की तारीख तय की थी. अगले वर्ष यानी 1966 से इस खास दिवस को मनाने की शुरुआत हुई.

​World Literacy Day 2026: 20 डिग्रियां, 28 गोल्ड मेडल, 42 परीक्षाएं… भारत का सबसे पढ़ा लिखा शख्स कौन?

साल 2026 की थीम लिट्रेसी फॉर पीपुल, द प्लैनेट एंड प्रासपैरिटी है. इस दिवस की शुरुआत जब हुई तब पूरी दुनिया में की साक्षरता दर बहुत शानदार नहीं थी. इस समय भारत की साक्षरता दर 80.9 फीसदी है. 2011 में यह 74 फीसदी थी. साल 1961 में भारत की साक्षरता दर सिर्फ 28.30 फीसदी और दस साल बाद साल 1971 में 34.45 फीसदी रही. मतलब आजादी के 79 साल बाद भी भारत सौ फीसदी साक्षर नहीं है.

कौन थे डॉ. श्रीकांत जिचकर?

डॉ. श्रीकांत जिचकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था. वे एक सामान्य परिवार से आए थे. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई में गहरी रुचि थी. वे हर विषय को समझने और उसके बारे में अधिक जानने का प्रयास करते थे. उनका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था. वे मेहनती थे. वे अनुशासित थे. वे अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट रहते थे. पढ़ाई उनके लिए केवल नौकरी पाने का साधन नहीं थी. वे ज्ञान को जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम मानते थे.

कई विषयों में ली उच्च शिक्षा

डॉ. जिचकर ने अलगअलग क्षेत्रों में शिक्षा हासिल की. उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कानून का अध्ययन किया. उन्होंने प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े विषयों में भी शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र और दर्शन जैसे विषयों का अध्ययन किया. उन्हें संस्कृत और अन्य भाषाओं में भी रुचि थी. उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य से जुड़े विषयों को भी समझा. उनकी शिक्षा का क्षेत्र बहुत व्यापक था. वे केवल एक विषय तक सीमित नहीं रहे. वे विज्ञान और कला दोनों क्षेत्रों में रुचि रखते थे. यही बात उन्हें दूसरे विद्वानों से अलग बनाती थी. दावा किया जाता है कि इनके पास20 डिग्रियां, 28 गोल्ड मेडल, यूनिवर्सिटी और प्रतियोगी समेत 42 परीक्षाएं दी थीं.

प्रतियोगी परीक्षाओं में गाड़े सफलता के झंडे

डॉ. श्रीकांत जिचकर ने कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की. उन्होंने प्रशासनिक सेवा से जुड़ी परीक्षाओं में भाग लिया. उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा भी पास की थी. इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा और कानून से जुड़ी परीक्षाओं में भी सफलता प्राप्त की. वे अलगअलग परीक्षाओं की तैयारी करते रहे. हर परीक्षा के लिए अलग तरह की मेहनत चाहिए होती है. इसके बावजूद उन्होंने अनेक क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की. उनकी सफलता केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं थी. वे विषयों को गहराई से समझते थे. वे अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकते थे. यही कारण था कि वे शिक्षा और सार्वजनिक जीवन दोनों में सफल रहे.

फिर किया राजनीति में प्रवेश

डॉ. जिचकर ने राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने. बाद में वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे. राजनीति में रहते हुए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन जैसे विषयों पर काम किया. वे समाज के विकास को लेकर गंभीर थे. उनका मानना था कि देश की प्रगति के लिए शिक्षित और जागरूक नागरिक जरूरी हैं. वे राजनीति को सेवा का माध्यम मानते थे. वे लोगों की समस्याओं को समझने का प्रयास करते थे. वे चाहते थे कि देश में अच्छी शिक्षा और बेहतर प्रशासन हो.

केवल डिग्रियां नहीं, व्यापक ज्ञान

किसी व्यक्ति को सबसे पढ़ालिखा कहना केवल डिग्रियों की संख्या पर निर्भर नहीं होना चाहिए. असली शिक्षा वह है, जो सोचने की क्षमता बढ़ाए. शिक्षा व्यक्ति को विनम्र बनाए. शिक्षा समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करे. डॉ. जिचकर में यह गुण दिखाई देते थे. वे अलगअलग विषयों को जोड़कर देखते थे. वे किसी समस्या को केवल एक नजरिए से नहीं समझते थे. वे विज्ञान, समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति को एक साथ समझने का प्रयास करते थे. उनका ज्ञान पुस्तकों तक सीमित नहीं था. वे समाज और प्रशासन की वास्तविक समस्याओं से भी जुड़े हुए थे. उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग सार्वजनिक जीवन में किया.

पढ़ाई के प्रति गजब का समर्पण

डॉ. जिचकर की सबसे बड़ी विशेषता उनका समर्पण था. वे नियमित रूप से पढ़ते थे. वे नए विषयों को सीखने से कभी पीछे नहीं हटे. कई लोग एक डिग्री हासिल करने के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं. डॉ. जिचकर ने ऐसा नहीं किया. वे जीवन भर सीखते रहे. उन्होंने हर नए विषय को चुनौती की तरह लिया. उनका जीवन बताता है कि सफलता के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं है. मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास भी जरूरी हैं. यदि लक्ष्य बड़ा हो, तो समय का सही उपयोग करना चाहिए.

क्या वे सचमुच भारत के सबसे पढ़ेलिखे व्यक्ति थे?

डॉ. श्रीकांत जिचकर को अक्सर भारत का सबसे पढ़ालिखा व्यक्ति कहा जाता है. हालांकि, इस तरह की उपाधि को पूरी तरह आधिकारिक मानना कठिन है. भारत में कई ऐसे विद्वान हुए हैं, जिन्होंने अलगअलग क्षेत्रों में उच्च शिक्षा हासिल की. कुछ लोगों ने बहुत अधिक डिग्रियां प्राप्त कीं. कुछ लोगों ने शोध, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में बड़ा योगदान दिया. इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि डॉ. जिचकर भारत के सबसे अधिक शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्तियों में से एक थे. उन्हें सबसे पढ़ालिखा कहने की लोकप्रिय धारणा उनकी असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियों पर आधारित है.

देश की पढ़ीलिखी हस्तियां

डॉ. भीमराव आंबेडकर.

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर: डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भारत और विदेशों के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने कानून, अर्थशास्त्र, राजनीति और समाजशास्त्र का गहरा अध्ययन किया. वे कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से जुड़े रहे. उन्होंने भारतीय संविधान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

    डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन,

  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान दार्शनिक, शिक्षक और लेखक थे. उन्होंने भारतीय दर्शन और पश्चिमी दर्शन का गहन अध्ययन किया. वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर भी रहे. बाद में वे भारत के उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति बने और शिक्षक दिवस की प्रेरणा बने.
  • जवाहरलाल नेहरू: जवाहरलाल नेहरू ने इंग्लैंड के हैरो स्कूल और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान और कानून का अध्ययन किया. वे इतिहास, राजनीति, विज्ञान और साहित्य के अच्छे जानकार थे. वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध लेखक भी बने.

    डॉ. कलाम.

  • डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम: डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने भौतिक विज्ञान और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उन्होंने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया.वे वैज्ञानिक, लेखक और भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति रहे. उनका जीवन विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और बड़े सपने देखने की प्रेरणा देता है.
  • रघुनाथ पुरुषोत्तम परांजपे: रघुनाथ पुरुषोत्तम परांजपे भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और शिक्षाविद थे.उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में गणित की पढ़ाई की और उल्लेखनीय सफलता हासिल की.वे फेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी बनने वाले शुरुआती भारतीयों में शामिल थे. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया और कई महत्वपूर्ण संस्थानों का नेतृत्व किया.

यूं तो श्रीकांत जिचकर को सबसे ज्यादा पढ़ालिखा माना जाता है. क्योंकि उन्होंने उस जमाने में इतने महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया जब देश में साक्षरता दर बेहद कम थी. जिचकर स्वतंत्र भारत में पैदा हुए थे. अन्य हस्तियों में से कई तब उच्च शिक्षा में मानदंड स्थापित करने में कामयाबी हासिल की थी, जब देश गुलाम था. शिक्षा की बेहद कमजोर व्यवस्था देश में थी. इसलिए उपरोक्त सभी हस्तियां आज भी प्रेरणा स्रोत हैं. इनकी जिंदगियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. पंडित नेहरू को छोड़कर सभी लोग बेहद साधारण परिवारों से आते थे. बावजूद इसके सबने उच्च शिक्षा में उच्च मुकाम हासिल किया.

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