पंजाब लोक भवन में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च शिक्षा’ पर कुलपतियों का सम्मेलन

चंडीगढ़ : पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल मानवकेंद्रित, नैतिक, समावेशी और समाज के प्रति जिम्मेदार तरीके से किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों को युवाओं को भविष्य की जरूरतों और उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करना होगा।
पंजाब लोक भवन में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च शिक्षा’ विषय पर आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कटारिया ने कहा कि एआई ने लोगों के सीखने, काम करने, शोध करने और निर्णय लेने के तरीकों में बड़ा बदलाव किया है। आने वाले दशकों में यह भारत की अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी शक्ति होगी।
उन्होंने कहा कि एआई को केवल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। चिकित्सा, कृषि, कानून, वित्त, भाषाओं और सामाजिक विज्ञान समेत विभिन्न क्षेत्रों में एआई शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। विश्वविद्यालय कृषि, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, शासन और पर्यावरण जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए एआई आधारित तकनीक विकसित करें।
राज्यपाल ने एआई प्रयोगशालाओं, ब्रिज कोर्स, प्रमाणन कार्यक्रमों, कौशल विकास और व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020, इंडिया एआई मिशन, भारतजेन, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन जैसी पहलों को शोध एवं तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने वाला बताया।
उन्होंने जिम्मेदार एआई के लिए डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, डीपफेक, गलत सूचना, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी विश्वविद्यालयों को गंभीरता से काम करने की सलाह दी। कटारिया ने कहा कि छात्रों को केवल यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि एआई क्या कर सकता है, बल्कि यह भी समझाना जरूरी है कि इसका उपयोग कहां किया जाना चाहिए और कहां नहीं।
सम्मेलन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने एआई एवं उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। प्रो. के.के. अग्रवाल, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा तथा अन्य विशेषज्ञों ने तकनीकी शिक्षा, उभरती एआई तकनीकों और उच्च शिक्षा में उनके उपयोग पर विचार रखे। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के डॉ. हरपाल थेठी ने विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच साझेदारी मजबूत करने तथा युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया।
कटारिया ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में उच्च शिक्षा संस्थानों और युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।



