
अर्पित शुक्ला, लखनऊ। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने वाली सरकारी सिंचाई व्यवस्था को बिजली के बिल का झटका न लगे, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 300 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह रकम सरकारी नलकूपों और बड़ीमध्यम लिफ्ट नहरों की बिजली के भुगतान में खर्च होगी। सरकार की ओर से यह राशि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को अग्रिम भुगतान के तौर पर दी जाएगी। दरअसल, गांवों में सरकारी नलकूप किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का बड़ा साधन हैं। इसी तरह बिजली से चलने वाली लिफ्ट नहरों के जरिए भी सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाता है। इन व्यवस्थाओं के संचालन के लिए नियमित बिजली की जरूरत होती है। बिजली बिल का भुगतान अटकने पर सिंचाई व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बिजली भुगतान के लिए रकम जारी की है।
सरकारी नलकूपों के लिए 200 करोड़, लिफ्ट नहरों के लिए 100 करोड़
सरकार ने 300 करोड़ रुपये को दो हिस्सों में रखा है। इसमें 200 करोड़ रुपये सरकारी नलकूपों की बिजली के भुगतान के लिए दिए गए हैं। वहीं 100 करोड़ रुपये बड़ी और मध्यम लिफ्ट नहरों की बिजली के बिल चुकाने के लिए जारी किए गए हैं। यानी किसानों की सिंचाई से जुड़ी दोनों प्रमुख सरकारी व्यवस्थाओं के बिजली खर्च के लिए 300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
पहले से 2500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान
यह 300 करोड़ रुपये कोई अलग से घोषित पैकेज नहीं है। वित्तीय वर्ष 202627 में सिंचाई विभाग के सरकारी नलकूपों और पंप लिफ्ट नहरों में इस्तेमाल होने वाली बिजली के भुगतान के लिए सरकार ने 2500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इसी प्रावधान के तहत अब 300 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
अधिकारियों को बिजली का बिल चुकाने के साथ हिसाब भी रखना होगा
सरकार ने रकम जारी करते हुए बिजली बिलों के सत्यापन और भुगतान के हिसाबकिताब पर भी सख्ती दिखाई है। वास्तविक बिजली बिलों का सत्यापन ऊर्जा विभाग से कराया जाएगा। हर महीने जारी किए गए बिजली बिलों का पूरा विवरण अगली किस्त के प्रस्ताव के साथ देना होगा। अगर किसी महीने के बिजली बिलों के सत्यापन या समायोजन में देरी होती है तो सिर्फ इस वजह से अगली धनराशि रोकने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
पहले मिली रकम का हिसाब भी जरूरी
नई अग्रिम राशि जारी करने से पहले सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता को यह देखना होगा कि पहले इसी काम के लिए ली गई अग्रिम राशि का नियमानुसार हिसाब और समायोजन हुआ है या नहीं। वित्तीय वर्ष 202627 में पावर कारपोरेशन को अब तक दी गई अग्रिम रकम के मुकाबले कितनी राशि का सत्यापन और समायोजन हुआ है, इसकी जानकारी भी सरकार ने 15 दिन के भीतर मांगी है।
किसानों को सीधे नहीं मिलेंगे 300 करोड़
यहां यह समझना जरूरी है कि 300 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में नहीं भेजे जा रहे हैं। यह किसानों के बिजली बिल माफ करने की घोषणा भी नहीं है। रकम सरकारी नलकूपों और बड़ीमध्यम लिफ्ट नहरों की बिजली के भुगतान के लिए पावर कारपोरेशन को दी जा रही है। इस फैसले का मकसद खेतों की सिंचाई से जुड़ी सरकारी व्यवस्थाओं के बिजली भुगतान को सुचारु रखना है। यानी जिन सरकारी नलकूपों और लिफ्ट नहरों के जरिए किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है, उनकी बिजली का बिल चुकाने के लिए सरकार ने 300 करोड़ रुपये की रकम जारी की है।



