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अफसरों को सीक्रेट पार्टियों में बुलाता था, फिर शुरू होता था ब्लैकमेल का खेल; भारतीय मूल के फाइनेंसर पर 954 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप.

अफसरों को सीक्रेट पार्टियों में बुलाता था, फिर शुरू होता था ब्लैकमेल का खेल; भारतीय मूल के फाइनेंसर पर 954 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप.

अमेरिका में भारतीय मूल के एक फाइनेंसर पर करोड़ों डॉलर की बैंक धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और धमकाने के गंभीर आरोप लगे थे। आरोप था कि उसने बैंक से जुड़े लोगों को अपने प्रभाव में लेने के लिए सीक्रेट पार्टियों का आयोजन किया था और बाद में उन्हीं पार्टियों से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया था।

मामला उस समय सामने आया था, जब करीब 100 मिलियन डॉलर यानी लगभग 954 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच शुरू हुई थी। जांच के दौरान कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों, शेल कंपनियों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर की परतें खुलती चली गई थीं।

लोन के नाम पर तैयार किया गया था पूरा जाल

मामले के मुताबिक, फाइनेंसर की कंपनी को रियल एस्टेट से जुड़े लोन खरीदने और उन्हें जारी करने के लिए बैंक की ओर से बड़ी रकम उपलब्ध कराई गई थी। इस रकम को लोन से होने वाली कमाई के जरिए वापस किया जाना था।

आरोप था कि इस पूरी व्यवस्था के तहत फर्जी कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया गया था। संपत्तियों से जुड़े टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया गया था, ताकि ऐसा लगे कि संबंधित संपत्तियों पर उसकी कंपनी का पहला अधिकार था।

इसके बाद ये दस्तावेज बैंक तक पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बैंक अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान भी कथित तौर पर गलत जानकारियां दी जाती रही थीं।

सीक्रेट पार्टियों में बुलाए जाते थे लोग

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित ब्लैकमेलिंग का तरीका था। अदालत से जुड़े दस्तावेजों में आरोप लगाया गया था कि फाइनेंसर निजी पार्टियों का आयोजन करता था, जहां ड्रग्स और सेक्स वर्कर्स भी मौजूद रहते थे।

आरोप था कि इन पार्टियों में बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल हुए थे। बाद में पार्टी में हुई गतिविधियों से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल उन्हें दबाव में रखने और अपने पक्ष में काम कराने के लिए किया जाता था।

यानी जिस पार्टी को मौज-मस्ती का जरिया समझा जाता था, आरोपों के मुताबिक वही बाद में ब्लैकमेल का हथियार बन जाती थी।

कर्मचारियों को भी दी जाती थीं धमकियां

जांच में फाइनेंसर के काम करने के तरीके को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए थे। बताया गया था कि विरोध करने वाले कर्मचारियों और कारोबारी प्रतिद्वंद्वियों को डराने के लिए धमकियों का सहारा लिया जाता था।

आरोपों के मुताबिक, कर्मचारियों को जान से मारने और उनके परिवार को बर्बाद करने तक की धमकियां दी गई थीं। इतना ही नहीं, कुछ संपत्तियों पर कब्जे के लिए हथियारबंद लोगों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगा था।

कारोबारी विवाद में भी आया था नाम

मामले के दौरान एक बड़े रियल एस्टेट विवाद में भी उसका नाम सामने आया था। एक मध्यस्थ ने कारोबारी विवाद में उसे भारी आर्थिक नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इस विवाद में नुकसान की रकम करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई थी।

आरोपों के मुताबिक, कारोबारी प्रतिद्वंद्वियों पर दबदबा बनाने के लिए डराने-धमकाने और हिंसा का सहारा लिया जाता था।

आलीशान घर से हुई थी गिरफ्तारी

मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद भारतीय मूल के इस फाइनेंसर को अमेरिका में उसके आलीशान घर से गिरफ्तार किया गया था। वह अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर रह रहा था।

जांच एजेंसियों का आरोप था कि उसने निजी फायदे के लिए वित्तीय दस्तावेजों में कथित हेरफेर किया था और बैंकिंग व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया था। उस पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर थे और दोष सिद्ध होने पर उसे लंबी जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता था।

पूरे मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा था, क्योंकि इसमें कथित बैंक धोखाधड़ी के साथ-साथ ब्लैकमेलिंग, निजी पार्टियों और धमकियों का ऐसा नेटवर्क सामने आया था, जिसने पूरे वित्तीय घोटाले को और सनसनीखेज बना दिया था।

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