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Vaibhav Suryavanshi को आराम नहीं, पूरे साल खिलाओ: Sivaramakrishnan की Team India को सलाह

.भारत के पूर्व लेग स्पिनर एल शिवरामकृष्णन का मानना है कि 15 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को आराम देने के बजाय लगातार खेलने का मौका मिलना चाहिए ताकि उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में अनुभव और गलतियों से सीखने का अवसर मिलेगा।
इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 15 वर्ष 99 दिन की उम्र में भारत के लिए पदार्पण करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने सूर्यवंशी ने अपने पहले ही मैच में 10 गेंदों पर दो छक्कों की मदद से 14 रन बनाए।

Vaibhav Suryavanshi को आराम नहीं, पूरे साल खिलाओ: Sivaramakrishnan की Team India को सलाह

वेस्टइंडीज के खिलाफ 1983 में 17 वर्ष की उम्र में टेस्ट पदार्पण करने वाले शिवरामकृष्णन का मानना है कि जब टीम प्रबंधन ने सूर्यवंशी पर भरोसा जताया है तो उन्हें पर्याप्त अवसर भी दिए जाने चाहिए।
शिवरामकृष्णन ने ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, ‘‘उसे सीमित ओवरों के क्रिकेट में लगातार मौके मिलने चाहिए। युवा खिलाड़ी को टीम में शामिल करके फिर आराम देने का कोई मतलब नहीं है। उसे अभी आराम की जरूरत नहीं है, बल्कि पूरे साल खेलना चाहिए। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘ एक बल्लेबाज होने के नाते उसे गेंदबाजों जैसी फिटनेस प्रबंधन की आवश्यकता नहीं होगी। लंबे समय तक बल्लेबाजी करने से उसकी एकाग्रता और मानसिक मजबूती भी बढ़ेगी।’’

शिवरामकृष्णन ने कहा, ‘‘ एक बार जब आप ने उसे टीम में खिलाने का फैसला कर लिया है, तो उसे पूरा मौका भी देना चाहिए। वह अगले 20 वर्षों के लिए भारतीय क्रिकेट का निवेश है। इस समय सूर्यवंशी को सबसे अधिक जरूरत मुख्य कोच गौतम गंभीर, कप्तान श्रेयस अय्यर और टीम के बाकी खिलाड़ियों के समर्थन की है। अगर शुरुआती कुछ मैचों में उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं भी रहता है, तब भी उसका पूरा साथ दिया जाना चाहिए और उसे लगातार मौके मिलते रहने चाहिए।’’
शिवरामकृष्णन का मानना है कि सूर्यवंशी स्वाभाविक रूप से आक्रामक स्ट्रोक खेलने वाले बल्लेबाज हैं। ऐसे में खिलाड़ी से कुछ गलतियां भी हो सकती हैं।
इस पूर्व लेग स्पिनर ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि उसका सही तरीके से मार्गदर्शन किया जाए और उसे पूरा समर्थन मिले। वह ऐसा स्ट्रोक प्लेयर है जो कई बार जोखिम उठाएगा, लेकिन आधुनिक क्रिकेट जोखिम लेने का ही खेल है। इसलिए उसे अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली या अपने नजरिये को बदलने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सूर्यवंशी को समझना होगा कि गेंदबाज उनके खिलाफ किस तरह की रणनीति बना रहे हैं।

उन्होंने मैनचेस्टर टी20 में स्पिनर के खिलाफ सूर्यवंशी के जल्दबाजी में बड़ा शॉट खेलने का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभव के साथ उन्हें परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की कला भी सीखनी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अब जबकि उसे इतने बड़े स्तर पर खेलने का अनुभव मिलने लगा है, उसे यह भी सोचना शुरू करना होगा कि सामने वाला गेंदबाज उसके खिलाफ किस तरह की रणनीति अपनाने वाला है।”
शिवरामकृष्णन का मानना है कि सूर्यवंशी जैसी असाधारण प्रतिभा को एकदिवसीय क्रिकेट में भी मौका मिलना चाहिए और वह अगले वर्ष होने वाले 50 ओवर के विश्व कप के लिए शीर्ष क्रम के संभावित बल्लेबाज के रूप में उभर सकता है।

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