Satya Report: अच्छी सेहत के लिए हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल दोनों का होना बेहद जरूरी है। हेल्दी डाइट का मतलब सिर्फ कम खाना नहीं, बल्कि संतुलित और पोषक आहार लेना है। रोज़ाना की डाइट में ताज़े फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फलियां शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, फाइबर और प्रोटीन मिल सके। हेल्दी लाइफस्टाइल बॉडी को बीमारियों से दूर रखता है और सेहत में सुधार करता है। समय पर सोना, समय पर जागना, समय पर खानापीना और वॉक करना हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा है। खाने के बाद वॉक एक ऐसी हेल्दी हैबिट्स है जो आपकी बॉडी को हेल्दी रखती है।

गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वी. के. मिश्रा, के अनुसार, पोस्टमील वॉक को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि कई रिसर्च यह साबित कर चुकी हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद की गई हल्की वॉक शरीर में ब्लड शुगर स्पाइक को कम करती है, पाचन को तेज करती है और हार्ट के लिए फायदेमंद होती है।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की स्टडी के मुताबिक जिन लोगों को डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का खतरा है, उनके लिए खाना खाने के बाद 15 मिनट की वॉक, 45 मिनट की मॉर्निंग वॉक से भी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। NIH की ट्रायल्स में यह भी पाया गया कि पोस्टमील वॉक से गैस, ब्लोटिंग और पेट की भारीपन की समस्या में दवाओं से ज्यादा राहत मिली। इसके अलावा ये आदत वजन कंट्रोल, हार्ट सर्कुलेशन, स्ट्रेस कम करने और नींद की क्वालिटी सुधारने में भी मदद करती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि खाने के बाद 15 मिनट की वॉक करने से बॉडी में कौनकौन से बदलाव होते हैं।
पोस्टमील वॉक ब्लड शुगर करती है कंट्रोल
खाना खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है, जिसे पोस्ट मील शुगर स्पाइक कहा जाता है। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद 10–15 मिनट की हल्की वॉक करते हैं, तो यह शुगर के तेज उछाल को तेजी से कम कर देती है। स्टडीज बताती हैं कि इस दौरान मसल्स ग्लूकोज को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करने लगती हैं, जिससे शुगर खून में जमा नहीं होती। यही वजह है कि डायबिटीज और प्रीडायबिटीज वालों के लिए यह आदत बेहद फायदेमंद मानी जाती है।
डायबिटीज और प्रीडायबिटीज वालों के लिए ज्यादा असरदार
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की रिसर्च के अनुसार, जिन लोगों को ग्लूकोज इंटॉलरेंस या डायबिटीज का खतरा होता है, उनके लिए खाना खाने के बाद की 15 मिनट की वॉक, सुबह खाली पेट की 45 मिनट की वॉक से भी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। ये स्टडी बताती है कि वॉक का टाइम डायबिटीज कंट्रोल में अहम भूमिका निभाता है।
पाचन होता है तेज और खाना जल्दी पचता है
कंट्रोल स्टडी में पाया गया कि अगर कोई व्यक्ति खाना खाने के तुरंत बाद लगभग 4 किमी/घंटा की स्पीड से हल्की वॉक करता है, तो पेट की गैस्ट्रिक एम्प्टिव टाइम कम हो जाती है।
इसका मतलब है कि खाना पेट में ज्यादा देर तक रुका नहीं रहता और जल्दी आगे बढ़ता है, जिससे पाचन बेहतर होता है।
गैस, ब्लोटिंग में मिलती है राहत
NIH की ट्रायल्स के अनुसार, जिन लोगों को खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस बनना, भारीपन और फुलनेस की शिकायत रहती थी, उन्होंने जब 4 हफ्ते तक रोज़ 10–15 मिनट पोस्टमील वॉक की, तो इन सभी समस्याओं में उन्हें राहत मिली। डॉ. मिश्रा के अनुसार, कई मामलों में यह आदत दवाओं से भी ज्यादा असरदार साबित हुई।
हार्ट हेल्थ और ब्लड सर्कुलेशन में होता है सुधार
खाना खाने के बाद हल्की वॉक करने से कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ बेहतर होती है। NIH की एक स्टडी में टाइप2 डायबिटीज वाले मरीजों पर पाया गया कि पोस्टमील वॉक से
एंडोथेलियल फंक्शन में सुधार होता है। ब्लड वेसल्स ज्यादा हेल्दी रहती हैं और सर्कुलेशन बेहतर होता है। 2023 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, खाने के बाद वॉक करने से डाइटरी फैट से होने वाले मेटाबॉलिक डिस्टरबेंस भी कंट्रोल में रहते हैं।
वजन रहता है कंट्रोल
कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि रोज खाने के बाद वॉक करने से वजन कंट्रोल रहता है। रिसर्च बताती है कि अगर कोई व्यक्ति रोज़ खाना खाने के बाद टहलता है, तो शरीर में फैट स्टोर होने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।
मेटाबॉलिज्म एक्टिव रहता है
लंबे समय तक इस आदत को अपनाने से 1.5 से 3 किलो तक वजन घटने की संभावना देखी गई है। डॉ. मिश्रा के अनुसार, पोस्टमील वॉक सिर्फ कैलोरी बर्न नहीं करती, बल्कि
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है, मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखती है और शरीर को एनर्जी यूज़ करने के लिए ट्रेन करती है।
नींद की क्वालिटी बेहतर होती है
खाना खाने के बाद की फिजिकल एक्टिविटी स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करती है, मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को बढ़ाती है जिससे नींद गहरी आती है और नींद का पैटर्न ज्यादा स्थिर रहता है।
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डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सिद्धांतों और डॉक्टर के सुझावों पर आधारित है। यदि आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो कोई भी नया नियम शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। जंसत्ता इन जानकारियों की जिम्मेदारी नहीं लेता है।



