ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारत दौरे पर हैं. यहां उन्होंने अमेरिका के साथ जंग और ईरानभारत संबंधों पर के साथ कई अहम मुद्दों पर बात की. भारतईरान संबंधों पर अराघची ने कहा कि ईरान और भारत 2 प्राचीन सभ्यताएं हैं. दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध रहे हैं. दोनों देशों ने एकदूसरे के साथ साझा मूल्यों का आदानप्रदान किया है. हमारे आर्थिकराजनीतिक संबंध और सहयोग बहुत मजबूत हैं. ये संबंध आपसी सम्मान और हितों पर आधारित हैं. होर्मुज सभी मित्र देशों के लिए खुला है. इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर हमला भी किया.

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, मेरा देश आक्रामकता का शिकार रहा है. हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है. इसके लिए हमारे पास हर कारण हैं लेकिन अमेरिका के पास हम पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं है. हम किसी भी तरह के प्रतिबंधों के भी खिलाफ हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम भारत सरकार और उन सभी देशों की सराहना करते हैं, जिन्होंने हमारे साथ एकजुटता दिखाई. फिलहाल हम युद्धविराम की स्थिति में हैं. इन मुद्दों का कोई भी सैन्य समाधान संभव नहीं है.
US गंभीरता दिखाता है तो तेहरान बातचीत के लिए तैयार
अब्बास अराघची ने बातचीत को पेचीदा बनाने के लिए अमेरिका के विरोधाभासी संदेशों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि सबसे अहम चीज है यकीन. हर चीज को क्लियर किया जाना चाहिए. रही बात अमेरिका की तो उसने अपने किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया है. बातचीत की टेबल पर उन्हें कोई भी सफलता नहीं मिली है. अगर वाशिंगटन गंभीरता दिखाता है तो तेहरान बातचीत के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा कि पिछली कूटनीतिक कोशिशों के बाद अब ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है. हम बातचीत में तभी रुचि रखते हैं, जब दूसरा पक्ष भी गंभीर हो. भारत और UAE के संबंधों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत के संबंध तो कई देशों के साथ हैं. हमारे लिए जो बात सबसे ज़्यादा मायने रखती है, वह है भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध.
जयशंकर के साथ बहुत अच्छे व्यक्तिगत और कामकाजी संबंध
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि कूटनीति को मौका देने के लिए हम सीजफायर को बनाए रखे हुए हैं, भले ही यह कितना भी नाज़ुक क्यों न हो. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को अब किसी भी सैन्य समाधान की कोई उम्मीद नहीं रह गई है. यही कारण है कि उसने बातचीत का प्रस्ताव रखा है. मैं भारत सरकार और अपने बहुत अच्छे मित्र विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल को दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य की सराहना करता हूं.
उन्होंने कहा कि जयशंकर के साथ मेरे बहुत अच्छे व्यक्तिगत और कामकाजी संबंध हैं. पिछले दो महीनों के दौरान, जब युद्ध चल रहा था तब भी हम लगातार एकदूसरे के संपर्क में थे. हम भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत अधिक महत्व देते हैं. होर्मुज सभी मित्र देशों के लिए खुला है. जैसे ही अमेरिका की आक्रामकता खत्म होगी, हालात सामान्य हो जाएंगे और होर्मुज से सभी जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी.



