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Wedding Tradition: दूल्हा शादी में सफेद घोड़ी पर ही क्यों बैठता है? जानिए इसके पीछे की मान्यता

Indian Wedding Tradition: फिल्मों से लेकर असल जीवन में हम सबने देखा है कि आमतौर पर दूल्हा सफेद घोड़ी पर सवार होकर पूरे बारात के साथ दुल्हन को लेने जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों बैठता है, घोड़े पर क्यों नहीं? और वह भी सफेद घोड़ी पर ही क्यों?

Wedding Tradition: दूल्हा शादी में सफेद घोड़ी पर ही क्यों बैठता है? जानिए इसके पीछे की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में छुपा है अर्थ

रामायण के अनुसार, भगवान राम ने ‘अश्वमेधयज्ञ’ के लिए घोड़े का इस्तेमाल किया था। घोड़े को पकड़ने का मतलब था चुनौती स्वीकार करना और अधीनता को नकारना, क्योंकि वह घोड़ा अयोध्या के गौरव और सम्मान का प्रतीक था।

घोड़ा इंद्रियों का प्रतिनिधित्व करता है और घोड़े को नियंत्रित करने या उस पर जीत हासिल करने का मतलब है 10 इंद्रियों पर जीत हासिल करना। हिंदू पौराणिक कथाओं में ऐसे और भी उदाहरण मिलते हैं जिनसे पता चलता है कि घोड़े को नियंत्रित करना इंद्रियों पर नियंत्रण का ही प्रतीक है। शादी भी कुछ ऐसा ही बंधन होता है।

शादी

दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों बैठता है, घोड़े पर क्यों नहीं?

कहा जाता है कि घोड़ा स्वभाव से अधिक उग्र और आक्रामक होता है। बिना किसी प्रैक्टिस या लर्निंग के घोड़े को कंट्रोल करना मुश्किल होता इसके अलावा घोड़ा काफी तेज, फुर्तीला और शक्तिशाली होता है, इसलिए प्राचीन समय में उसका उपयोग युद्धभूमि में किया जाता था।

वहीं, विवाह एक खुशियों और उत्सव का अवसर होता है। ऐसे में उग्र स्वभाव और युद्ध से जुड़े गुणों की आवश्यकता नहीं होती। इसके विपरीत, घोड़ी का स्वभाव अपेक्षाकृत शांत और सौम्य माना जाता है। यही कारण है कि विवाह समारोह में दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर जाता है।

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घोड़ी पर बैठने के पीछे की परंपरा

विवाह में दूल्हे का घोड़ी पर बैठना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि वह अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने के लिए तैयार है। यह भी माना जाता है कि घोड़ी पर सवार होकर दूल्हा यह दर्शाता है कि वह की जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम है। इसी सोच के साथ यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है।

दूल्हा सफेद घोड़ी पर ही क्यों बैठता है?

आपने अक्सर देखा होगा कि दूल्हा सफेद रंग की घोड़ी पर ही बारात लेकर आता है। दरअसल, सफेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही यह पवित्रता, प्रेम, उदारता, सौभाग्य और समृद्धि का भी प्रतिनिधित्व करता है।

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जब कोई व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करता है, तो ये सभी गुण उसके जीवन में और शुभ संदेश देते हैं। यही वजह है कि विवाह के अवसर पर दूल्हे के लिए सफेद घोड़ी को विशेष महत्व दिया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ घोड़े को गति, शक्ति, वफादारी, भक्ति और ऊर्जा के प्रतीक के तौर पर दिखाया गया है। वैवाहिक जीवन भी गुणों पर निर्भर करती है।

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