अगर आप उत्तर प्रदेश में ऐपबेस्ड कैब सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपके लिए कई चीजें बदलने वाली हैं. राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 2026 लागू कर दी है. 22 मई को अधिसूचित नियमों को अब लागू करने के लिए सरकार ने upmyfleet.com पोर्टल भी शुरू किया है.

पहली बार ऐप के जरिए चलने वाली कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए राज्य में एक औपचारिक नियामक ढांचा बनाया गया है.सबसे बड़ा बदलाव किराए, कैंसिलेशन, ड्राइवर की जांच, बीमा और शिकायतों से जुड़ा है.
कैब के किराए को लेकर यूपी की नई मोटरयान नियमावली में क्याक्या बदलाव हैं?
- ऐपबेस्ड कैब कंपनियां अब तक पीक टाइम में अचानक किराया कई गुना बढ़ा देती थीं.
- बारिश, त्योहार, ऑफिस टाइम बड़े आयोजन के दौरान यात्रियों को सामान्य से काफी ज्यादा किराया देना पड़ता था.
- अब नए नियमों में डायनेमिक प्राइसिंग यानी मांग बढ़ने पर किराया बढ़ाने की सीमा तय की गई है.
- कंपनियां निर्धारित बेस फेयर से 50% से ज्यादा अतिरिक्त किराया नहीं वसूल सकेंगी.
- हाई डिमांड के समय भी किराया पूरी तरह कंपनी की मर्जी पर निर्भर नहीं रहेगा.
अब बुकिंग स्वीकार करने के बाद ड्राइवर ने कैंसिल किया तो क्या होगा?
- ड्राइवर बुकिंग स्वीकार करने के बाद फोन करके यात्री से कहता है कि वह खुद राइड कैंसिल कर दे.
- यात्री के लिए इससे समय भी खराब होता है और कई बार दूसरी कैब के लिए ज्यादा किराया देना पड़ता है.
- नए नियमों में इस तरह की स्थिति पर भी कार्रवाई का प्रावधान है.
- ड्राइवर बिना कारण बताएं यात्री को लेने नहीं पहुंचता है, तो उस पर 100 का जुर्माना लगाया जा सकता है.
- यह रकम प्रभावित यात्री को भविष्य की राइड में इस्तेमाल करने के लिए क्रेडिट किए जाने का प्रावधान है.
- यात्री के भी बेवजह कैंसिलेशन पर भी उसपर किराए का 10%, अधिकतम ₹100 तक पेनल्टी का नियम है.
कैब ड्राइवरों की सुविधाओं के लिए सरकार ने क्याक्या प्रावधान किए?
यूपी में उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली में यात्रियों के साथसाथ कैब ड्राइवरों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की कोशिश की गई है.एग्रीगेटर कंपनियों को ड्राइवरों के लिए कम से कम ₹5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस देना होगा. इससे दुर्घटना, बीमारी या ड्राइवर की मृत्यु की स्थिति में उसके और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी.
ड्राइवरों के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन, पुलिस वेरिफिकेशन और साइकोलॉजिकल असेसमेंट जैसी प्रक्रियाएं जरूरी होंगी. साथ ही ड्राइवरों को ट्रेनिंग और समयसमय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी.इसका मतलब यह है कि अब कोई व्यक्ति सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के आधार पर आसानी से ऐपबेस्ड कैब ड्राइवर के तौर पर काम नहीं कर सकेगा.
यात्री की सुरक्षा के लिए कैंब कंपनियों को सरकार ने क्याक्या निर्देश दिए?
- ऐपबेस्ड कैब से सफर करने वाले यात्रियों के लिए ड्राइवर की पहचान और ट्रिप की निगरानी को मजबूत किया जाएगा.
- वाहनों में AIS140 ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन जैसे सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य किए गए हैं.
- इन्हें कंट्रोल रूम और राज्य के कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा.
- ऐप कंपनियों को शिकायतों के लिए 24 घंटे उपलब्ध कंट्रोल रूम/कॉल सेंटर का सिस्टम बनाना होगा.
- साथ ही शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था करनी होगी.
कंपनियों द्वारा ड्राइवरों का कितना प्रतिशत हिस्सा देना जरूरी है?
कई कैबबेस्ड ऐप कंपनियां ड्राइवर को सिर्फ अपने यहां काम करने को मजबूर करती हैं. लेकिन अब से वह ऐसा नहीं कर सकेगा. नई पॉलिसी के लागू होने के बाद ड्राइवर एक से ज्यादा एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़कर काम कर सकेंगे. यानी किसी एक कंपनी के प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने की बाध्यता नहीं होगी.
अब तक कैब कंपनियां अपनी मनमर्जी से ड्राइवरों को किराए का हिस्सा देती थीं. नई पॉलिसी में ड्राइवर को मिलने वाले किराए के हिस्से को भी नियमों में संरक्षित किया गया है. अपनी गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर को किराए का कम से कम 80% हिस्सा मिलना चाहिए, जबकि एग्रीगेटर की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर के लिए यह हिस्सा कम से कम 60% रखा गया है.
कैब कंपनियों के लिए सरकार ने किन प्रावधानों को जरूरी किया?
अब ऐपबेस्ड कैब और डिलीवरी कंपनियां सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करके नियमों से बाहर नहीं रह सकेंगी. उन्हें सरकार के निर्धारित नियमों के तहत लाइसेंस लेना होगा.लाइसेंस के लिए 25,000 रुपये आवेदन शुल्क और 5 लाख लाइसेंस फीस निर्धारित किए गए हैं.
साथ ही कंपनी को अपने परिचालन के आकार के हिसाब से 10 लाख से 50 लाख रुपये तक सिक्योरिटी डिपॉजिट भी रखना होगा.नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 25,000 से लेकर 1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है.
असल बात यह है कि, अब यूपी में कैब कंपनियों की मनमानी पर लगेगी लगाम
नई एग्रीगेटर पॉलिसी आने का साफ मतलब है कि अब यूपी में ऐपबेस्ड कैब का कारोबार पूरी तरह ‘ऐप की मर्जी’ पर नहीं चलेगा. किराए में मनमानी पर सीमा, अनुचित कैंसिलेशन पर राहत और शिकायत की व्यवस्था होगी.ड्राइवर के लिए वेरिफिकेशन, ट्रेनिंग, बीमा और कमाई में हिस्सेदारी से जुड़े नियम होंगे.वहीं, कैब कंपनियों को भी सरकार के बनाए नियमों और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत काम करना जरूरी होगा.



