
अमरनाथ यात्रा इस वर्ष एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद प्राकृतिक हिमलिंग के पूरी तरह पिघलने की खबर सामने आई, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, इस दौरान एक लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके थे। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान, जलवायु परिवर्तन और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी जैसे कारण हिमलिंग के जल्दी पिघलने में भूमिका निभा सकते हैं। दूसरी ओर, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इसे पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया बताया है। इसी बीच अमरनाथ गुफा के इतिहास और उसकी खोज को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। खासतौर पर यह सवाल फिर चर्चा में है कि अमरनाथ गुफा की खोज किसने की थी।
बूटा मलिक और अमरनाथ गुफा की लोककथा
लोककथाओं के अनुसार लगभग 500 वर्ष पहले पहलगाम क्षेत्र के मुस्लिम गड़रिये बूटा मलिक का नाम अमरनाथ गुफा की पुनर्खोज से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि एक दिन वह अपनी भेड़-बकरियां चराने निकले थे, तभी रास्ते में उनकी मुलाकात एक साधु से हुई। साधु ने उन्हें एक कांगड़ी भेंट की। घर पहुंचने पर जब उन्होंने कांगड़ी खोली तो उसमें कोयलों की जगह सोना मिला। अगले दिन बूटा मलिक उसी स्थान पर लौटे ताकि साधु को धन्यवाद दे सकें, लेकिन वहां उन्हें साधु नहीं मिले। उनकी जगह उन्हें एक गुफा दिखाई दी, जिसके भीतर प्राकृतिक बर्फ से बना विशाल शिवलिंग मौजूद था। इसके बाद उन्होंने आसपास के लोगों और साधुओं को इस स्थान की जानकारी दी। धीरे-धीरे यह पवित्र स्थल श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध हो गया और अमरनाथ यात्रा की परंपरा व्यापक रूप से स्थापित हुई।
इस कथा की ऐतिहासिक प्रमाण हैं सीमित
हालांकि, इतिहासकारों और धार्मिक विद्वानों का कहना है कि इस कथा के ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं और इसे मुख्य रूप से लोक परंपरा के रूप में देखा जाता है। फिर भी बूटा मलिक और उनके परिवार का नाम अमरनाथ यात्रा के इतिहास से लंबे समय से जुड़ा रहा है। परंपरागत रूप से उनके वंशज यात्रा से संबंधित कुछ व्यवस्थाओं में भी सहभागी रहे हैं।
अमरनाथ यात्रा की कब हुई शुरुआत?
अमरनाथ यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई निश्चित ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक उल्लेखों के आधार पर माना जाता है कि यह तीर्थस्थल सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ वही स्थान है, जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह गुफा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिनी जाती है। समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा तक हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार करके पहुंचते हैं और प्राकृतिक हिमलिंग के दर्शन करते हैं।
सबसे पहले किसने किए थे बाबा बर्फानी के दर्शन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ गुफा के सबसे पहले दर्शन महर्षि भृगु ने किए थे। भृगु संहिता में वर्णित कथा के अनुसार, जब महर्षि कश्यप ने कश्मीर घाटी से जल निकासी करवाई, तब महर्षि भृगु तपस्या के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश करते हुए इस गुफा तक पहुंचे। वहीं उन्होंने प्राकृतिक हिम शिवलिंग के दर्शन किए। इसी कारण कई धार्मिक परंपराओं में महर्षि भृगु को अमरनाथ का प्रथम तीर्थयात्री माना जाता है।
इस वर्ष कब तक चलेगी अमरनाथ यात्रा?
प्राकृतिक हिमलिंग के पिघल जाने के बावजूद अमरनाथ यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है। यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण के साथ यात्रा करें और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।



