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रातभर तांबे के गिलास में रखा पानी पीने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानें आयुर्वेद और मेडिकल साइंस का नज़रिया..

रातभर तांबे के गिलास में रखा पानी पीने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानें आयुर्वेद और मेडिकल साइंस का नज़रिया..

सदियों से भारतीय रसोइयों और आयुर्वेद में धातु के बर्तनों में खाना पकाने और पानी पीने को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है। लोग पीतल के बाद, तांबे के बर्तन (Copper Vessel) में रखा पानी पीने पर भी जोर दे रहे हैं। कई लोगों के दिन की शुरुआत रातभर तांबे के गिलास में रखे पानी को पीने से होती है। माना जाता है कि यह पानी शरीर के त्रिदोषों यानी वात, पित्त, कफ को संतुलित करने, पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन क्या रातभर तांबे के बर्तन में पानी रखना हर किसी के लिए सुरक्षित है?

द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर, कानपुर में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा भारतीय घरों में लंबे समय से चली आ रही है। पहले घरों में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल पानी रखने और खाना पकाने के लिए भी किया जाता था। आयुर्वेद में भी तांबे के बर्तन में पानी रखने और पीने का जिक्र किया गया है। आधुनिक समय में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। एक्सपर्ट के मुताबिक तांबा (Copper) एक धातु है और शरीर के लिए जरूरी ट्रेस मिनरल्स में शामिल है। जब पानी इसमें 8 से 10 घंटे तक रहता है तो इसमें तांबे के कुछ गुण आ सकते हैं। एक्सपर्ट से जानते हैं कि रातभर तांबे के गिलास में पानी रखकर पीने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसके सही नियम क्या हैं, किसे इसका सेवन करने से बचना चाहिए और कौन-सी गलतियां आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं।

तांबे के बर्तन में पानी रखकर पीने से सेहत पर कैसा होता है असर?

डॉ. वी.के. मिश्रा के अनुसार, तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है। डॉक्टर वीके मिश्रा के मुताबिक अगर पानी को करीब 8 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा जाए, तो उसमें तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुण आ सकते हैं, जो कुछ बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद कर सकते हैं। तांबे को शरीर के लिए जरूरी ट्रेस मिनरल माना जाता है, जो इम्यून सिस्टम, आयरन मेटाबॉलिज्म, नर्वस सिस्टम और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।

डॉक्टर के मुताबिक, तांबे के बर्तन में रखा पानी पाचन और कब्ज में भी मदद कर सकता है तथा इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होने की बात कही जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि तांबा हृदय, थायराइड और मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है और आयरन के उपयोग में भी भूमिका निभाता है। हालांकि, शरीर को तांबे की बहुत कम मात्रा की जरूरत होती है और इसकी अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है। अत्यधिक तांबा लेने से मतली, उल्टी और लिवर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के तांबा सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए। उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति तांबे के बर्तन का पानी पीना चाहता है, तो पानी को लगभग 8 घंटे तक बर्तन में रखकर सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।

आयुर्वेद के मुताबिक तांबे के बर्तन का पानी पीने का सेहत पर असर

तांबे के लोटे में रखा पानी किसे पीना चाहिए?

तांबे के लोटे में रखा पानी पीना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जाना चाहिए। जिन लोगों के शरीर में तांबे (Copper) की कमी है, उनके लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी उपयोगी हो सकता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है और उसे किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं है, तो उसके लिए सामान्य सादा पानी ही पर्याप्त बताया गया है।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है तांबा?

तांबा शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों (Trace Mineral) में से एक है। यह शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। शरीर में तांबे के अलावा आयरन, जिंक और अन्य कई खनिज तत्व भी मौजूद होते हैं, जो हमें भोजन के जरिए मिलते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट Rajiv Dixit ने एक वीडियो में बताया तांबा का पानी हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन लोगों के बाल तेजी से झड़ते हैं या टूटते हैं, उनमें तांबे की कमी हो सकती है और ऐसे लोगों को तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से फायदा हो सकता है। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे पोषण संबंधी कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव, थायरॉइड से जुड़ी समस्या, आनुवंशिक कारण या स्कैल्प की बीमारी। इसलिए केवल बाल झड़ने को तांबे की कमी का संकेत मानना उचित नहीं है।

आंखों की रोशनी और तांबे का क्या संबंध है?

वीडियो में बताया गया है कि आंखों की रोशनी कम होने पर शरीर में तांबे की मात्रा कम हो सकती है और ऐसे लोगों के लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी फायदेमंद हो सकता है।

क्या तांबे के बर्तन का पानी रोज पीना चाहिए?

राजीव दीक्षित ने तांबे के बर्तन में रखा पानी लगातार पीने के बजाय बीच-बीच में अंतर रखने की बात कही गई है। इसमें तीन महीने तक पानी पीने और फिर एक महीने का ब्रेक लेने की सलाह दी गई है।

तांबे की अधिक मात्रा भी नुकसानदायक हो सकती है

आयुर्वेद के मुताबिक तांबा शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि तांबे के बर्तन में रखा पानी जितना अधिक पिया जाए, उतना ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा। तांबे की कमी का संदेह होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना बेहतर है। तांबे के बर्तन में पानी रखना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन इससे बाल झड़ना, आंखों की रोशनी कम होना या अन्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं ऐसे दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना एक पारंपरिक प्रचलन है, लेकिन इसके सभी बताए गए स्वास्थ्य लाभों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। तांबे की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है। तांबे की कमी या किसी स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

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