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भीषण गर्मी और कब्ज का क्या है कनेक्शन? डॉ. ने बताया पेट साफ न होने के 5 बड़े कारण; लापरवाही पड़ सकती है भारी

पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है और इसके साथ ही हमारे शरीर की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है। क्या आपने महसूस किया है कि भीषण गर्मी के दौरान पेट फूलना, गैस और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं? दरअसल, शरीर में पानी की कमी और बदलता तापमान हमारे मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देता है।  देर रात तक जागना, फास्ट फूड खाना, कम पानी पीना और घंटों बैठे रहना पाचन तंत्र को धीरेधीरे कमजोर कर देता है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक कब्ज रहने पर बवासीर, फिशर, पेट फूलना और गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।  

भीषण गर्मी और कब्ज का क्या है कनेक्शन? डॉ. ने बताया पेट साफ न होने के 5 बड़े कारण; लापरवाही पड़ सकती है भारी
भीषण गर्मी और कब्ज का क्या है कनेक्शन? डॉ. ने बताया पेट साफ न होने के 5 बड़े कारण; लापरवाही पड़ सकती है भारी

गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल, कानपुर के सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वीके मिश्रा के अनुसार कब्ज अचानक नहीं होती, बल्कि इसके पीछे हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं। कई लोग रोज घंटों टॉयलेट में बैठकर परेशानी झेलते हैं, लेकिन असली कारणों को समझ नहीं पाते। कब्ज का असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर की ऊर्जा और रोजमर्रा की दिनचर्या को भी प्रभावित कर सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कब्ज के पीछे पांच मुख्य कारण क्या हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना और सुधारना बेहद जरूरी है।

फाइबर की कमी और गलत खानपान बढ़ाते हैं कब्ज

एक्सपर्ट्स के अनुसार कब्ज की सबसे बड़ी वजह खराब डाइट हो सकती है। अगर रोजाना खाने में फाइबर कम और तलाभुना या प्रोसेस्ड फूड ज्यादा शामिल हो, तो आंतों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। फाइबर मल को नरम रखने और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। वहीं कम पानी पीने से मल सख्त हो सकता है, जिससे पेट साफ होने में परेशानी होती है। लगातार जंक फूड, मैदे वाली चीजें और कम पानी का सेवन पाचन तंत्र को कमजोर बना सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक अध्ययन के अनुसार, फाइबर केवल मल को भारी नहीं बनाता, बल्कि यह आंतों में मौजूद ‘शॉर्टचेन फैटी एसिड’ के उत्पादन को बढ़ाता है। रिसर्च बताती है कि जो लोग प्रतिदिन 2530 ग्राम फाइबर लेते हैं, उनकी आंतों की मांसपेशियों में संकुचन बेहतर होता है, जिससे कब्ज का खतरा 35% तक कम हो जाता है। कब्ज का इलाज करना है तो डाइट में फलों और सब्जियों का सेवन करें। 

खराब लाइफस्टाइल से सुस्त पड़ सकता है पाचन तंत्र

दिनभर बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और पर्याप्त नींद न लेना भी कब्ज की बड़ी वजह मानी जाती है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी से आंतों की मूवमेंट धीमी पड़ जाती है, जिससे मल त्याग में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा खराब स्लीप रूटीन शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रोजाना हल्की वॉक, योग और अच्छी नींद पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। Scandinavian Journal of Gastroenterology में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, रोजाना 30 मिनट की मध्यम वॉक आंतों में खून के बहाव को बढ़ाती है। शारीरिक सक्रियता से पेट की मांसपेशियां उत्तेजित होती हैं, जो मल को आंतों के जरिए आगे धकेलने में मदद करती हैं। ‘सिटिंग जॉब’ वाले लोगों में पाचन तंत्र 20% अधिक सुस्त पाया गया है।

नेचुरल कॉल को बारबार रोकना पड़ सकता है भारी

कई लोग काम की व्यस्तता या आलस की वजह से मल त्याग की इच्छा को टालते रहते हैं। धीरेधीरे यह आदत कब्ज का कारण बन सकती है। जब शरीर के प्राकृतिक संकेतों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है, तो मल आंतों में ज्यादा देर तक रुक सकता है और सख्त होने लगता है। इससे पेट साफ होने में दिक्कत, गैस और पेट दर्द जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि नेचुरल कॉल को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शोध बताते हैं कि मल त्याग की इच्छा को बारबार रोकने से ‘रेक्टल हाइपोसेंसिटिविटी’हो सकती है। जब आप बारबार संकेत को रोकते हैं, तो कोलन मल से अतिरिक्त पानी सोख लेता है, जिससे वह पत्थर जैसा सख्त हो जाता है। लंबे समय में यह तंत्रिका तंत्र के संकेतों को कमजोर कर देता है।

बढ़ती उम्र के साथ बढ़ सकती है कब्ज की समस्या

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता धीमी होने लगती है। बुजुर्गों में फिजिकल एक्टिविटी कम होने, पानी कम पीने और फाइबर की कमी के कारण कब्ज की शिकायत ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में हल्की एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं।

कुछ दवाइयां भी बन सकती हैं कब्ज की वजह

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन भी कब्ज पैदा कर सकता है। खासतौर पर पेनकिलर, आयरन सप्लीमेंट्स और डिप्रेशन की कुछ दवाएं आंतों की गति को धीमा कर सकती हैं। इससे मल सख्त होने लगता है और पेट साफ होने में परेशानी हो सकती है। अगर किसी दवा के बाद लगातार कब्ज की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है। मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, Anticholinergic दवाएं जो एलर्जी या डिप्रेशन के लिए दी जाती हैं और Opioid पेनकिलर्स आंतों के संकुचन को रोक देते हैं। यह ‘ड्रगइंड्यूस्ड कॉन्स्टिपेशन’ कहलाता है, जो सामान्य फाइबर डाइट से ठीक नहीं होता और इसके लिए डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

डिस्क्लेमर :यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको Constipation या पाचन से जुड़ी कोई गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली समस्या है, तो सही निदान और इलाज के लिए अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जरूर परामर्श लें।

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