उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बिहार की तीन राजनीतिक पार्टियां उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही हैं. जनता दल यूनाइटेड यानी JDU, लोक जनशक्ति पार्टीरामविलास यानी LJP और विकासशील इंसान पार्टी यानी VIP ने यूपी में चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. तीनों दलों का बिहार में अपना सामाजिक आधार है, लेकिन यूपी में अबतक कोई खास कमाल नहीं कर पाए हैं.

इन पार्टियों की यूपी में एंट्री का आधार भी अलगअलग है. JDU की नजर मुख्य रूप से कुर्मी और अति पिछड़ा वोट पर है. LJP चिराग पासवान के जरिए दलित, खासकर पासवान वोट के साथसाथ दूसरे दलित वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है. वहीं मुकेश सहनी की VIP का पूरा फोकस निषाद समाज पर है.
JDU का बिहार से सटे यूपी के इलाकों में फोकस
JDU ने जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान किया. पार्टी ने संगठन को मजबूत करने और सम्मेलन करने की तैयारी शुरू की है. 25 तारीख को नीतीश के बेटे निशान का बनारस में बड़ा कार्यक्रम है.इससे पहले पार्टी की ओर से यूपी में करीब 60 सीटों पर तैयारी और चुनाव लड़ने का ऐलान किया.पार्टी की रणनीति फिलहाल यह है कि वह NDA के साथ सीटों पर समझौते की संभावना भी देख रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अलग चुनाव लड़ने की तैयारी भी रखे.
JDU की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर प्रदेश के कुर्मी वोट पर है. राजनीतिक रिपोर्टों में यूपी की कुर्मी आबादी को करीब 7 प्रतिशत के आसपास बताया गया है. बिहार से सटे पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कुर्मी आबादी चुनावी तौर पर महत्वपूर्ण मानी जाती है. संतकबीर नगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती और बाराबंकी जैसे इलाकों में कुर्मी आबादी कई सीटों पर प्रभावी बताई जाती है.
2022 के चुनाव में जेडीयू ने 27 उम्मीदवार उतारे थे
हालांकि यूपी में JDU को कुर्मी वोटरों का उतना साथ नहीं मिलता है, जितना उम्मीद होती है. 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और उसे 97,738 वोट मिले, जो पूरे प्रदेश के वैध मतों का 0.11 प्रतिशत था. कोई सीट नहीं मिली. इससे पहले JDU का यूपी में सबसे शानदार प्रदर्शन 2007 में रहा. उस चुनाव में JDU ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा, 2,21,594 वोट हासिल किए और एक सीट जीती. उस चुनाव में JDU, BJP के साथ गठबंधन में थी और गठबंधन के तहत उसे सीटें मिली थीं.
2012 में JDU ने 219 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती. उसे 2,70,303 वोट यानी 0.36 प्रतिशत वोट मिले. 2017 में JDU ने यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा. पार्टी ने चुनाव से पहले ही यूपी में नहीं उतरने का फैसला किया था. यानी JDU का वोट बैंक बिहार जैसा मजबूत नहीं है. 2027 में पार्टी की रणनीति का मुख्य आधार कुर्मी और अति पिछड़े वर्ग के बीच अपनी पहचान बनाना है, खासकर उन इलाकों में जहां बिहार से उसका राजनीतिक और सामाजिक संपर्क रहा है.
LJP : पासवान के नाम और दलित वोट के सहारे विस्तार
दूसरी बिहार आधारित पार्टी लोक जनशक्ति पार्टीरामविलास है. चिराग पासवान के नेतृत्व वाली LJP ने 2026 में यूपी में संगठन विस्तार तेज किया है. चिराग पासवान ने लखनऊ में रामविलास पासवान की जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया और यूपी में पार्टी को मजबूत करने की बात कही. पार्टी ने यह भी कहा कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है. LJP की राजनीति का पारंपरिक आधार बिहार में दलित समाज, खासकर पासवान समुदाय रहा है. रामविलास पासवान की राजनीतिक पहचान लंबे समय तक दलित राजनीति से जुड़ी रही.
यूपी में LJP इसी सामाजिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है. चिराग पासवान के अलावा पार्टी अब पासी और दूसरे दलित समुदायों तक पहुंच बनाने की बात कर रही है. 2024 में चिराग पासवान ने यूपी में दलित राजनीति को लेकर सक्रियता बढ़ाई थी. पार्टी के नेताओं ने पासी और पासवान समुदाय को जोड़ने की रणनीति की बात भी कही थी, लेकिन चुनावी आंकड़े बताते हैं कि यूपी में LJP का अपना वोट अभी काफी सीमित है.
LJP को 72 सीटों पर कुल 82,646 वोट मिले थे
2007 में अविभाजित LJP ने उत्तर प्रदेश की 72 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. पार्टी को 82,646 वोट मिले और कोई सीट नहीं मिली.2012 में LJP ने 212 सीटों पर चुनाव लड़ा. उसे 1,73,458 वोट मिले, जो पूरे प्रदेश के वोट का 0.23 प्रतिशत था. कोई सीट नहीं मिली. इसके बाद 2021 में LJP में दो हिस्सों में बंट गई. चिराग पासवान के नेतृत्व वाली पार्टी का नाम LJP हुआ. इस नाम से उसका पहला यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में हुआ. पार्टी ने 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और उसे कुल 12,247 वोट मिले. वोट प्रतिशत सिर्फ 0.01 रहा और कोई सीट नहीं मिली.
2026 में पार्टी का दावा इससे बड़ा है. चिराग पासवान ने यूपी में सभी 403 सीटों पर संगठन तैयार करने और चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कही है. पार्टी की कोशिश बिहार के पासवानदुसाध आधार और रामविलास पासवान की दलित राजनीति की विरासत को यूपी में इस्तेमाल करने की है. इसके लिए पार्टी दलित और वंचित वर्ग को अपने साथ जोड़ने की मुहिम चला रही है.
VIP: निषाद वोट के सहारे यूपी में दूसरी पारी
बिहार के मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी यानी VIP की यूपी में कहानी बाकी दोनों पार्टियों से अलग है. VIP का मुख्य सामाजिक आधार निषाद, मल्लाह, सहनी, केवट और मछुआरा समुदायों के बीच है. उत्तर प्रदेश में इन समुदायों को अलगअलग नामों से जाना जाता है और निषाद समूह OBC श्रेणी में आता है. मुकेश सहनी लंबे समय से निषाद आरक्षण के मुद्दे को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाए हुए हैं.
2026 में उन्होंने यूपी में 101 दिनों की निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा का ऐलान किया. उनका कहना है कि 2027 के चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला तो समाज अपना राजनीतिक फैसला करेगा. VIP का यूपी में पहला विधानसभा चुनाव 2022 में हुआ था. पार्टी ने शुरुआत में 105 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही थी और 102 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की जानकारी भी सामने आई थी.
हालांकि, चुनाव सिर्फ 53 सीटों पर लड़ा गया. इस दौरान पार्टी को 1,27,451 वोट मिले, जो पूरे प्रदेश के वैध वोट का 0.14 प्रतिशत था. कोई सीट नहीं मिली. VIP का वोट मुख्य रूप से पूर्वांचल के उन इलाकों में मिला, जहां निषाद और इससे जुड़े समुदायों की संख्या ज्यादा है. 2022 में पार्टी के उम्मीदवारों ने बलिया, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, बहराइच, जौनपुर, आजमगढ़ और मऊ जैसे इलाकों में चुनाव लड़ा.
VIP के लिए क्यों अहम यह चुनाव?
15 सीटों पर VIP उम्मीदवारों को कांग्रेस से ज्यादा वोट मिलने की बात भी पार्टी ने चुनाव परिणाम के बाद कही थी. VIP के लिए 2027 की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निषाद वोट पर पहले से ही उत्तर प्रदेश में अलगअलग दलों की नजर है. BJP के साथ निषाद पार्टी का गठबंधन है, जबकि SP और दूसरे दल भी निषाद समाज तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 2026 में निषाद आरक्षण के मुद्दे पर मुकेश सहनी लगातार सक्रिय हैं और संजय निषाद को चुनौती भी दे रहे हैं.



