Etawah News: उत्तर प्रदेश के इटावा में एंटी करप्शन टीम ने रिश्वतखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. गुरुवार को कानपुर से पहुंची एंटी करप्शन टीम ने जिला पूर्ति कार्यालय में बसरेहर क्षेत्र के सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा समेत तीन लोगों को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है. पकड़े गए अन्य दो लोगों में पीओएस मशीन से जुड़े निजी कर्मचारी पुष्पेंद्र कुमार और धर्म नारायण शामिल हैं. करीब ढाई महीने के भीतर इटावा में रिश्वतखोरी के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले 11 जुलाई को सीएमओ कार्यालय में डिप्टी सीएमओ श्रीनिवास यादव को 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था. लगातार हुई कार्रवाई के बाद संबंधित सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है.

जिला पूर्ति कार्यालय में अचानक पहुंची टीम
गुरुवार दोपहर करीब एक बजे कानपुर से आई एंटी करप्शन टीम इटावा कलेक्ट्रेट स्थित जिला पूर्ति कार्यालय पहुंची. टीम ने शिकायत के आधार पर पहले से जाल बिछाया था. जैसे ही तय योजना के मुताबिक रिश्वत की रकम दी गई और आरोपियों ने उसे स्वीकार किया, टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए तीनों को पकड़ लिया. यह कार्रवाई निरीक्षक अर्चना शुक्ला के निर्देशन में की गई. टीम की अचानक कार्रवाई से जिला पूर्ति कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों में भी अफरातफरी मच गई.
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शिकायत के बाद बनाया गया था ट्रैप
जानकारी के मुताबिक, ओम शरण की शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने यह कार्रवाई की. शिकायत में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था. शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की जांच की और फिर आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रैप तैयार किया. टीम ने पहले से तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर कार्यालय भेजा. रकम दिए जाने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया.
सप्लाई इंस्पेक्टर समेत 3 लोग गिरफ्तार
एंटी करप्शन टीम ने बसरेहर क्षेत्र के सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को गिरफ्तार किया है. उनके साथ पीओएस मशीन से संबंधित निजी कर्मचारी पुष्पेंद्र कुमार और धर्म नारायण को भी पकड़ा गया है. तीनों पर 30 हजार रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है. कार्रवाई के बाद टीम तीनों आरोपियों को अपने साथ सिविल लाइन थाने ले गई. यहां मामले से जुड़ी कागजी कार्रवाई की गई. इसके बाद आरोपियों को कानपुर ले जाने की बात सामने आई है.
किस काम के लिए मांगी गई थी रिश्वत?
अब एंटी करप्शन टीम इस बात की जांच कर रही है कि 30 हजार रुपए की रकम किस काम के लिए मांगी गई थी. टीम सप्लाई इंस्पेक्टर और दोनों निजी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है. जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि रिश्वत मांगने और लेने की पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी. फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
जिला पूर्ति कार्यालय में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के बाद कई कर्मचारी अपनेअपने पटल से हट गए. कुछ कर्मचारी सीट छोड़कर वहां से चले गए. जिलाधिकारी कार्यालय से सटे जिला पूर्ति कार्यालय में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा. टीम की कार्रवाई के दौरान आसपास भी लोगों की भीड़ जुट गई.
11 जुलाई को CMO कार्यालय में हुई थी कार्रवाई
इटावा में रिश्वतखोरी के खिलाफ इससे पहले 11 जुलाई को भी बड़ी कार्रवाई हुई थी. उस समय एंटी करप्शन टीम ने सीएमओ कार्यालय के डिप्टी सीएमओ श्रीनिवास यादव को 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था. उस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में भी हड़कंप मच गया था. मामले में टीम ने आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की थी.



