
लखनऊ,अमृत विचार। धर्मपाल सिंह को एक बार फिर उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी मिली है। 2022 से इस भूमिका में काम कर रहे धर्मपाल अब लगातार दूसरी बार यूपी संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने प्रदेश का संगठनात्मक ढांचा है, लेकिन इस जिम्मेदारी के पीछे उनका करीब चार दशक लंबा सफर भी है। बिजनौर से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा विद्यार्थी परिषद से होते हुए भाजपा संगठन की अलगअलग जिम्मेदारियों तक पहुंची और अब फिर यूपी पर आकर टिक गई है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव
धर्मपाल सिंह मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले हैं। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वर्ष 1986 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। चार साल बाद 1990 में उन्होंने पूर्णकालिक कार्यकर्ता के तौर पर काम शुरू किया। विद्यार्थी परिषद में रहते हुए उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी मिली। आगे चलकर वह राष्ट्रीय मंत्री भी रहे। संगठन का काम करते हुए उनका दायरा केवल पश्चिमी यूपी तक नहीं रहा। यूपी और उत्तराखंड के संयुक्त क्षेत्र में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के साथ उन्होंने उत्तराखंड, ब्रज और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी काम किया। इस दौरान प्रदेश के अलगअलग हिस्सों में संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने का अनुभव उन्हें मिला।
एक ही प्रदेश नहीं, कई राज्यों का संगठनात्मक अनुभव
धर्मपाल सिंह के सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2017 में आया। जुलाई 2017 में उन्हें झारखंड भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई। करीब पांच साल तक वह झारखंड में संगठन का काम देखते रहे। इसके बाद अलगअलग चुनावों में भी उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलीं। 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव और 2021 में असम विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने संगठन का काम संभाला। 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह यूपी लौटने से पहले उन्हें दूसरे राज्यों में संगठन के अलगअलग ढांचों के साथ काम करने का अनुभव मिल चुका था।
2022 में यूपी संगठन की जिम्मेदारी
अगस्त 2022 में धर्मपाल सिंह को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया। इसके बाद से उनकी गतिविधियों में बूथ और जमीनी संगठन लगातार केंद्र में रहा है। जिलों और मंडलों की बैठकों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के संवाद तक उनका जोर संगठन की निचली इकाई को सक्रिय रखने पर रहा। पिछले कुछ वर्षों में उनकी बैठकों में बूथ अध्यक्ष, शक्ति केंद्र संयोजक और मंडल स्तर के पदाधिकारियों के साथ लगातार संवाद देखने को मिला है।
धर्मपाल सिंह को फिर से यूपी प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। इसके बाद उनके एक समर्थक द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गयी पुराने दिनों की तस्वीर।
‘बूथ जीता तो चुनाव जीता’ बना प्रमुख संदेश
धर्मपाल सिंह की संगठनात्मक कार्यशैली में बूथ को खास महत्व मिलता है। 2024 में बूथ अध्यक्ष सम्मेलन से लेकर 2025 की लखनऊ की बैठकों और 2026 की चुनावी तैयारियों तक उन्होंने बारबार ‘बूथ जीता तो चुनाव जीता’ का संदेश दिया। जुलाई 2026 में अमरोहा में मुरादाबाद मंडल के पदाधिकारियों के साथ बैठक में भी उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को बूथ केंद्रित बताया। उन्होंने बूथ और मंडल के बीच शक्ति केंद्र को महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए नियमित संवाद, जिम्मेदारी और फॉलोअप पर जोर दिया।
यूपी के संगठन में अनुभव का लंबा आधार
धर्मपाल सिंह के संगठनात्मक सफर की खास बात यह है कि इसमें यूपी के अलगअलग हिस्सों के साथ कई राज्यों का अनुभव जुड़ा हुआ है। विद्यार्थी परिषद के दौर में पश्चिमी यूपी, ब्रज, पूर्वी यूपी और उत्तराखंड में काम करने के बाद उन्होंने झारखंड में करीब पांच साल संगठन संभाला। इसके बाद बिहार और असम में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। 2022 के बाद जब उन्हें यूपी की जिम्मेदारी मिली तो उनके पास प्रदेश के अलगअलग हिस्सों में काम करने के साथ दूसरे राज्यों के संगठन का भी अनुभव था। अब दूसरी बार यूपी की जिम्मेदारी मिलने के साथ वही अनुभव उनके मौजूदा संगठनात्मक काम की पृष्ठभूमि है।
दूसरी बार यूपी की जिम्मेदारी
भाजपा की ताजा संगठनात्मक नियुक्तियों में धर्मपाल सिंह को फिर उत्तर प्रदेश का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है। उनका केंद्र लखनऊ रहेगा। वहीं अभय गिरी को ब्रज क्षेत्र का संगठक बनाया गया है और उनका केंद्र आगरा होगा। धर्मपाल सिंह की नई जिम्मेदारी को उनके लंबे संगठनात्मक सफर की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। 1986 में विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई यात्रा में पूर्णकालिक कार्यकर्ता की भूमिका, यूपी के अलगअलग क्षेत्रों का अनुभव, झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी और बिहारअसम में चुनावी संगठन का काम जुड़ता गया। 2022 में यूपी की जिम्मेदारी मिली और अब दूसरी बार उसी भूमिका में उनकी वापसी हुई है।



