अर्थराइटिस की शुरुआत आमतौर पर तेज दर्द या चलनेफिरने में ज्यादा परेशानी से नहीं होती. इसके शुरुआती लक्षण धीरेधीरे सामने आते हैं और लोग अक्सर इन्हें बढ़ती उम्र, ज्यादा काम करने या व्यायाम के बाद होने वाले दर्द की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर ये लक्षण बारबार दिखाई दें, तो यह अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है. समय रहते इन लक्षणों को पहचानने से बीमारी को बढ़ने से रोकने और रोजमर्रा के काम आसानी से करने में मदद मिल सकती है. अर्थराइटिस की शुरुआत के कुछ प्रमुख संकेत क्या है इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.

डॉ. राजीव वर्मा बताते हैं कि सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न महसूस होना और उन्हें हिलाने में परेशानी होना अर्थराइटिस का शुरुआती संकेत हो सकता है.
कई बार सामान्य महसूस होने में 30 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है. ऐसा रातभर आराम करने के दौरान जोड़ों में सूजन बढ़ने के कारण हो सकता है.
रोजमर्रा के काम करते समय दर्द: सीढ़ियां चढ़ने, किसी चीज को पकड़ने या नीचे झुककर सामान उठाने पर दर्द होना भी अर्थराइटिस का शुरुआती लक्षण हो सकता है. शुरुआत में आराम करने से दर्द कम हो जाता है, लेकिन धीरेधीरे यह दर्द काम बंद करने के बाद भी बना रह सकता है.
जोड़ों में सूजन: अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में सूजन आ सकती है. प्रभावित हिस्सा फूला हुआ दिखाई दे सकता है या छूने पर गर्म महसूस हो सकता है. अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के बारबार सूजन आती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
जोड़ों को मोड़ने या सीधा करने में परेशानी: अगर जोड़ों को पहले की तरह आसानी से मोड़ना या सीधा करना मुश्किल होने लगे, तो यह भी अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है. हाथ ऊपर उठाने, घुटनों के बल बैठने या घुटने को पूरी तरह सीधा करने में परेशानी होना इसके कुछ उदाहरण हैं. समय पर इलाज न मिलने पर यह परेशानी बढ़ सकती है.
अर्थराइटिस अक्सर धीरेधीरे बढ़ता है.
अर्थराइटिस अक्सर धीरेधीरे बढ़ता है. इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और उन्हें नजरअंदाज न करना जरूरी है. अगर ये लक्षण बारबार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर जांच और इलाज से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. शुरुआती इलाज में फिजियोथेरेपी, दर्द और सूजन कम करने वाली दवाएं, वजन नियंत्रित रखना और जोड़ों पर ज्यादा दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचना शामिल हो सकता है.
अगर इन उपायों के बावजूद अर्थराइटिस बढ़ता रहता है और दर्द गंभीर हो जाता है, तो जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी पर विचार किया जा सकता है. घुटनों में गंभीर अर्थराइटिस होने पर टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी जा सकती है.
इस सर्जरी में घुटने के खराब हिस्से को विशेष इम्प्लांट से बदला जाता है. इससे दर्द कम करने और चलनेफिरने में आसानी होती है. अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या रोजमर्रा के कामों में परेशानी पैदा करने लगते हैं, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है, ताकि समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके.



