Satya Report: फिल्म इंडस्ट्री में विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन कई बार ये विवाद इतने बड़े हो जाते हैं कि मेकर्स को मजबूरी में अपनी फिल्म की कहानी, सीन, डायलॉग्स और कभीकभी एंडिंग तक बदलनी पड़ती है। सेंसर बोर्ड की आपत्तियां, धार्मिक या राजनीतिक संगठनों का विरोध और सोशल मीडिया पर बढ़ता दबाव। इन सबका सीधा असर फिल्मों की क्रिएटिविटी पर पड़ता है। कई फिल्मों के उदाहरण बताते हैं कि कैसे एक फिल्म जो एक खास विजन के साथ बनाई गई थी, उसे रिलीज तक पहुंचने के लिए काफी बदलावों से गुजरना पड़ा।

पद्मावत
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों ने भारी विरोध किया था, उनका आरोप था कि इसमें रानी पद्मावती के ऐतिहासिक चरित्र को गलत तरीके से दिखाया गया है। विवाद इतना बढ़ा कि सेट पर हिंसा हुई और फिल्म की रिलीज पर भी संकट खड़ा हो गया। हालात को संभालने के लिए मेकर्स ने फिल्म का नाम पद्मावती” से बदलकर “” किया, कई सीन एडिट किए और कुछ डायलॉग्स में बदलाव किए। इसके बाद जाकर फिल्म रिलीज हो सकी।
उड़ता पंजाब
अभिषेक चौबे की फिल्म भी सेंसर विवाद का बड़ा उदाहरण है। यह फिल्म पंजाब में फैलती ड्रग्स की समस्या पर आधारित थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसमें 90 से ज्यादा कट लगाने की सिफारिश कर दी थी। यहां तक कि फिल्म के नाम से पंजाब शब्द हटाने की भी बात उठी। मामला कोर्ट तक पहुंचा और आखिरकार फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई। हालांकि, इस विवाद ने फिल्म की चर्चा को और बढ़ा दिया और यह बॉक्स ऑफिस पर सफल भी रही।
द कश्मीर फाइल्स
वहीं भी रिलीज के बाद लगातार विवादों में रही। फिल्म में कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी दिखाई गई थी, जिसे कुछ लोगों ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील और एकतरफा बताया। हालांकि इस फिल्म में बड़े पैमाने पर कोई सेंसर कट या कहानी में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन इसके खिलाफ कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और बैन की मांग तक उठी। इसका असर फिल्म की चर्चा और पब्लिक डिबेट पर साफ दिखा।
ब्लैक फ्राइडे
अनुराग कश्यप की ब्लैक फ्राइडे भी विवादों की वजह से लंबे समय तक रिलीज नहीं हो पाई। 1993 के मुंबई ब्लास्ट पर आधारित इस फिल्म को कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगा दी थी। बाद में कानूनी लड़ाई और कुछ एडिट्स के बाद फिल्म रिलीज हो सकी। इस दौरान कई हिस्सों को संवेदनशील मानकर हटाया गया और कहानी को थोड़ा नरम किया गया ताकि किसी भी कानूनी या सामाजिक विवाद से बचा जा सके।
हैदर
विशाल भारद्वाज की हैदर भी कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी फिल्म थी, जिस पर भी कई तरह की बहस हुई। शेक्सपियर के “Hamlet” पर आधारित इस फिल्म में कश्मीर की राजनीतिक स्थिति को दिखाया गया था। सेंसर बोर्ड की ओर से कुछ डायलॉग्स और सीन में बदलाव की मांग की गई, जिसके बाद मेकर्स ने एडिट करके फिल्म रिलीज की।



