
हरदोई। जिले के अरवल थाना क्षेत्र में सांप के डसने से एक युवक की हालत गंभीर हो गई। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने युवक को सोने नहीं देने की हिदायत दी। इसके बाद उसके दोनों भाई करीब तीन घंटे तक उसे जगाए रखते रहे और 150 से ज्यादा थप्पड़ मारे। युवक को पहले सीएचसी हरपालपुर और फिर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। इलाज के दौरान उसे कुल 20 एंटीस्नेक वेनम के इंजेक्शन दिए गए। करीब तीन घंटे के इलाज और निगरानी के बाद उसकी हालत में सुधार आया।
घटना मंगलवार रात करीब आठ बजे की बताई जा रही है। मामला जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर दूर अरवल थाना क्षेत्र के टिकर गांव का है।
दुकान बंद करने से पहले सांप ने डसा
टिकार गांव निवासी रविंद्र प्रताप सिंह के तीन बेटे अभय , रमन और अनिरुद्ध हैं। तीनों शादीशुदा हैं। अभय घर से करीब 100 मीटर की दूरी पर किराने की दुकान चलाते हैं और उनकी दो बेटियां पढ़ाई कर रही हैं।
मंगलवार को अभय दुकान बंद कर घर जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान वह काउंटर के नीचे से झाड़ू निकालकर दुकान की थोड़ी साफसफाई करने लगे। इसी दौरान एक सांप ने उन्हें डस लिया और फिर दुकान के बाहर नाली में चला गया।
सांप के डसते ही अभय घबरा गए और चीखने लगे। कुछ ही देर में उन्हें बेहोशी जैसा महसूस होने लगा। उन्होंने फोन कर अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पिता दोनों बेटों के साथ दुकान पहुंचे और अभय को सीएचसी हरपालपुर ले गए।
10 एंटीवेनम के बाद भी बिगड़ती गई हालत
सीएचसी हरपालपुर में अभय को 10 एंटीवेनम इंजेक्शन दिए गए, लेकिन उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
परिजनों के मुताबिक, इसी दौरान डॉक्टरों ने अभय को सोने नहीं देने की हिदायत दी। इसके बाद उनके भाई रमन और अनिरुद्ध करीब तीन घंटे तक उन्हें लगातार जगाते रहे। इसी दौरान उन्होंने अभय के गाल पर 150 से ज्यादा थप्पड़ मारे, ताकि वह सो न जाएं।
मेडिकल कॉलेज में फिर दिए गए 10 एंटीवेनम
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शाबान अहमद की टीम ने अभय का इलाज शुरू किया। यहां भी उन्हें एंटीवेनम की 10 डोज दी गईं। इस तरह इलाज के दौरान कुल 20 एंटीवेनम दिए गए।
करीब तीन घंटे तक इलाज और निगरानी के बाद अभय की हालत में सुधार आने लगा और उन्हें होश आने लगा। डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। करीब 12 घंटे से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
सांप की प्रजाति नहीं पहचान पाए परिजन
अभय ने परिजनों को बताया कि सांप ने काटने के बाद तेजी से दुकान के बाहर नाली में प्रवेश कर लिया था। अंधेरा और अचानक हुई घटना के कारण वह सांप की प्रजाति पहचान नहीं सके।
सांप की पहचान नहीं होने के कारण इलाज में भी डॉक्टरों को अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञ ने करैत होने की जताई संभावना
स्नेक रेस्क्यू स्पेशलिस्ट बबलू जितेंद्र दास के मुताबिक, अभय में दिखाई दिए लक्षणों के आधार पर सांप के करैत होने की संभावना लगती है। हालांकि, सांप को प्रत्यक्ष रूप से देखे या पकड़े जाने की जानकारी नहीं होने के कारण इसकी प्रजाति की निश्चित पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञ के अनुसार, स्थानीय ग्रामीण इलाकों और क्षेत्रीय भाषा में करैत को ‘कोयलिया गडार’ भी कहा जाता है। इसका रंग चमकदार काला या गहरा होता है और शरीर पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं।
करैत का जहर न्यूरोटॉक्सिक बताया जाता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके काटने पर पेट में तेज दर्द, पलकें भारी होना, बेहोशी और प्यास जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर न्यूरोपैरालिटिक पॉइजनिंग की स्थिति में 10+10 यानी 20 वायल तक एंटीस्नेक वेनम दिए जाने की बात विशेषज्ञ ने बताई।
फिलहाल अभय की हालत खतरे से बाहर बताई गई है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।
ः



