
हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन कार्तिक पूर्णिमा, देव दिवाली और गंगा स्नान जैसे पर्वों का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कई स्थानों पर इस दिन भगवान शिव और माता लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है।
साल 2026 में कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा करते हैं और शाम के समय दीपदान करते हैं। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक कार्यों के बारे में।
कार्तिक पूर्णिमा को क्यों कहा जाता है देव दिवाली?
कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली कहने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय से प्रसन्न होकर देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। इसी वजह से इस तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा और देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।
खास तौर पर काशी में देव दिवाली का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर गंगा घाटों पर दीप जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का क्या है महत्व?
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान को विशेष पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति को पुण्य प्राप्त होता है। जो लोग किसी नदी या तीर्थस्थल तक नहीं जा पाते, वे घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
इस दिन गंगा घाटों और दूसरे पवित्र तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देने, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करने और भगवान का स्मरण करने की परंपरा है।
कार्तिक पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?
कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह से ही पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
- सुबह स्नान करें: दिन की शुरुआत स्नान से करें। संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थस्थल में स्नान करें।
- सूर्यदेव को अर्घ्य दें: स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें: पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप जलाएं। फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- सत्यनारायण भगवान का स्मरण करें: इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण कर सकते हैं।
- दीपदान करें: शाम के समय घर के मंदिर और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे दीप जलाएं।
- दान-पुण्य करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, अनाज, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान करें।
कार्तिक पूर्णिमा पर किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा माता लक्ष्मी, भगवान शिव और देवी शक्ति की आराधना भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
वहीं, भगवान शिव को त्रिपुरासुर पर विजय प्राप्त करने के कारण त्रिपुरारी के नाम से भी पूजा जाता है। इस वजह से कार्तिक पूर्णिमा का संबंध भगवान विष्णु और भगवान शिव, दोनों की आराधना से जुड़ा हुआ है।
कार्तिक पूर्णिमा का व्रत कैसे रखें?
कार्तिक पूर्णिमा पर कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग सुबह स्नान के बाद पूजा और संकल्प करते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ किया जा सकता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटने की परंपरा भी है। व्रत का पारण अपनी परंपरा और निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार किया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान क्यों किया जाता है?
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने से जीवन में अंधकार दूर होता है और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी वजह से घरों, मंदिरों और नदी के घाटों पर दीप जलाए जाते हैं।
काशी सहित कई तीर्थस्थलों पर देव दिवाली के अवसर पर भव्य दीपोत्सव आयोजित किया जाता है। श्रद्धालु दीप जलाकर भगवान शिव, विष्णु और माता लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा व्रत और पूजा के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान, दीपदान और पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की आराधना को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना से जोड़ा जाता है। वहीं, माता लक्ष्मी की पूजा धन-धान्य और खुशहाली के लिए की जाती है।
इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न या वस्त्र दान करना इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
Satya Report की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक लाभ और मान्यताएं हिंदू धर्म की परंपराओं तथा आस्था पर आधारित हैं। पूजा, व्रत और दान को श्रद्धालु अपनी मान्यता, सामर्थ्य और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार कर सकते हैं।



