
लखनऊ की एक पुरानी घटना ने उस समय पूरे इलाके को हैरान कर दिया था, जब एक परिवार अपने जवान बेटे के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था। घर में रिश्तेदारों की भीड़ जुट चुकी थी और अर्थी भी तैयार थी। तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। मृत घोषित किए जा चुके युवक ने अचानक आंखें खोल दीं और पानी मांगने का इशारा किया। यह नजारा देखकर वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया था भर्ती
यह घटना लखनऊ के अमीनाबाद इलाके के कल्लन की लाट की बताई गई थी। वहां रहने वाले 28 वर्षीय संजय की तबीयत खराब हो गई थी। शुरुआत में उन्हें एक क्लीनिक पर दिखाया गया, जहां पीलिया होने की बात कही गई। कुछ दिनों तक इलाज चला, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद परिजनों ने उन्हें नक्खास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिवार के मुताबिक, रविवार सुबह अस्पताल के डॉक्टरों ने संजय को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही घरवालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
घर पहुंचा शव, शुरू हो गई अंतिम संस्कार की तैयारी
अस्पताल से संजय का शव घर लाया गया। परिवार के लोग रो-बिलख रहे थे और रिश्तेदारों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा था। मोहल्ले के लोग भी शोक जताने के लिए इकट्ठा हो गए थे।
धीरे-धीरे अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। अर्थी तैयार कर दी गई और घर में मातम का माहौल था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ ही समय में वहां ऐसा घटनाक्रम होने वाला है, जो सभी को स्तब्ध कर देगा।
अचानक खुलीं आंखें और पानी मांगने लगा युवक
सुबह करीब 10 बजे घर में मौजूद लोगों ने संजय के शरीर में हलचल महसूस की। कुछ ही देर बाद उन्होंने अपनी आंखें खोल दीं। यह देखकर परिजन और आसपास खड़े लोग घबरा गए।
इसके बाद संजय ने इशारे से पानी मांगा। घरवालों ने तुरंत एक कप पानी लाकर उन्हें पिलाया। जिस युवक को कुछ घंटे पहले मृत मानकर घर लाया गया था, उसे इस तरह आंखें खोलते देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए।
दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे परिजन
संजय की हालत देखकर परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी रोक दी और उन्हें तुरंत बलरामपुर अस्पताल ले जाने का फैसला किया। परिजन सुबह करीब 11:10 बजे उन्हें अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे।
हालांकि, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें फिर मृत घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों ने यह भी बताया था कि निजी अस्पताल से शव घर लाए जाने के बाद उनके शरीर से पसीना निकल रहा था।
पहले भी सामने आया था ऐसा ही मामला
इसी तरह की एक अन्य घटना का जिक्र भी उस समय सामने आया था। इंदिरानगर निवासी 24 वर्षीय फुरकान को एक जुलाई को मृत घोषित किए जाने के बाद परिजन उन्हें दफनाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान लोगों को उनकी सांसें चलने का आभास हुआ।
इसके बाद परिवार उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। आगे के इलाज के लिए उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ऐसी घटनाओं में क्यों जरूरी है सावधानी?
किसी व्यक्ति को मृत घोषित करना बेहद गंभीर चिकित्सकीय प्रक्रिया है। केवल शरीर में हलचल न दिखने या सांस महसूस न होने के आधार पर आम लोगों को मृत्यु का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। मृत्यु की पुष्टि प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा उचित जांच के बाद ही की जानी चाहिए।
ऐसी किसी भी स्थिति में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले चिकित्सकीय पुष्टि और जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना बेहद जरूरी है।
यह घटना इसलिए भी याद दिलाती है कि जीवन और मृत्यु से जुड़े मामलों में जल्दबाजी कितनी बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह पुरानी घटना उपलब्ध समाचार विवरणों पर आधारित है। इसमें बताए गए घटनाक्रम और चिकित्सकीय परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं की गई है।
— Satya Report



