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बरसात में क्यों बिगड़ जाता है पेट का सिस्टम? आंतों के गुड बैक्टीरिया बढ़ाने वाले 4 फूड्स, एक्सपर्ट से जानें सेवन का सही तरीका.​​​​​​

बारिश का मौसम आते ही कई लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां घेरने लगती हैं। कभी गैस और ब्लोटिंग परेशान करती है तो कभी अपच, कब्ज या दस्त की शिकायत होने लगती है। इसकी एक वजह खान-पान में बदलाव और साफ-सफाई की कमी हो सकती है। वहीं, पानी और भोजन के जरिए संक्रमण का खतरा भी इस मौसम में बढ़ सकता है।

हमारी आंतों में करोड़ों सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिनमें कुछ शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं तो कुछ हानिकारक। इनका संतुलन बिगड़ने पर पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसे मेडिकल भाषा में डिस्बायोसिस (Dysbiosis) कहा जाता है।

खराब डाइट, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, फाइबर की कमी, तनाव, नींद की कमी और जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी गट माइक्रोबायोम के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में डाइट में प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक फूड शामिल करना आंतों की सेहत के लिए मददगार हो सकता है।

डाइट और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ सामान्य खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिन्हें संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करके पाचन तंत्र को सपोर्ट किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 4 फूड्स के बारे में।

1. दही: गुड बैक्टीरिया का अच्छा स्रोत

दही में जीवित बैक्टीरियल कल्चर मौजूद हो सकते हैं, जिन्हें प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। ये आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।

नियमित मात्रा में दही खाने से कुछ लोगों में पाचन बेहतर रहने और पेट से जुड़ी सामान्य परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर दही में प्रोबायोटिक की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए संभव हो तो ऐसे दही या योगर्ट का चुनाव करें जिस पर live cultures का उल्लेख हो।

दही को भोजन के साथ या अलग से लिया जा सकता है। अगर आपको दूध से एलर्जी या लैक्टोज इनटॉलरेंस है तो इसके सेवन को लेकर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।

2. छाछ: हल्का और आसानी से पचने वाला विकल्प

गर्म और उमस भरे मौसम में छाछ एक हल्का पेय हो सकता है। दही से तैयार छाछ में कुछ जीवित बैक्टीरियल कल्चर मौजूद रह सकते हैं और यह शरीर को तरल पदार्थ भी उपलब्ध कराती है।

भोजन के साथ सीमित मात्रा में छाछ लेना कई लोगों को आरामदायक लगता है। इसमें भुना जीरा या थोड़ा पुदीना मिलाया जा सकता है, जिससे स्वाद बेहतर हो जाता है।

हालांकि, बहुत ज्यादा नमक डालकर छाछ पीना खासकर हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए उचित नहीं हो सकता। इसलिए नमक की मात्रा का ध्यान रखें।

3. केला: आंतों के लिए फायदेमंद फाइबर

केला सिर्फ तुरंत ऊर्जा देने वाला फल नहीं है, बल्कि इसमें फाइबर भी पाया जाता है। इसमें मौजूद पेक्टिन जैसे घुलनशील फाइबर आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली को सपोर्ट कर सकते हैं।

केले में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट आंतों के माइक्रोबायोम के लिए प्रीबायोटिक की तरह काम कर सकते हैं। यानी ये आंतों में मौजूद कुछ फायदेमंद बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकते हैं।

कब्ज की समस्या वाले लोगों के लिए पका हुआ केला संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। वहीं, दस्त के दौरान केला ऊर्जा और पोटैशियम उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। लेकिन लगातार दस्त या डिहाइड्रेशन होने पर केवल केला खाना पर्याप्त इलाज नहीं है।

4. मेथी: फाइबर से भरपूर बीज

मेथी के दानों में घुलनशील फाइबर और अन्य पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। फाइबर आंतों की सामान्य गतिविधि और मल की बनावट को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।

कुछ लोग मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उनका सेवन करते हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

मेथी की मात्रा ज्यादा लेने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या दस्त जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा, डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को मेथी का नियमित या ज्यादा सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि यह ब्लड शुगर पर असर डाल सकती है।

आंत और दिमाग के बीच क्या है कनेक्शन?

हमारी आंत और मस्तिष्क के बीच लगातार संवाद होता रहता है। इसे गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) कहा जाता है।

आंतों के माइक्रोबायोम से बनने वाले कुछ पदार्थ इस प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक अब गट हेल्थ और मूड, तनाव तथा मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर लगातार शोध कर रहे हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई एक फूड तनाव या मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज कर सकता है। पूरी डाइट और लाइफस्टाइल का संतुलन ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मानसून में आंतों को हेल्दी रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

सिर्फ चार फूड खाने से गट हेल्थ बेहतर नहीं हो जाती। बरसात के मौसम में कुछ बुनियादी सावधानियां भी बेहद जरूरी हैं।

  • साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
  • बाहर का खुला और लंबे समय से रखा खाना खाने से बचें।
  • फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
  • भोजन में पर्याप्त फाइबर शामिल करें।
  • जरूरत के बिना एंटीबायोटिक न लें।
  • रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करें।
  • नींद पूरी लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।
  • अगर किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी या असहिष्णुता है तो उसका सेवन न करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर गैस, पेट दर्द, लगातार दस्त, कब्ज, उल्टी, मल में खून, बिना वजह वजन कम होना या लंबे समय तक पाचन संबंधी समस्या बनी रहती है, तो इसे केवल खराब गट हेल्थ मानकर घरेलू उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

ऐसी स्थिति में योग्य डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें बताए गए खाद्य पदार्थ किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं हैं। किसी गंभीर बीमारी, एलर्जी, IBS, अल्सर, क्रोनिक एसिडिटी या अन्य मेडिकल कंडीशन में डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।

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