India

इथेनॉल वाला पेट्रोल भारत में क्यों जरूरी है? 5 प्वाइंट में समझिए पूरा हिसाब

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है, लेकिन अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, ऐसे में सरकार पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर जोर दे रही है. इथेनॉल गन्ने, मक्का और कृषि उत्पादों से बनने वाला जैव ईंधन है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, सरकार अब देशभर में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई20 को बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, भारत ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के जरिए अब तक करीब 19.3 अरब डॉलर यानी लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है, आइए इंडिया के इथेनॉल प्लान को 5 प्वाइंट में समझते हैं.

इथेनॉल वाला पेट्रोल भारत में क्यों जरूरी है? 5 प्वाइंट में समझिए पूरा हिसाब

भारत की तेल की खपत कितनी है

इथेनॉल की जरूरत असल में कितनी है इसे समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि भारत इथेनॉल से पहले पेट्रोल और डीजल की कितनी खपत करता है. वैसे तो भारत में पेट्रोल और डीजल की खपत लगातार बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ती गाड़ियों की संख्या, शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियां हैं. पांच साल पहले जहां भारत की पेट्रोल खपत करीब 3 करोड़ टन सालाना के आसपास थी. वहीं अब यह 4 करोड़ टन से ज्यादा हो चुकी है. डीजल की मांग भी लगातार बढ़ रही है. इंवेस्टिंग डॉट कॉम और बाकी वेबसाइट के मुताबिक, भारत में वित्त वर्ष 202223 से 202526 के बीच पेट्रोल की खपत लगभग 154 मिलियन टन और डीजल की खपत करीब 361 मिलियन टन रही, जिससे साफ है कि देश की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है. हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत की रिफाइनिंग और खपत क्षमता लगभग 5556 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास पहुंच चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी भारत के आयात बिल पर बड़ा असर डालती है, यही वजह है कि सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर आयातित तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है.

भारत विदेशी मुद्रा कितना बचा है इससे और आगे कितना बचेगा

इथेनॉल ब्लेंडिंग का सबसे बड़ा फायदा विदेशी मुद्रा बचत के रूप में सामने आया है, सरकार के अनुसार, लगभग 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण हासिल करने से भारत अब तक 19.3 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा चुका है, इसके पीछे कारण यह है कि जितना इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाएगा, उतना कम कच्चा तेल विदेशों से खरीदना पड़ेगा. भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. सरकार का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में इथेनॉल मिश्रण का स्तर स्थिर रूप से 20 फीसदी या उससे ऊपर बनाए रखा जाता है, तो हर साल अरबों डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है. इससे देश का आयात बिल घटेगा और रुपये पर दबाव भी कम होगा.

किसानों को क्या फायदा होगा इसका

इथेनॉल कार्यक्रम को केवल ऊर्जा नीति नहीं बल्कि कृषि नीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, इथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और कुछ अन्य कृषि उत्पादों का इस्तेमाल होता है, इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक अतिरिक्त बाजार मिलता है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में इथेनॉल कार्यक्रम के जरिए किसानों को 15 अरब डॉलर से ज्यादा का सीधा भुगतान किया जा चुका है. इससे खासकर गन्ना किसानों को फायदा हुआ है क्योंकि चीनी मिलों पर उनका बकाया कम हुआ और भुगतान तेजी से हुआ, अब सरकार मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है. इससे देश के कई राज्यों के मक्का उत्पादक किसानों को भी नई मांग और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है, कृषि क्षेत्र के लिए यह आय बढ़ाने का एक नया स्रोत माना जा रहा है.

किनकिन देशों में चलता है ये इथेनॉल, जैसे ब्राजील और अमेरिका

भारत इस रास्ते पर चलने वाला पहला देश नहीं है, दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही पेट्रोल में इथेनॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं. ब्राजील इथेनॉल उपयोग के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. वहां कई वाहन 100 फीसदी इथेनॉल यानी ई100 पर भी चलते हैं, देश में फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियां आम हैं. जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चल सकती हैं यूएस में भी बड़े पैमाने पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल होता है, वहां सामान्य तौर पर ई10 और ई15 पेट्रोल उपलब्ध है, जबकि कुछ वाहनों में ई85 तक का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा कनाडा, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम चल रहे हैं. भारत का लक्ष्य भी अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है.

इथेनॉल को लेकर क्याक्या उठ रहे हैं सवाल?

हालांकि, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के फायदे हैं, लेकिन इसे लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल माइलेज को लेकर है, कई वाहन मालिकों का दावा है कि ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर गाड़ियों का माइलेज थोड़ा कम हो जाता है. सरकार भी मानती है कि इसमें मामूली गिरावट संभव है, हालांकि उसका कहना है कि यह बहुत ज्यादा नहीं होती, इसके अलावा लोग ये भी शिकायत कर रहे हैं कि इथेनॉल वाला पेट्रोल यूज करने से उनकी गाड़ी खराब हो जा रही है.

दूसरा सबसे बड़ा सवाल पुराने वाहनों को लेकर है. नई गाड़ियां तो ई20 के हिसाब से तैयार की जा रही हैं, लेकिन पुराने मॉडलों में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं. मिसाल के तौर पर जो गाड़ी 2020, 21 मॉडल की है उसमें लोग बता रहे हैं कि इंजन को लेकर कुछ समस्या आ रही है. मैकेनिक भी इसी बात की ओर इशारा कर रहे हैं इथेनॉल का गाड़ी के इंजन पर असर पड़ रहा है.

तीसरा मुद्दा पानी की खपत का है, गन्ना ऐसी फसल है जिसमें काफी पानी लगता है, आलोचकों का कहना है कि अगर इथेनॉल उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ता है तो जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, इसके अलावा खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर भी बहस होती रही है. कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि बड़ी मात्रा में मक्का और अन्य खाद्यान्न इथेनॉल उत्पादन में जाने लगे, तो खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है, फिलहाल सरकार का कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आने वाले वर्षों में यह भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है.

हालांकि, इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑटो और ऊर्जा क्षेत्र के कई बड़े विशेषज्ञों ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि यह साल की रिसर्च, टेस्टिंग के बाद लागू किया गया है. उनका कहना था कि इससे प्रदूषण कम होगा, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply