
सावन का महीना शुरु हो चुका है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव का व्रत रखेंगे और पूजाअर्चना करेंगे। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा विशेष रुप से फलदायी मानी जाती है। यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है। सावन के सोमवार को भक्तजन घर या मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं और शिवा जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मान्यता के अनुसार, रुद्राभिषेक से भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। खासतौर पर इस अनुष्ठान में मंत्रों के उच्चारण के साथ शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है जिसे काफी फलदायी माना जाता है।
असल में रुद्राभिषेक में एक विशेष पात्र का इस्तेमाल किया जाता है जिसे श्रृंगी कहते हैं। कहा जाता है कि इसके बिना अनुष्ठान पूर्ण नहीं है। आइए आपको बताते हैं हैं कि रुद्राभिषेक में श्रृंगी से जल चढ़ाना क्यों जरुरी है।
क्या होता है श्रृंगी पात्र?
खासकर श्रृंगी पूजा में इस्तेमाल होने वाला एक विशेष प्रकार का पात्र होता है, जिसका आकार गाय या किसी अन्य पशु के सींग जैसा होता है। दरअसल, श्रृंगी धातुओं का बना होता है जैसे चांदी, तांबे या पीतल से इसे बनाया जाता है। पूरे रुद्राभिषेक के समय इसी श्रृंगी से शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित की जाती है। श्रृंगी से होकर गुजरने वाली जलधारा भगवान शिव को शीतलता प्रदान करती है, जिससे भक्तों को भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शिवलिंग पर श्रृंगी से जल चढ़ाने का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रृंगी से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से पूजा का प्रभाव और ज्यादा बढ़ जाता है। श्रृंगी से निकलने वाली जलधारा निरंतर होती है और ये सीधे शिवलिंग पर पहुंचती है। इसी कारण से श्रृंगी से रुद्राभिषेक करने से इस अनुष्ठान को पूर्ण माना जाता है। हिंदू कथाओं और शिवमहापुराण में बताया गया है कि यह पात्र भगवान शिव को उनके परम भक्त नंदी ने उपहार स्वरुप दिया था और तभी से शिव जी ने इसके अपने अभिषेक के लिए एक प्रिय पात्र के रुप स्वीकार किया था। तभी से इस पवित्र पात्र का इस्तेमाल अभिषेक करने के लिए किया जा रहा है।
श्रृंगी का बिना इस्तेमाल किए रुद्राभिषेक किए जा सकता है
माना जाता है कि रुद्राभिषेक किया जाए तो सिर्फ श्रृंगी से किया जाना चाहिए। अगर आपके पास श्रृंगी नहीं हैं, तो आप किसी अन्य पात्र जैसे तांबे के लोटे से भी जल अर्पित कर सकते हैं। जब आप जल अर्पित करें तो इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर जलधारा टूटनी नहीं चाहिए।




