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टाटा संस की लिस्टिंग पर क्यों मचा है घमासान? जानिए पूरा मामला

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस, जिसके तहत TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी 31 बड़ी कंपनियां आती हैं, अब शेयर बाजार में लिस्ट होने के दबाव का सामना कर रही है. इस मुद्दे पर शनिवार को दो बड़े टाटा ट्रस्ट्स की बोर्ड मीटिंग में चर्चा हो सकती है.

टाटा संस की लिस्टिंग पर क्यों मचा है घमासान? जानिए पूरा मामला
टाटा संस की लिस्टिंग पर क्यों मचा है घमासान? जानिए पूरा मामला

अब तक टाटा संस एक अनलिस्टेड कंपनी रही है, लेकिन अब कंपनी के अंदर से ही इसे लिस्ट करने की मांग उठ रही है. खासतौर पर इसके दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक शापूरजी पालोनजी ग्रुप की ओर से यह दबाव बढ़ा है. इसके अलावा RBI के नए नियम भी कंपनी को लिस्टिंग की तरफ धकेल सकते हैं, अगर उसे कोई छूट नहीं मिलती.

टाटा ग्रुप की संरचना कैसी है?

108 साल पुराने टाटा समूह की संरचना काफी अलग है. टाटा ट्रस्ट्स नाम के परोपकारी संस्थानों का समूह टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी रखता है. वहीं कर्ज में डूबा शापूरजी पालोनजी ग्रुप कंपनी में 18.4% हिस्सेदारी रखता है. टाटा ट्रस्ट्स में कुल 13 संस्थाएं शामिल हैं, जिनमें से 7 सीधे टाटा संस में हिस्सेदारी रखती हैं. टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में 6 ट्रस्टी हैं. टाटा परिवार के सदस्य नोएल टाटा फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और टाटा संस के बोर्ड में भी निदेशक हैं.

कौन चाहता है टाटा संस की लिस्टिंग?

लिस्टिंग का दबाव कई तरफ से आ रहा है. टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी, जो अंदरूनी संसाधनों से जुटाना मुश्किल है.

SP ग्रुप भी चाहता है कि टाटा संस लिस्ट हो ताकि वह अपनी हिस्सेदारी बेच सके या उससे बाहर निकल सके. मौजूदा ढांचे में उसकी हिस्सेदारी आसानी से ट्रांसफर नहीं की जा सकती.

RBI के नियम क्यों बने परेशानी?

टाटा संस को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी माना जाता है, इसलिए उस पर RBI के नियम लागू होते हैं. RBI के संशोधित नियमों के मुताबिक जिन कंपनियों की संपत्ति 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है या जिनकी सार्वजनिक फंड तक पहुंच है, उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा.

मार्च 2025 तक टाटा संस की संपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये थी. हालांकि RBI के पास यह अधिकार है कि वह किसी कंपनी को लिस्टिंग से छूट दे सकता है.

कौन कर रहा है विरोध?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोएल टाटा निजी तौर पर टाटा संस को लिस्टेड कंपनी बनाने के खिलाफ हैं. बताया जा रहा है कि पिछले साल उन्होंने और अन्य ट्रस्टियों ने एकमत से लिस्टिंग का विरोध किया था और RBI से बातचीत करने को कहा था.

शनिवार की बैठक पर सबकी नजर

शनिवार को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड मीटिंग होगी. इन दोनों के पास मिलाकर टाटा संस में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी है. बैठक में RBI के नियमों और संभावित लिस्टिंग के असर पर चर्चा होगी. अगर ट्रस्टियों का बहुमत लिस्टिंग के पक्ष में वोट करता है, तो टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है.

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