Satya Report: 20 अप्रैल को शेयर बाजार में शराब कंपनियों के शेयर में अचानक से आई तेजी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गई. शराब कंपनियों के शेयर में आई ये तेजी कर्नाटक सरकार के एक फैसले के बाद आई है, दरअसल कर्नाटक सरकार ने प्रदेश में नई शराब नीति लागू की है. जिसका असर शराब कंपनियों के शेयर पर देखने को मिला और सोमवार को बाजार खुलते ही तिलकनगर इंडस्ट्रीज, रेडिको खेतान और यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयरों में 3% तक की तेजी दर्ज की गई.

टैक्स अब अल्कोहल की मात्रा पर आधारित
राज्य सरकार ने 60 साल पुरानी शराब टैक्स नीति में बदलाव का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत अब शराब पर टैक्स उसकी असली अल्कोहल मात्रा (Alcohol in Beverage AIB) के आधार पर लगाया जाएगा. यानी जितनी ज्यादा शराब में अल्कोहल होगा, उतना ज्यादा टैक्स देना होगा.
नया सिस्टम और कम होंगे स्लैब
सरकार मौजूदा 16 प्राइस स्लैब को घटाकर एक आसान स्ट्रक्चर लाने की तैयारी में है. कर्नाटक आबकारी (Excise Duties and Fees) Rules, 1968 में संशोधन के बाद कर्नाटक देश का पहला राज्य बन सकता है, जो AIB आधारित एक्साइज ड्यूटी लागू करेगा.
किस पर पड़ेगा क्या असर?
नई व्यवस्था के तहत सस्ती शराब की कीमत बढ़ सकती है, जबकि प्रीमियम शराब जैसे स्कॉच की कीमत कम हो सकती है. वहीं हल्की बीयर पर टैक्स कम होने की संभावना जताई जा रही है. यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.
कंपनियों के लिए क्यों फायदेमंद?
ब्रोकरेज Nuvama के मुताबिक, यह नीति स्पिरिट्स और बीयर कंपनियों के लिए सकारात्मक है. कम टैक्स के कारण प्रीमियम प्रोडक्ट्स की कीमतें घट सकती हैं, जिससे बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही, संभावित UK-India फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भी कंपनियों के मार्जिन को फायदा मिल सकता है. ब्रोकरेज ने यूनाइटेड स्पिरिट्स, एलाइड ब्लेंडर्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज पर BUY रेटिंग दी है. .
कर्नाटक में बड़ी मार्केट हिस्सेदारी
तिलकनगर इंडस्ट्रीज कर्नाटक के Prestige and Above सेगमेंट में करीब 39% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी कंपनी है. वहीं यूनाइटेड स्पिरिट्स के ब्रांड्स McDowells No.1 और Royal Challenge भी राज्य में मजबूत पकड़ रखते हैं. यूनाइटेड ब्रुअरीज देश की सबसे बड़ी बीयर कंपनी है.
शराब बाजार में बड़ा बदलाव तय
कर्नाटक भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां शराब की खपत काफी ज्यादा है. फिलहाल यहां देश के सबसे ऊंचे टैक्स दरों में से एक लागू है, जिसमें अलग-अलग प्राइस कैटेगरी पर अलग एक्साइज ड्यूटी लगती है. विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति से न सिर्फ टैक्स सिस्टम सरल होगा, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं.



