
अगर आपको बताया जाए कि भविष्य में ब्रिटेन के कई बड़े शहर समंदर में समा सकते हैं. शायद किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं होगा. मगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चेतावनी दी है जो किसी के भी होश उड़ा देगी. वैज्ञानिकों ने एक शोध के हवाले से बताया कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से नहीं रुका, तो आने वाले समय में समंदर का बढ़ता जलस्तर ब्रिटेन के कई शहरों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2300 तक ब्रिटेन के कई तटीय इलाके पानी में डूब सकते हैं और करीब 17 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों में रहने को मजबूर हो सकते हैं.
मौसम ने दी डराने वाली जानकारी
मालूम हो कि ये चेतावनी ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में दी गई है. शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि आने वाले सालों में समुद्र का जलस्तर कितना बढ़ सकता है और इसका असर किन इलाकों पर पड़ेगा. स्टडी के मुताबिक, अगर दुनिया मौजूदा जलवायु लक्ष्यों को भी पूरा कर ले, तब भी साल 2200 तक करीब 14 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे में होंगे. वहीं 2300 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 17 लाख हो सकती है.
धीरे-धीरे बढ़ा समुद्र का जलस्तर
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो जाए तो इसका असर कई सदियों तक बना रहता है. यही वजह है कि इसे जलवायु परिवर्तन का ‘स्लीपिंग जायंट’ यानी धीरे-धीरे बढ़ने वाला बड़ा खतरा माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2100 तक ब्रिटेन के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर करीब 40 से 60 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है. इससे बाढ़ प्रभावित जमीन का दायरा लगभग 13 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. सबसे ज्यादा खतरा द वॉश, हम्बर एस्ट्यूरी और ब्रिस्टल चैनल जैसे निचले इलाकों को बताया गया है.
1.8 मीटर जलस्तर बढ़ने का अनुमान
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2300 तक समुद्र का जलस्तर 1.2 से 1.8 मीटर तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र 56 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे. लंदन, लिवरपूल, ब्लैकपूल, नॉरफोक और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कई हिस्सों में भी समुद्री पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा. रिसर्चरों ने एक और गंभीर संभावना भी जताई है. अगर अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ तेजी से पिघलने लगी, तो 2300 तक समुद्र का जलस्तर 15 मीटर से भी ज्यादा बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में मौजूदा समुद्री सुरक्षा दीवारों और बाढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं का बड़ा हिस्सा बेअसर हो जाएगा.



