भले ही पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन हरे निशान पर बंद हुआ हो, लेकिन आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में प्रेशर देखने को मिल सकता है. उसके पीछे कई इंटरनेशनल कारण हैं. सबसे बड़ा कारण अमेरिका की ओर से रूसी तेल पर प्रतिबंध और नया कानून हैं. जिनका असर भारत पर देखने को मिल सकता है. भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है. नए अमेरिकी प्रतिबंध और कानून के तहत रूसी तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है. वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं. जियो पॉलिटिकल टेंशन में किसी भी तरह की कमी देखने नहीं मिल रही है. साथ ही विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली भी शेयर बाजार को तंग कर सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आने वाले हफ्ते में कौन से ट्रिगर्स हैं तो शेयर बाजार पर असर डाल सकते हैं…

तेल की कीमतें
शुक्रवार को लगातार तीसरे सेशन में तेल की कीमतों में गिरावट आई, लेकिन आउटलुक अनिश्चित बना रहा क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थी. जेपी मॉर्गन ने गुरुवार को कहा कि फरवरी में ईरान के खिलाफ USइजराइली संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार, उनके पास तेल बाज़ार के लिए कोई स्पष्ट बेसलाइन व्यू नहीं है. सऊदी अरब के रेड सी एक्सपोर्ट हब ‘यानबू’ पर क्रूड लोडिंग रोके जाने के बाद, इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमतें लगभग चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं. पिछले हफ्ते हुए हमले में अपनी ईस्टवेस्ट पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने के बाद रियाद ने यूरोप को होने वाली कुछ डिलीवरी भी रद्द कर दी थीं.
सप्लाई में और रुकावट की संभावना ने तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ा दिया है. गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के कोहेड डान स्ट्रुवेन ने कहा कि हालिया हमलों से पता चला है कि शिपिंग में रुकावटें फैल सकती हैं और और गंभीर हो सकती हैं. गोल्डमैन सैक्स ने एक ऐसी स्थिति का अनुमान लगाया है जिसमें अगर मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले तेज होते हैं, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. अगर एक्सपोर्ट सामान्य हो जाता है, तो बैंक को उम्मीद है कि तेल की कीमतें वापस 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ जाएंगी. स्ट्रुवेन ने ब्लूमबर्ग को बताया कि शिपिंग से जुड़े जोखिम तेल की कीमतों को तय करने वाले एक अहम कारक बन गए हैं.
ईरान युद्ध का तनाव
होर्मुज स्ट्रेट भी काफी हद तक कटा रहा. शुक्रवार को शुरुआती शिपिंग डेटा से पता चला कि गुरुवार को इस स्ट्रेट से सिर्फ चार कमोडिटी जहाज गुजरे, जो 10 दिनों के लगभग 16 जहाजों के औसत से बहुत कम है. ईरान ने कहा कि उसने टोगो के एक तेल टैंकर पर हमला किया जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहा था. इस बीच, फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा हमले शुरू किए जाने के बाद से सरकार के समर्थन में तेहरान में लाखों लोगों ने रैली की.
ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध वाले बिल पर हस्ताक्षर किए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े पैकेज को कानून का रूप दिया. यह उन्हें रूसी तेल या नेगुरल गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जिससे भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार प्रभावित हो सकते हैं.
“लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथसाथ देश के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ के टैंकरों को निशाना बनाता है, जिनका इस्तेमाल मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर तेल ले जाने के लिए किया जाता है. नए टैरिफ अधिकार के तहत, अगर भारत और चीन जैसे रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार कानून में तय शर्तों को पूरा करते हैं, तो उन पर ज्यादा अमेरिकी टैरिफ लग सकता है.
FII और DII
FII ने लगातार पांचवें हफ्ते मुनाफावसूली की और उन्होंने 7,620 करोड़ रुपए शेयर बाजार से निकाले. DII ने 11,232 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी के साथ अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा, जिससे इंडेक्स को हफ्ते के बीच के निचले स्तर से उबरने में मदद मिली. महीने की शुरुआत से अब तक, FII ने 7,041 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है, जबकि DII ने 36,219 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है. निफ्टी अगस्त के आखिर में 24,080.40 के क्लोजिंग स्तर से 3.05 फीसदी नीचे है. पिछले महीने, FII सभी पांचों हफ्तों में नेट सेलर रहे, जबकि DII पूरे समय नेट बायर बने रहे, जिससे निफ्टी की 24,154.90 से 23,346.40 तक की गिरावट को कुछ हद तक संभाला जा सका.



