Satya Report: महिलाओं के स्वास्थ्य में व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) और सही आदतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में कुछ सामान्य गलतियां गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पेशाब (Urination) से जुड़ी कुछ गलत आदतें न केवल यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के खतरे को बढ़ाती हैं, बल्कि लंबे समय में यूरीन लीकेज और पेल्विक फ्लोर की कमजोरी जैसी समस्याओं का शिकार भी बना सकती हैं।

गुरुग्राम की पोषण विशेषज्ञ लीमा महाजन के अनुसार पेशाब को बार-बार या लंबे समय तक रोकने की आदत से यूटीआई की परेशानी के साथ-साथ शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। पेल्विक फ्लोर एक मांसपेशीय आधार है, जो गर्भाशय, मूत्राशय और अन्य अंगों को अपनी जगह पर रखता है, लेकिन पेशाब करने की गलत आदतों के कारण ये मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि महिलाओं को पेशाब करते समय कौन-कौन सी पांच गलतियां नहीं दोहराना चाहिए, जिसके चलते पेशाब का रिसाव, दर्द और यूरिन इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। .

जल्दी-जल्दी पेशाब करने की आदत

कई महिलाएं बार-बार वॉशरूम जाती हैं और खुद को पेशाब करने के लिए मजबूर करती हैं, जिसे पावर पीइंग कहा जाता है। इस आदत से मूत्राशय पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। लगातार दबाव के कारण पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और पेशाब के रिसाव की समस्या बढ़ जाती है। Journal of Urology में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, बिना जरूरत के बार-बार पेशाब जाने से ब्लैडर की क्षमता कम हो जाती है। दिमाग को यह संकेत मिलने लगता है कि ब्लैडर थोड़ा सा भरने पर भी खाली होना चाहिए, जिससे Overactive Bladder की समस्या हो जाती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पेशाब की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से पूरा होने देना चाहिए, वरना आगे चलकर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

सार्वजनिक टॉयलेट में गलत तरीके से बैठना

सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करते समय कई महिलाएं सीट को छूने से बचने के लिए खड़े होकर या आधा झुककर पेशाब करती हैं। इस वजह से मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता और पेल्विक फ्लोर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। International Urogynecology Journal के अनुसार, इस स्थिति में ब्लैडर से यूरिन का प्रवाह 20% तक कम हो जाता है और अवशिष्ट यूरिन (Residual urine) अंदर रह जाता है, जो UTI का मुख्य कारण बनता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सीट को अच्छी तरह साफ करने के बाद आराम से बैठकर पेशाब करना बेहतर होता है। साथ ही पैरों को जमीन पर टिकाकर हल्का आगे झुकने से पेल्विक मांसपेशियों को आराम मिलता है और मूत्राशय पूरी तरह खाली हो पाता है।

घंटों पेशाब को रोकना

कई महिलाएं काम या यात्रा के दौरान घंटों तक पेशाब रोककर रखती हैं। यह आदत मूत्राशय के साथ-साथ पेल्विक फ्लोर पर भी अनावश्यक दबाव डालती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बार-बार पेशाब रोकने से यूरिन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और मूत्राशय का लचीलापन भी कम होने लगता है। इसका सीधा असर पेल्विक स्वास्थ्य पर पड़ता है और आगे चलकर गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

पेशाब करते समय जोर लगाना

पेशाब करना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन कुछ लोग जल्दबाजी में जोर लगाकर पेशाब करने की कोशिश करते हैं। इससे मूत्राशय की दीवार पर दबाव पड़ता है और धीरे-धीरे पेल्विक फ्लोर कमजोर होने लगता है। पेशाब करने की ये आदत यूरिन लीकेज या प्रोलैप्स जैसी समस्याएं बढ़ा सकती हैं। American Urological Association के अनुसार पेशाब के दौरान बार-बार जोर लगाने से इंट्रा-एब्डोमिनल प्रेशर बढ़ता है। यह लंबे समय में Pelvic Organ Prolapse का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। एक्सपर्ट्स के अनुसार महिलाओं को लगे की मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, तो कुछ देर रुक कर दोबारा पेशाब करने की कोशिश करें, लेकिन जोर लगाने से बचें।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह किसी भी प्रकार की मेडिकल डायग्नोसिस या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको पेशाब, मूत्राशय या पेल्विक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो कृपया डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।