India

​World Physiotherapy Day: दर्द खत्म हो गया फिर भी फिजियोथेरेपी क्यों? डॉक्टरों ने बताई जरूरी बातें

कई लोग फिजियोथेरेपी को सिर्फ दर्द कम करने का इलाज मानते हैं. जैसे ही दर्द कम होता है, वे एक्सरसाइज और थेरेपी बंद कर देते हैं. लेकिन कई मस्कुलोस्केलेटल प्रॉब्लम्स में दर्द का खत्म होना इलाज बंद करना नहीं है. बल्कि रिकवरी के एक अहम चरण का संकेत होता है. शरीर के अंदर मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों की जकड़न, बैलेंस की कमी या गलत मूवमेंट पैटर्न अभी भी मौजूद हो सकते हैं.

​World Physiotherapy Day: दर्द खत्म हो गया फिर भी फिजियोथेरेपी क्यों? डॉक्टरों ने बताई जरूरी बातें

दरअसल, हर साल 8 सितंबर के दिन को वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे के रूप में मनाया जाता है. भारत में इस ट्रीटमेंट की नॉलेज लोगों को कम है. लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ सके इसलिए ये दिन मनाया जाता है.

डॉ. सुनील त्यागी कहते हैं कि दर्द अक्सर शरीर का एक संकेत होता है कि किसी हिस्से पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ रहा है या वहां चोट या सूजन है. दवाओं, आराम या शुरुआती फिजियोथेरेपी से दर्द कम हो सकता है. लेकिन जिस वजह से प्रॉब्लम हुई उसे ठीक होने में ज्यादा टाइम लग सकता है.

क्यों की जाती है फिजियोथेरेपी?

बैक पेन में दर्द कम होने के बाद भी कोर मांसपेशियों की कमजोरी या गलत पोस्चर बना रह सकता है. इसी तरह घुटने की चोट में दर्द कम होने के बावजूद पैर की मांसपेशियों की ताकत और संतुलन पूरी तरह वापस आने में समय लग सकता है. डॉक्टर कहते हैं कि फिजियोथेरेपी का काम सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि शरीर को दोबारा सही तरीके से काम करने के लिए तैयार करना है.

इसमें मांसपेशियों को मजबूत करना, जोड़ों की गति बढ़ाना, लचीलापन सुधारना, संतुलन विकसित करना और रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान शरीर की सही मुद्रा और मूवमेंट सिखाना शामिल हो सकता है.

न करें ये गलती

डॉक्टर कहते हैं कि दर्द खत्म होने के बाद अचानक सामान्य गतिविधियों में लौटना भी कुछ लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. खासकर चोट, सर्जरी या लंबे समय तक आराम के बाद शरीर को धीरेधीरे अपनी क्षमता वापस हासिल करने की जरूरत होती है. फिजियोथेरेपिस्ट इसी प्रक्रिया में गतिविधियों की तीव्रता और एक्सरसाइज को व्यक्ति की स्थिति के अनुसार बढ़ाते हैं.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को दर्द खत्म होने के बाद लंबे समय तक फिजियोथेरेपी जारी रखनी चाहिए. उपचार की अवधि समस्या, चोट की गंभीरता, व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और रिकवरी की गति पर निर्भर करती है. फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज की अवधि और आवृत्ति कम या बढ़ाई जा सकती है.

इसलिए दर्द नहीं हैऔर समस्या पूरी तरह ठीक हो गई है हमेशा एक ही बात नहीं होती. सही समय पर फिजियोथेरेपी पूरी करना शरीर की ताकत, कार्यक्षमता और भविष्य में दोबारा चोट या दर्द के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.

इस वजह से भी बढ़ रहा शरीर में दर्द

डॉ. प्रदीप चौधरी कहते हैं कि आज लंबे समय तक बैठने, गलत मुद्रा, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ती उम्र के कारण गर्दन, कमर, घुटनों और अन्य जोड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह पर फिजियोथेरेपी शुरू करने से दर्द व जकड़न को कम करने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने तथा शरीर की लचक, संतुलन और गतिशीलता में सुधार करने में मदद मिलती है.

डॉक्टर प्रदीप भी कहते हैं कि फिजियोथेरेपी को सिर्फ बीमारी या चोट के बाद के डॉक्टरी इलाज तक सीमित न रखकर हेल्दी और एक्टिव लाइफस्टाइल और बीमारियों की रोकथाम का भी हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply