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​UP के युवाओं के लिए योगी सरकार की बड़ी सौगात, VSSY 2.0 लॉन्च… ट्रेनिंग से लेकर लोन तक ये मिलेंगी सुविधाएं

​UP के युवाओं के लिए योगी सरकार की बड़ी सौगात, VSSY 2.0 लॉन्च… ट्रेनिंग से लेकर लोन तक ये मिलेंगी सुविधाएं

डिजिटल डेस्क लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बेरोजगार युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 लॉन्च कर दी है। योजना के नए संस्करण में सरकार ने दायरा बढ़ाते हुए 11 पारंपरिक ट्रेडों के साथ 14 नए आधुनिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इस तरह अब कुल 25 ट्रेडों में युवाओं को हुनरमंद बनाने की व्यवस्था की गई है।

योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिनों का नि:शुल्क कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अधिकतम 15 हजार रुपये की नि:शुल्क उन्नत टूलकिट और कारोबार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

10 दिन की ट्रेनिंग, मिलेगा 5 हजार मानदेय

योजना के तहत चयनित कारीगरों को पहले की तरह 10 दिवसीय नि:शुल्क कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 10 दिनों के लिए कुल 5,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा।

प्रशिक्षुओं के खानपान के लिए प्रतिदिन अधिकतम 300 रुपये तक के वास्तविक व्यय का प्रावधान भी है। वहीं, कौशल वृद्धि प्रमाणन के लिए प्रशिक्षण संस्था को प्रति प्रशिक्षार्थी 900 रुपये दिए जाएंगे।

ट्रेनिंग के बाद 15 हजार की फ्री टूलकिट

प्रशिक्षण पूरा करने वाले कारीगरों को अपना काम शुरू करने या मौजूदा कारोबार को बेहतर बनाने के लिए अधिकतम 15 हजार रुपये की उन्नत नि:शुल्क टूलकिट दी जाएगी। इसमें संबंधित ट्रेड के लिए जरूरी बुनियादी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

नए ट्रेडों में IT और तकनीकी सेवाओं पर जोर

लखनऊ के उद्योग अधिकारी अभिजीत गौतम के अनुसार, योजना 2.0 में नए ट्रेडों का चयन बाजार की मांग और युवाओं की बढ़ती रुचि को ध्यान में रखकर किया गया है।

उन्होंने बताया कि मोबाइल और डिजिटल गैजेट की मरम्मत, कंप्यूटर एवं लैपटॉप से जुड़े काम, एसी और अन्य तकनीकी सेवाओं में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। नए ट्रेडों के जरिए युवाओं को मौजूदा बाजार की जरूरत के मुताबिक कौशल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

कारोबार शुरू करने के लिए ₹10 लाख तक का लोन

योजना का अहम हिस्सा प्रशिक्षण हासिल करने वाले कारीगरों को कारोबार बढ़ाने के लिए मिलने वाली ऋण सुविधा है। इसके तहत लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

ऋण में 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान है। योजना के तहत लाभार्थी को बिना गारंटी तथा ब्याज की लागत से राहत के साथ ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

सामान्य श्रेणी के पुरुष लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होगा। वहीं अन्य सभी श्रेणी के पुरुषों, महिलाओं, थर्ड जेंडर, दिव्यांगजन और भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वयं का अंशदान परियोजना लागत का 5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

पांच साल तक ब्याज सब्सिडी

ऋण पाने वाले लाभार्थी को ऋण वितरण की तारीख से छह महीने की मोरेटोरियम अवधि मिलेगी। इसके बाद ऋण की रकम अधिकतम 54 मासिक किश्तों में चुकानी होगी।

परियोजना नियमित रूप से संचालित होने की स्थिति में अधिकतम पांच वर्ष तक ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है। अगर परियोजना बंद हो जाती है तो ब्याज सब्सिडी नहीं दी जाएगी और मार्जिन मनी सब्सिडी भी वापस ली जा सकती है।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर गठित चयन समिति के माध्यम से किया जाएगा।

ऋण के लिए भी विभागीय पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा। योजना में पारंपरिक ट्रेड से जुड़े कारीगरों के साथ संबंधित ट्रेड में दक्षता रखने वाले लोग भी आवेदन कर सकेंगे।

प्रशिक्षण के बाद कारोबार शुरू करने में मिली मदद

योजना के तहत प्रशिक्षण हासिल कर चुके आयुष कुमार ने बताया कि 10 दिनों के प्रशिक्षण के बाद उन्हें व्यवसाय शुरू करने में काफी मदद मिली। उनके अनुसार मानदेय के साथ मिली नि:शुल्क टूलकिट से अपना काम शुरू करना आसान हुआ।

आधुनिक और बाजार की मांग वाले ट्रेडों को योजना में शामिल किए जाने से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

ऑनलाइन मार्केटिंग और GeM से जुड़ेगा कारोबार

योजना के लाभार्थियों को प्रमुख ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और GeM पोर्टल के माध्यम से उत्पादों और सेवाओं की मार्केटिंग के लिए प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।

प्रगतिशील कारीगरों को विकसित क्लस्टरों की एक्सपोजर विजिट कराई जाएगी। इसके जरिए उन्हें नई तकनीक, उत्पाद विकास, डिजाइन और मार्केटिंग के अवसरों से परिचित कराया जाएगा।

कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा निदेशालय स्तर पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट गठित करने का प्रावधान है। मंडल स्तर पर कंसल्टेंट की तैनाती भी की जाएगी।

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