IndiaTrending

यूसुफ पठान की बदली रणनीति? NDA मीटिंग छोड़ अब शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात, बड़ी डिमांड से बढ़ी हलचल

यूसुफ पठान की बदली रणनीति? NDA मीटिंग छोड़ अब शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात, बड़ी डिमांड से बढ़ी हलचल

NDA बैठक से दूरी बनाने के बाद सांसद यूसुफ पठान ने CM शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने 32 लाख वोटर्स के सत्यापन के लिए हर जिले में स्पेशल ट्रिब्यूनल कोर्ट और हेल्प डेस्क बनाने की मांग रखी।

लगातार दो बार एनडीए की बैठकों से नदारद रहने के बाद बहरामपुर से लोकसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों के नेताओं ने सांसदों की साप्ताहिक बैठक में हिस्सा लिया था। लेकिन तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों में से तीन सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे गठबंधन के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मतभेद के संकेत मिल रहे हैं। बैठक से दूरी बनाने वाले सांसदों में यूसुफ पठान भी शामिल थे।

ट्रिब्यूनल कोर्ट और हेल्प डेस्क की मांग

अब यूसुफ पठान ने एक दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। इससे पहले पठान ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि जिन 27 से 32 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए गए हैं और जिनके मामले ट्रिब्यूनल में गए हैं, उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुलाकात के बाद पठान ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री के सामने उन लोगों की मांग रखी है जिनके नाम हटा दिए गए हैं। हमारी गुजारिश है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और प्रक्रिया को इतना सरल बनाया जाए कि बुजुर्गों और बच्चों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।” इस प्रक्रिया को समयबद्ध और सुलभ बनाने के लिए उन्होंने दो प्रमुख सुझाव दिए।

जिला स्तर पर ट्रिब्यूनल कोर्ट : ताकि लोगों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए दूर न जाना पड़े।

समर्पित हेल्प डेस्क: जो आम नागरिकों को सत्यापन की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को समझने और पूरा करने में मदद कर सकें।

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सांसदों के इस समूह को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए किसी के साथ अन्याय न हो।

TMC से बगावत और NDA के साथ समीकरण

मई 2026 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बंगाल की राजनीति काफी दिलचस्प मोड़ पर है। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI में शामिल होने वाले 20 बागी सांसदों का रुख अब भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है।

हालांकि बागी गुट की नेता रचना बनर्जी ने साफ तौर पर कहा है कि वे एनडीए का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान का लगातार एनडीए की बैठकों से गायब रहना कई सवाल खड़े करता है। अबू ताहिर तो सार्वजनिक तौर पर यह भी कह चुके हैं कि वे “न तो बीजेपी में हैं और न ही एनडीए में।”

शुभेंदु के लंच में पहुंचे तीनों मुस्लिम सांसद

इसके बावजूद, दिल्ली में सीएम शुभेंदु अधिकारी द्वारा आयोजित लंच में इन तीनों मुस्लिम सांसदों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि बैकडोर चैनल से बातचीत और राजनीतिक सौदेबाजी अभी जारी है।

पश्चिम बंगाल के जंगीपुर से खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान और बहरामपुर से यूसुफ पठान इससे पहले 21 जुलाई को हुई राजग संसदीय दल की पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीन सांसदों ने “अपने मतदाताओं के एक वर्ग द्वारा भाजपा के साथ उनकी कथित निकटता पर सवाल उठाए जाने के बाद राजग की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया।”

ओम बिरला करेंगे बागी सांसदों के भविष्य पर फैसला

इन तीन सांसदों की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा में 20 सदस्यीय एनसीपीआई समूह को मान्यता देने का मामला अभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित है। दल-बदल रोधी कानून के तहत इस अलग हुए समूह को तभी संरक्षण मिल सकता है, जब उसके पास तृणमूल कांग्रेस के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन हो।

एनसीपीआई के सदन के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय भी मंगलवार को पहली बार राजग संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। बंद्योपाध्याय ने कहा, ”मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। एनसीपीआई में सभी एकजुट हैं। यह अच्छा अनुभव है।” उन्होंने असंतुष्ट सांसदों के बीच मतभेद की अटकलों को भी खारिज किया।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply