
उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में एक समय ऐसा परिवार था, जिसे देखकर किसी को अंदाजा नहीं होता था कि आने वाले दिनों में उसके भीतर इतनी बड़ी उथल-पुथल मचने वाली है। पति राजकुमार पादरी था और पत्नी निशा एक स्कूल में पढ़ाती थी। दोनों की जिंदगी अपनी दो बेटियों के साथ सामान्य तरीके से चल रही थी।
राजकुमार की ड्यूटी बदायूं जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी। चर्च में जब काम ज्यादा होता तो उसे वहीं रात रुकना पड़ता था। दूसरी ओर निशा सिविल लाइंस इलाके के होली चाइल्ड स्कूल में पढ़ाती थी और स्कूल परिसर में मिले कमरे में परिवार के साथ रहती थी।
लेकिन जिस रिश्ते की शुरुआत पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, वह आगे चलकर गंभीर विवादों से घिर गया।
ट्रेनिंग के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
राजकुमार और निशा की पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। दोनों वहां पादरी के काम से जुड़ी ट्रेनिंग के सिलसिले में पहुंचे थे।
राजकुमार बरेली के रहने वाले रघुवीर मसीह का बेटा था। उसके पिता पुलिस विभाग में वायरलेस मैसेंजर के पद पर बदायूं में तैनात रह चुके थे।
निशा मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली थी और उसके पिता दयाशंकर भी पादरी थे।
दोनों की मुलाकातें बढ़ीं तो एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा हो गया। परिवारों के बीच भी पहले से रिश्तेदारी का संबंध था। निशा की बड़ी बहन शारदा की शादी राजकुमार के बड़े भाई दिलीप से हुई थी।
इसी पारिवारिक रिश्ते के कारण राजकुमार और निशा एक-दूसरे के करीब आए और दोनों ने अपनी पसंद की बात परिवार के सामने रख दी।
परिवार की सहमति से हुई शादी
राजकुमार ने लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली, जबकि निशा किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर वापस चली गई।
इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से वर्ष 2014 में राजकुमार और निशा की शादी हो गई।
शादी के बाद परिवार बढ़ा और दोनों दो बेटियों के माता-पिता बने। निशा ने स्कूल में नौकरी शुरू की और राजकुमार चर्च की जिम्मेदारियां संभालता रहा।
शुरुआती समय सामान्य तरीके से गुजरता रहा।
अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच बढ़ने लगी दूरी
राजकुमार की ड्यूटी अक्सर घर से दूर रहती थी। वजीरगंज की चर्च में काम होने पर वह रात में वहीं रुक जाता था।
निशा दूसरी ओर बदायूं में स्कूल की जिम्मेदारी संभालती थी। दोनों अपनी-अपनी जगह व्यस्त रहते थे।
ऐसे में पति-पत्नी के बीच समय कम मिलने लगा।
यहीं से रिश्ते में गलतफहमियों और तनाव की शुरुआत होने की बात सामने आती है।
फिर रिश्ते पर उठने लगे सवाल
समय बीतने के साथ राजकुमार और निशा के संबंधों में कथित तौर पर तनाव बढ़ता गया। पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का शक राजकुमार के मन में पैदा होने की बात कही गई।
यह शक कितना सही था और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे, यह जांच का विषय रहा। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास कमजोर पड़ चुका था।
किसी भी रिश्ते में जब भरोसे की जगह शक ले लेता है तो छोटी-सी बात भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
राजकुमार और निशा के मामले में भी हालात धीरे-धीरे गंभीर होते चले गए।
परिवार के बीच भी बढ़ने लगी बेचैनी
राजकुमार के परिवार में उसके तीन भाई और दो बहनें थीं। सबसे बड़े भाई रवि की शादी बाराबंकी निवासी अनुराधा से हुई थी। दूसरे भाई दिलीप की शादी निशा की बड़ी बहन शारदा से हुई थी।
यानी दोनों परिवार पहले से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
इस वजह से पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का असर सिर्फ दोनों तक सीमित नहीं रहता था। परिवार के दूसरे सदस्य भी इस तनाव से प्रभावित होते थे।
एक सामान्य परिवार अचानक चर्चा में आ गया
जिस घर में दो बेटियों की हंसी गूंजती थी, वहां अब पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे।
राजकुमार चर्च में पादरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता था और निशा स्कूल में अध्यापन करती थी। बाहर से दोनों का जीवन व्यवस्थित दिखाई देता था।
लेकिन अंदर ही अंदर रिश्ते में क्या चल रहा था, इसकी पूरी तस्वीर बाद की घटनाओं से सामने आई।
पति की मौत ने पूरे मामले को अचानक गंभीर बना दिया।
पत्नी पर लगे आरोपों ने मामले को और उलझाया
राजकुमार की मौत के बाद उसकी पत्नी निशा के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से संबंध थे और इसी वजह से पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हुआ था।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए ऐसे आरोपों को बिना जांच और कानूनी पुष्टि के सच नहीं माना जा सकता।
पुलिस जांच का उद्देश्य यही होता है कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था, किन परिस्थितियों में घटना हुई और उसमें कौन जिम्मेदार था।
इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा दो बेटियां थीं
राजकुमार और निशा की दो बेटियां थीं।
पति की मौत और उसके बाद परिवार में पैदा हुए विवादों का सबसे गहरा असर इन्हीं मासूम बच्चों पर पड़ा।
बच्चों के लिए मां और पिता का विवाद समझना वैसे ही मुश्किल होता है, लेकिन जब मामला मौत तक पहुंच जाए तो उनकी पूरी दुनिया बदल जाती है।
एक परिवार, जिसकी शुरुआत आपसी पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, समय के साथ ऐसे मोड़ पर पहुंच गया जहां रिश्तों से ज्यादा सवाल और आरोप रह गए।
शक रिश्ते को किस हद तक ले जा सकता है?
राजकुमार और निशा की कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी रिश्ते में शक पैदा होने के बाद उसे बातचीत और विश्वास से दूर किया जाए या आरोपों और टकराव से।
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। लेकिन किसी भी गंभीर घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए सिर्फ शक या आरोप पर्याप्त नहीं होते।
इस मामले ने परिवार, रिश्तों और भरोसे से जुड़े कई सवाल खड़े किए।
कभी जिस रिश्ते की शुरुआत दो लोगों की पसंद से हुई थी, उसी रिश्ते में बाद में अविश्वास की जगह बन गई। दो बेटियों के माता-पिता बने राजकुमार और निशा की जिंदगी जिस मोड़ पर पहुंची, उसने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। पत्नी के कथित संबंधों या किसी व्यक्ति की भूमिका से जुड़े आरोपों को न्यायिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।



