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 मंगला गौरी व्रत कितने करने चाहिए, कब है पहला व्रत, क्या हैं लाभ? जानें तारीख, पूजा का समय, नियम..

 मंगला गौरी व्रत कितने करने चाहिए, कब है पहला व्रत, क्या हैं लाभ? जानें तारीख, पूजा का समय, नियम..

सावन के दौरान आने वाला मंगला गौरी व्रत माता गौरी और भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। साल 2026 में यह व्रत 4, 11, 18 और 25 अगस्त को रखा जाएगा। जानें मंगला गौरी व्रत की तिथियां, पूजा विधि, शुभ समय, धार्मिक महत्व, व्रत के लाभ और क्या केवल एक व्रत रखने से भी शुभ फल मिल सकता है।

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इसी महीने आने वाले मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत माता गौरी (पार्वती) को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में जानते हैं कि 2026 में मंगला गौरी व्रत कब-कब रखा जाएगा, कितने व्रत करने चाहिए और इसके क्या लाभ हैं।

पहला व्रत: 4 अगस्त 2026, मंगलवार

दूसरा व्रत: 11 अगस्त 2026, मंगलवार

तीसरा व्रत: 18 अगस्त 2026, मंगलवार

चौथा व्रत: 25 अगस्त 2026, मंगलवार

इन चारों मंगलवार को माता गौरी और भगवान शिव की पूजा की जाती है।

मंगला गौरी व्रत कितने करने चाहिए?

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में जितने मंगलवार पड़ते हैं, उतने ही मंगला गौरी व्रत रखने चाहिए। इसलिए 2026 में चार व्रत किए जाएंगे।

नई शादी के बाद कई परिवारों में महिलाएं लगातार पांच साल तक सावन के सभी मंगलवार को यह व्रत रखती हैं। पांचवें वर्ष उद्यापन किया जाता है। वहीं अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।

मंगला गौरी व्रत कैसे करें?

  • ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • साफ या नए कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान पर माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • माता को लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान, लाल फूल, फल, मिठाई और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • “ॐ गौर्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
  • अंत में आरती करके सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

पूजा का शुभ समय

मंगला गौरी की पूजा मंगलवार की सुबह सूर्योदय के बाद से दोपहर तक करना शुभ माना जाता है। कई जगहों पर शाम के समय भी पूजा की जाती है। अपने शहर के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर पूजा करना बेहतर रहता है।

मंगला गौरी व्रत के लाभ

  • पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होने की मान्यता।
  • दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है।
  • विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है।
  • घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • मां गौरी और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  • परिवार में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्या एक ही व्रत रखने से भी मिलेगा फल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सभी मंगलवार का व्रत नहीं रख सकता, तो वह श्रद्धा और नियम के साथ एक मंगला गौरी व्रत भी रख सकता है। सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा का भी शुभ फल मिलने की मान्यता है।

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