
ढाका/मक्का: सऊदी अरब में मक्का की एक मस्जिद की पवित्रता भंग करने के आरोप में बांग्लादेश के एक पति-पत्नी को मृत्युदंड दिए जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के बाद बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि उसे सजा दिए जाने से पहले इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। सरकार के मुताबिक, उसे मामले का पता मृत्युदंड दिए जाने के बाद चला। अब बांग्लादेश ने सऊदी अरब से संपर्क कर पूरे मामले के दस्तावेज और विस्तृत जानकारी मांगी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब में बांग्लादेशी दूतावास ने वहां की जेलों में बंद अपने नागरिकों की सूची मांगी थी। सऊदी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में संबंधित दंपति के नाम शामिल थे, लेकिन उसमें उन्हें सुनाई गई मौत की सजा का उल्लेख नहीं था। इसी वजह से बांग्लादेश सरकार ने मामले की जानकारी और आधिकारिक दस्तावेज मांगे हैं।
दस्तावेज मिलने के बाद अगला कदम तय करेगा बांग्लादेश
बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार ने इस मामले में विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए सऊदी प्रशासन से संपर्क किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधिकारिक दस्तावेज मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
मंत्री के मुताबिक, फिलहाल सरकार सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालने की अपील की। सरकार का कहना है कि मामले की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी है।
सऊदी प्रशासन ने बताया मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, दंपति को इस्लामी कानून के तहत ‘ताजीर’ के प्रावधानों के आधार पर मृत्युदंड दिया गया। ताजीर ऐसी सजा की व्यवस्था है, जिसमें अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक अधिकारी सजा निर्धारित करते हैं।
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दंपति ने मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया था और इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसे सजा से पहले इसकी जानकारी नहीं मिली थी। अब मामले से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड मिलने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
सऊदी अरब में रहते हैं 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक
सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक रहते और काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन श्रमिकों की है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार करते हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक, आर्थिक और श्रम संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं।
ऐसे में यह मामला विदेशों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों को दी जाने वाली सजा और संबंधित देशों की सरकारों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है। बांग्लादेश सरकार अब सऊदी प्रशासन से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही अपनी अगली रणनीति तय करेगी।
सऊदी अरब में मृत्युदंड को लेकर भी चर्चा
रिपोर्ट में एमनेस्टी इंटरनेशनल के हवाले से दावा किया गया है कि सऊदी अरब में इस साल अब तक करीब 100 लोगों को मृत्युदंड दिया जा चुका है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। कई मामलों में नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों के लिए सजा दिए जाने की बात कही गई है।
इससे पहले वर्ष 2011 में रियाद में आठ बांग्लादेशी नागरिकों को सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने का मामला भी सामने आया था। उन्हें मिस्र के एक नागरिक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।
श्रीलंकाई नागरिक की मौत की सजा भी हुई थी रद्द
इसी महीने सऊदी अरब में श्रीलंका के एक नागरिक की मौत की सजा रद्द किए जाने की खबर भी सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उसे सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी के मामले में धर्म का अपमान करने का दोषी ठहराया गया था।
इस फैसले के बाद श्रीलंका में विरोध हुआ और नागरिक को राहत दिलाने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए गए। बाद में सऊदी अरब ने उसकी मौत की सजा रद्द कर दी।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। आधिकारिक दस्तावेज और संबंधित पक्षों की विस्तृत जानकारी मिलने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।



