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बिहार में खुलेंगे 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट, गंभीर आपराधिक मामलों के निपटारे में आएगी तेजी

पटना
बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खुलने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को इसकी घोषणा की है। सीएम ने कहा कि आपराधिक मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार बिहार में अभी 54 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट सक्रिय हैं। इनमें से 48 विशेष रूप से पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों सुनवाई करती हैं। अब 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खुलने से लंबित रहने वाले गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने में और तेजी आएगी। नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कहांकहां किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से फिलहाल नहीं दी गई है।

बिहार में खुलेंगे 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट, गंभीर आपराधिक मामलों के निपटारे में आएगी तेजी

सीएम सम्राट चौधरी ने शनिवार को नए आपराधिक कानूनों से जुड़े दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसका आयोजन बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बोधगया स्थित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किया जा रहा है।

सीएम ने दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 10 फीसदी आबादी और 14 करोड़ से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बिहार की न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन पर टिकी हुई है। बिहार की पहचान हमेशा से न्याय के साथ विकास की रही है। नए आपराधिक आपराधिक कानूनों का प्रभावी एवं जनहितकारी क्रियान्वयन इसी भावना को और मजबूत करेगा। अपराध से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा।

सहयोग शिविर में जनता की समस्याओं का निपटारा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सहयोग कार्यक्रम चलाया जा रहा है, उसमें कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर आवेदन दे सकता है। उस समस्या का सरकार 30 दिनों के भीतर समाधान कर देगी। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी प्रखंडों में सहयोग शिविर का आयोजन किया जाता है। यहां आने वाले आवेदन का 30 दिनों में निपटारा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को सीएम कार्यालय से निलंबित कर दिया जाता है।

महीने में एक बार राज्यस्तरीय सहयोग शिविर
सम्राट चौधरी ने कहा कि हर महीने के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तर पर पटना में सहयोग शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें वैसे लोग शामिल होंगे जिनके आवेदन का निष्पादन प्रखण्ड स्तर पर हुआ है लेकिन वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी समस्याओं का समाधान होगा और न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका सहयोगी बनेंगे तो काम अच्छा होगा।

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