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मैराथन​​​ में दौड़ते-दौड़ते 24 साल की युवती की​​​​​​ थम गई सांसें, आखिर शरीर में ऐसा क्या हुआ जो दिल तक पहुंच गया?

मैराथन​​​ में दौड़ते-दौड़ते 24 साल की युवती की​​​​​​ थम गई सांसें, आखिर शरीर में ऐसा क्या हुआ जो दिल तक पहुंच गया?

लंबी दूरी तक दौड़ना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन बिना पर्याप्त तैयारी और सावधानी के अत्यधिक शारीरिक मेहनत कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। न्यूयॉर्क सिटी मैराथन में 1 नवंबर 2026 को 24 वर्षीय रेचल आपा की मौत की खबर ने इस खतरे को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बताया गया कि वह अपनी पहली मैराथन में हिस्सा ले रही थीं और फिनिश लाइन से करीब 3 किलोमीटर पहले अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। शुरुआती जांच में कार्डियक अरेस्ट की बात सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पिता ने मौत की वजह रैबडोमायोलिसिस बताई। हालांकि, किसी व्यक्ति की मौत का सटीक कारण मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही तय किया जा सकता है। इस घटना के संदर्भ में यह समझना जरूरी है कि रैबडोमायोलिसिस क्या है, यह मांसपेशियों से शुरू होकर किडनी और दिल को कैसे प्रभावित कर सकता है और इससे बचाव के लिए किन सावधानियों की जरूरत होती है।

क्या है रैबडोमायोलिसिस?

रैबडोमायोलिसिस (Rhabdomyolysis) एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मांसपेशियों के ऊतक तेजी से टूटने लगते हैं। ऐसा होने पर मांसपेशियों की कोशिकाओं के अंदर मौजूद कुछ पदार्थ खून में पहुंच जाते हैं। इनमें मायोग्लोबिन नाम का प्रोटीन और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट शामिल हैं।

मायोग्लोबिन सामान्य रूप से मांसपेशियों में ऑक्सीजन को बांधने में मदद करता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा खून में पहुंचने पर किडनी को नुकसान हो सकता है। गंभीर स्थिति में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बिगड़ सकता है।

यह समस्या हल्की मांसपेशियों की थकान से अलग होती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है।

किन कारणों से हो सकता है रैबडोमायोलिसिस?

इस स्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें अत्यधिक शारीरिक मेहनत और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने वाली परिस्थितियां प्रमुख हैं।

  • बिना ट्रेनिंग के कठिन एक्सरसाइज: लंबे समय तक दौड़ना, भारी वजन उठाना या कठिन वर्कआउट अचानक शुरू करना मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल सकता है।
  • गर्मी और डिहाइड्रेशन: तेज गर्मी या उमस में लंबे समय तक मेहनत करने और शरीर में पानी की गंभीर कमी होने से जोखिम बढ़ सकता है।
  • दुर्घटना या चोट: किसी भारी वस्तु के नीचे दबने, गंभीर चोट लगने या मांसपेशियों पर लंबे समय तक दबाव पड़ने से ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
  • कुछ दवाइयां: कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन दवाओं सहित कुछ दवाइयों के दुर्लभ दुष्प्रभाव के रूप में यह समस्या हो सकती है।
  • संक्रमण और नशीले पदार्थ: कुछ वायरल संक्रमण, ड्रग्स और अत्यधिक शराब का सेवन भी इसके जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।

रैबडोमायोलिसिस के लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कई बार शुरुआत में इन्हें सामान्य थकान या एक्सरसाइज के बाद होने वाले दर्द जैसा समझ लिया जाता है। लेकिन कुछ संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • मांसपेशियों में असामान्य रूप से तेज दर्द या ऐंठन होना।
  • मांसपेशियों में सूजन या कमजोरी महसूस होना।
  • पेशाब का रंग चाय या कोला जैसा गहरा हो जाना।
  • सामान्य से बहुत कम पेशाब आना।
  • अत्यधिक थकान, चक्कर या कमजोरी महसूस होना।
  • उल्टी, मतली या भ्रम जैसी परेशानी होना।

ध्यान रखें कि गहरे रंग का पेशाब हर मरीज में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इसके अभाव में भी बीमारी की आशंका पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती।

मांसपेशियों के टूटने से किडनी को कैसे पहुंचता है नुकसान?

जब मांसपेशियों की कोशिकाएं टूटती हैं, तो उनमें मौजूद मायोग्लोबिन खून में पहुंच जाता है। खून को छानने का काम किडनी करती है। मायोग्लोबिन की अधिक मात्रा किडनी की नलिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर शरीर में पानी की कमी होने पर यह खतरा बढ़ सकता है।

गंभीर मामलों में किडनी अचानक ठीक से काम करना बंद कर सकती है, जिसे एक्यूट किडनी इंजरी कहा जाता है। इसके लिए अस्पताल में तत्काल इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

रैबडोमायोलिसिस से दिल की धड़कन कैसे रुक सकती है?

मांसपेशियों की कोशिकाओं के टूटने पर उनमें मौजूद पोटैशियम भी खून में पहुंच सकता है। इससे शरीर में पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है। इस स्थिति को हाइपरकलेमिया कहते हैं।

दिल की धड़कन सामान्य बनाए रखने के लिए शरीर में पोटैशियम सहित कई इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन जरूरी होता है। खून में पोटैशियम बहुत अधिक बढ़ने पर दिल की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। इससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है और गंभीर स्थिति में कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है।

हालांकि, मैराथन या किसी दूसरी कठिन शारीरिक गतिविधि के दौरान होने वाले हर कार्डियक अरेस्ट की वजह रैबडोमायोलिसिस नहीं होती। पहले से मौजूद हृदय संबंधी बीमारी, हीट स्ट्रोक और दूसरी गंभीर समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।

दौड़ने वाले खिलाड़ियों को किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

कठिन एक्सरसाइज या लंबी दौड़ के बाद सामान्य मांसपेशियों का दर्द और थकान हो सकती है। लेकिन अगर दर्द असामान्य रूप से तेज हो, मांसपेशियों में सूजन आ जाए या शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज न करें।

खास तौर पर इन संकेतों पर तुरंत ध्यान दें:

  • पेशाब का रंग चाय या कोला जैसा गहरा होना।
  • सामान्य से बहुत कम पेशाब आना।
  • मांसपेशियों में तेज दर्द के साथ सूजन या कमजोरी।
  • आराम करने के बाद भी अत्यधिक थकान बने रहना।
  • उल्टी, चक्कर या भ्रम महसूस होना।

अगर इन लक्षणों के साथ बेहोशी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या दिल की धड़कन असामान्य महसूस हो, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। रैबडोमायोलिसिस की पुष्टि के लिए डॉक्टर खून में क्रिएटिन किनेज (CK), किडनी की कार्यक्षमता और इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच कर सकते हैं।

मैराथन और लंबी दूरी की दौड़ से पहले कैसे करें बचाव?

लंबी दूरी की दौड़ में हिस्सा लेने से पहले शरीर को धीरे-धीरे तैयार करना जरूरी है। अचानक कठिन ट्रेनिंग शुरू करना या अपनी क्षमता से ज्यादा दौड़ना मांसपेशियों पर दबाव बढ़ा सकता है।

1. धीरे-धीरे बढ़ाएं दौड़ने की दूरी: शुरुआत कम दूरी से करें और ट्रेनिंग के दौरान धीरे-धीरे दूरी तथा गति बढ़ाएं। शरीर को नई गतिविधि के अनुकूल होने का समय दें।

2. पर्याप्त आराम करें: लगातार कठिन एक्सरसाइज करने से बचें। ट्रेनिंग के बीच रिकवरी के लिए समय दें, ताकि मांसपेशियों को आराम मिल सके।

3. शरीर को हाइड्रेट रखें: दौड़ने से पहले, दौरान और बाद में अपनी जरूरत के अनुसार पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें। बहुत अधिक पानी जबरन पीना भी नुकसानदेह हो सकता है।

4. संतुलित भोजन करें: लंबी दूरी की दौड़ के लिए शरीर को पर्याप्त ऊर्जा चाहिए। अपने ट्रेनिंग स्तर के अनुसार कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों वाला संतुलित आहार लें।

5. मौसम का ध्यान रखें: तेज गर्मी और उमस में दौड़ने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है। ऐसे मौसम में गति कम रखें, जरूरत पड़ने पर ब्रेक लें और बहुत अधिक गर्मी में कठिन ट्रेनिंग से बचें।

6. शरीर के संकेत समझें: असामान्य दर्द, कमजोरी, चक्कर या मतली होने पर दौड़ जारी रखने के बजाय रुकें। गंभीर लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें।

लंबी दूरी की दौड़ से पहले सही ट्रेनिंग, पर्याप्त आराम और शरीर की जरूरतों के अनुसार पानी व पोषण का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। किसी भी नई कठिन एक्सरसाइज या मैराथन ट्रेनिंग की शुरुआत से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों की जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी गंभीर लक्षण की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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