
वाराणसी के एक आश्रम से बुजुर्गों की जिंदगी और परिवार से जुड़े रिश्तों की एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है। वाराणसी के अपना घर आश्रम में पिछले एक साल के दौरान 55 बुजुर्गों की मौत हुई। आश्रम संचालक के मुताबिक, इनमें कई ऐसे बुजुर्ग थे, जिनसे मिलने उनके परिजन लंबे समय तक नहीं आए। लेकिन कुछ मामलों में बुजुर्ग की मौत के बाद परिजन अचानक आश्रम पहुंच गए।
आश्रम संचालक का दावा है कि कुछ मामलों में परिवार के लोग शव लेने के साथ-साथ बुजुर्ग के जरूरी दस्तावेज और सामान भी लेने पहुंचे। कुछ मामलों में संपत्ति, जमीन और बीमा से जुड़े कामों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र की जरूरत होने की बात भी सामने आई।
मौत के बाद शव लेने पहुंचे परिजन
आश्रम के संचालक डॉ. के. निरंजन के अनुसार, कई बुजुर्गों की बीमारी या अंतिम समय के दौरान उनके परिजन उनसे मिलने नहीं पहुंचे। बुजुर्ग की मौत के बाद कुछ परिवारों ने शव लेने में रुचि दिखाई, जबकि कुछ मामलों में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी आश्रम को ही निभानी पड़ी।
उन्होंने बताया कि कुछ परिजन अंतिम संस्कार के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र लेने पहुंचे। आश्रम प्रबंधन के मुताबिक, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल आगे की कानूनी और आर्थिक प्रक्रियाओं के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, प्रत्येक मामले में परिजनों के आने की वजह एक जैसी थी, ऐसा नहीं कहा जा सकता। आश्रम की ओर से बताए गए संपत्ति या बीमा संबंधी कारण कुछ मामलों से जुड़े दावे हैं।
बुजुर्गों के सामान का भी रखा जाता है रिकॉर्ड
आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के निजी सामान का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाता है। कपड़े, गहने, नकदी और अन्य सामान की पहचान के लिए उन्हें टैग किया जाता है और उनकी तस्वीरें भी रिकॉर्ड में रखी जाती हैं।
आश्रम संचालक के मुताबिक, कुछ मामलों में बुजुर्ग की मौत के बाद उनके परिजन आश्रम पहुंचे और मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ उनका सामान भी अपने साथ ले गए।
बुजुर्ग महिलाओं के सामने भी बड़ी समस्या
आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं के मामलों में कई बार अंतिम संस्कार को लेकर भी मुश्किल स्थिति पैदा हो जाती है। संचालक के अनुसार, कुछ मामलों में मायका, ससुराल और पति पक्ष में से कोई भी अंतिम जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं होता।
आश्रम की ओर से 105 वर्षीय एक महिला का उदाहरण भी दिया गया। बताया गया कि महिला ने अपने सौतेले बेटे को गोद लेकर पाला था, लेकिन बाद में बेटे ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला अपने जीवन के अंतिम समय में आश्रम में रहीं।
दुबई में नौकरी करता था बेटा, मौत के बाद पहुंचा
आश्रम संचालक के मुताबिक, बेनियाबाग क्षेत्र के रहने वाले करीब 65 वर्षीय एक बुजुर्ग को लावारिस हालत में सड़क से बरामद कर आश्रम लाया गया था। वह करीब एक साल तक आश्रम में रहे।
बताया गया कि उनका बेटा दुबई में नौकरी करता था। बुजुर्ग के बीमार होने पर परिवार के एक रिश्तेदार को कई बार सूचना दी गई, लेकिन उनके अनुसार कोई मदद के लिए नहीं पहुंचा। बुजुर्ग की मौत के दो दिन बाद उनका बेटा दुबई से आया और शव अपने साथ ले गया।
लाखों की संपत्ति होने के बावजूद अकेले रहे
आश्रम में रहने वाले करीब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग के बारे में भी संचालक ने बताया कि वह सराफा कारोबार से जुड़े थे। उन्होंने आश्रम में रहने के दौरान बताया था कि उनकी तीन सराफा दुकानें और गांव में करीब पांच बीघा जमीन है।
आश्रम के अनुसार, बीमारी के दौरान उनसे मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं आया। लेकिन उनकी मौत के बाद परिजन शव लेने पहुंचे।
काशी के इस आश्रम से सामने आई ये घटनाएं बुजुर्गों के अकेलेपन और परिवार से उनके बदलते रिश्तों पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, हर मामले की पारिवारिक परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और आश्रम की ओर से बताए गए कारणों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में जरूरी है।



