शराब कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने अपने ऊपर लगे भगोड़े के टैग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट किए हैं. इनमें उन्होंने सिर्फ खुद को निर्दोष ही नहीं बताया है, बल्कि भारत सरकार की जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. माल्या का सबसे बड़ा दावा उनके कर्ज और उससे हुई वसूली को लेकर है. उनका कहना है कि बैंकों का जितना कर्ज उनके ऊपर था, जांच एजेंसियों ने उससे दोगुनी से भी ज्यादा रकम उनसे वसूल ली है. X पर किए पोस्ट उन्होंने पूछा है कि उनका बचा हुआ पैसा उन्हें वापस कब मिलेगा.

To all who believe in fair and proper accounting justice please see the following table. Do I still deserve the way I am berated by the media and referred to as a fraudster at the very outset of a journalists script ? Why not start asking when I will get my refund ? pic.twitter.com/oP80Ba5Nuw
— Vijay Mallya September 8, 2026
कर्ज से दोगुनी हुई वसूली
विजय माल्या ने बांबे हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से दाखिल किए गए एक हलफनामे का हवाला दिया है. उन्होंने बताया कि अदालत में उनके ऊपर 6,203 करोड़ रुपये का कर्ज तय किया गया था. माल्या के मुताबिक, ईडी के हलफनामे में खुद माना गया है कि साल 2021 में उनसे 14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है. माल्या ने सवाल उठाया है कि कर्ज से ज्यादा रकम चुकाने के पांच साल बाद भी उन्हें मीडिया में धोखेबाज क्यों कहा जाता है. उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों का जिक्र करते हुए कहा कि ईडी ने उनकी जब्त की गई संपत्ति से ही 350 करोड़ रुपये कर्मचारियों को बांटे थे. माल्या का तर्क है कि जब बैंकों ने उनके कर्ज से ज्यादा पैसा वसूल लिया है, तो अब उनका रिफंड उन्हें वापस मिलना चाहिए.
लंदन से बाहर जाने पर रोक
पैसों की वसूली के दावों के अलावा माल्या ने विदेश में रहने की वजह भी साफ की है. जो लोग उन्हें भारत लौटने से बचने वाला भगोड़ा कहते हैं, उन्हें जवाब देते हुए माल्या ने कहा कि वो अपनी मर्जी से वहां नहीं रुके हैं. उन्होंने बताया कि वो 1992 से ही यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं. फिलहाल कानूनी अड़चनों की वजह से उन पर यूके छोड़ने की रोक लगी हुई है. माल्या का आरोप है कि ये सब भारत सरकार की दिखावटी कार्रवाई का नतीजा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके मामले में घोर नाइंसाफी की है. उनका साफ कहना है कि वो भारत आने से नहीं बच रहे हैं, बल्कि कानूनी बंदिशों में बंधे हुए हैं.
सरकार का रवैया एकदम स्पष्ट
माल्या भले ही खुद को पीड़ित बता रहे हों, लेकिन भारत सरकार उन्हें वापस लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 के तहत विजय माल्या समेत 15 लोगों को भगोड़ा घोषित किया गया है. इस सूची में नीरव मोदी का नाम भी शामिल है. विदेश मंत्रालय ने भी साफ कर दिया है कि ऐसे अपराधियों को भारत की अदालतों के सामने पेश होना ही पड़ेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि सरकार भगोड़ों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने माना कि इसमें कई कानूनी प्रक्रियाएं शामिल हैं, लेकिन विदेशी सरकारों से लगातार बातचीत जारी है.
अदालत से नहीं मिली कोई राहत
सरकार के साथ अदालतों का रुख भी माल्या को लेकर बेहद सख्त है. इसी साल फरवरी में बांबे हाईकोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी. अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर कानूनी कार्यवाही से बचते हुए कोर्ट से राहत की उम्मीद नहीं कर सकता. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें माल्या ने खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी थी. कोर्ट ने माल्या को अपना रुख साफ करने का आखिरी मौका देते हुए पूछा था कि क्या वे भारत लौटने का इरादा रखते हैं. कोर्ट का मानना था कि माल्या जानबूझकर अदालत के अधिकार क्षेत्र से बच रहे हैं, इसलिए उन्हें उनकी याचिका में कोई राहत नहीं दी जा सकती.

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