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चुनाव से पहले बंगाल में मिले 79 बम, NIA करेगी मामले की जांच; राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र ने लिया बड़ा फैसला

Satya Report: Bengal Crude Bomb Recovery Case: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में बड़ी मात्रा में कच्चे बमों की बरामदगी के मामले में केंद्र सरकार ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है. गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए आतंकी एंगल से जांच शुरू कर दी है. यह मामला भांगौर डिवीजन के अंतर्गत उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां 25 अप्रैल 2026 को कोलकाता पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता , 2023 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

चुनाव से पहले बंगाल में मिले 79 बम, NIA करेगी मामले की जांच; राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र ने लिया बड़ा फैसला
चुनाव से पहले बंगाल में मिले 79 बम, NIA करेगी मामले की जांच; राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र ने लिया बड़ा फैसला

कब्रिस्तान के पास मिला विस्फोटकों का जखीरा
पुलिस को मिली विश्वसनीय सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जिसमें एक कब्रिस्तान के पास स्थित मकान से 79 गोल आकार की वस्तुएं बरामद की गईं. ये वस्तुएं जूट की रस्सियों से बंधी हुई थीं और कच्चे बम जैसी प्रतीत हो रही थीं. इसके अलावा मौके से बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई. शुरुआती जांच में सामने आया कि इन विस्फोटकों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा सुनसान स्थान पर छिपाकर रखा गया था.

एनआईए ने दर्ज किया नया केस
गृह मंत्रालय से आदेश मिलने के बाद NIA ने 26 अप्रैल को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज की. एजेंसी ने कहा कि यह मामला मानव जीवन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और इसकी व्यापक जांच आवश्यक है. अधिकारियों के अनुसार, यह मामला NIA Act 2008 के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके चलते केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप जरूरी हो गया.

आतंकी साजिश की आशंका
प्राथमिक आकलन में संकेत मिले हैं कि विस्फोटकों का यह भंडारण सुनियोजित हो सकता है. अधिकारियों का मानना है कि इसका उद्देश्य नागरिकों के बीच भय और आतंक फैलाना हो सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए NIA ने आतंकी पहलू से जांच शुरू की है. एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इन बमों को किसने तैयार किया, इन्हें वहां क्यों रखा गया और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है.

गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि मामले की प्रकृति गंभीर है और इसके राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक निहितार्थ हो सकते हैं. ऐसे में इसकी जांच NIA द्वारा किया जाना आवश्यक है. केंद्र ने NIA Act 2008 की धारा 6 और धारा 8 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए एजेंसी को जांच सौंपने का निर्णय लिया.

गौरतलब है कि इसी भांगौर क्षेत्र में मार्च 2026 में एक बम विस्फोट की घटना हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. ऐसे में ताजा बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है. अब NIA की जांच का फोकस केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे संभावित साजिश, नेटवर्क और फंडिंग के स्रोतों की भी पड़ताल की जाएगी. एजेंसी यह भी जांच करेगी कि क्या इस मामले का संबंध किसी बड़े आतंकी या आपराधिक नेटवर्क से है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं.

भांगड़ में फिर मिले जिंदा बम
ताजा जानकारी के अनुसार, भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर जिंदा बम मिलने से सनसनी फैल गई है. ताजा मामला उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के चेलेगोयलिया इलाके का है, जहां एक बैग से 9 जिंदा बम बरामद किए गए.

बगीचे में छिपाए गए थे बम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर काशीपुर पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया. यह अभियान TMC के एक कार्यकर्ता के घर के पीछे स्थित बगीचे में किया गया. तलाशी के दौरान एक बैग मिला, जिसके अंदर से कुल नौ जिंदा बम बरामद हुए. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल बन गया है.

TMCISF में आरोपप्रत्यारोप
इस बरामदगी के बाद ISF ने TMC पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ISF का दावा है कि TMC कार्यकर्ताओं ने इलाके में अशांति फैलाने के मकसद से बमों का जखीरा जमा किया था. वहीं, TMC ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पलटवार किया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि ISF कार्यकर्ताओं ने TMC को बदनाम करने के लिए रात में बम रख दिए और अब झूठे आरोप लगा रहे हैं.

भारी सुरक्षा बल तैनात
घटना के बाद इलाके में कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई है. पुलिस ने बमों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और पूरे मामले की जांच जारी है. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.

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