भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की तीन दिन की पॉलिसी मीटिंग सोमवार को शुरू हुई. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 अगस्त यानी आज बुधवार को इसके नतीजों का ऐलान करेंगे. ब्लूमबर्ग के एक सर्वे के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितता के बीच सेंट्रल बैंक रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगा. कंज्यूमर महंगाई में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद रेपो रेट में कोई बदलाव न होने की उम्मीद है, क्योंकि महंगाई अभी भी RBI की तय सीमा के अंदर ही है. सेंट्रल बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है और उम्मीद है कि वह महंगाई के अपने मौजूदा अनुमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा.

जून में हुई मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखा था. 3 से 5 जून तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग में ‘न्यूट्रल’ पॉलिसी रुख भी बरकरार रखा गया था. साथ ही, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5% पर बनाए रखा गया, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट 5.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रहे. ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक पर बात करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अनिश्चितता बनी हुई है. उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ महीनों में, ग्लोबल इकोनॉमी पर बढ़ी हुई अनिश्चितता, मुख्य ट्रेड रूट्स और सप्लाई चेन में रुकावट, बाज़ार में ज्यादा उतारचढ़ाव और बिजनेस को लेकर सतर्क रवैये का असर रहा है.
RBI MPC मीटिंग: तारीख और समय
RBI की हर दो महीने में होने वाली MPC मीटिंग सोमवार, 3 अगस्त से बुधवार, 5 अगस्त तक होगी. सेंट्रल बैंक बुधवार सुबह 10:00 बजे अपने पॉलिसी फ़ैसले का ऐलान करेगा, जिसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा उसी दिन दोपहर 12:00 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को संबोधित करेंगे. RBI गवर्नर का पॉलिसी स्टेटमेंट सुबह 10:00 बजे से RBI के ऑफिशियल YouTube चैनल पर लाइव दिखाया जाएगा. दर्शक मीडिया को उनके संबोधन को देखने के लिए भी इसी प्लेटफॉर्म पर जुड़ सकते हैं.
किस तरह की हो सकती है घोषणा?
INVasset PMS के बिनेस हेड, हर्षल दसानी का मानना है कि RBI के रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखने की उम्मीद है. अब पॉलिसी का फोकस रेट के फैसले से हटकर महंगाई और लिक्विडिटी पर सेंट्रल बैंक की गाइडेंस पर शिफ्ट हो रहा है. दसानी ने कहा कि महंगाई RBI के मीडियमटर्म टारगेट से थोड़ी ऊपर चली गई है, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और जियोपॉलिटिकल रिस्क जैसे अनिश्चित ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ काफी हद तक मजबूत बनी हुई है. ऐसे में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के पास पॉलिसी में अचानक कोई बदलाव करने की कोई खास वजह नहीं है.
दसानी ने कहा कि मार्केट के लिए फैसले से ज्यादा कमेंट्री मायने रखेगी. अगर RBI डेटा पर आधारित अप्रोच को दोहराता है और भरोसा दिलाता है कि ग्रोथ से समझौता किए बिना महंगाई को कंट्रोल में रखा जा सकता है, तो इससे फाइनेंशियल एसेट्स को सपोर्ट मिलना चाहिए. हालांकि, अगर कोई संकेत मिलता है कि महंगाई का रिस्क और गहरा हो रहा है, तो भविष्य में पॉलिसी में ढील देने की उम्मीदें कम हो सकती हैं. मार्केट के नजरिए से, यह किसी बड़े बदलाव की शुरुआत के बजाय मौजूदा पॉलिसी को जारी रखने जैसा होगा. दरों में स्थिरता से क्रेडिट ग्रोथ और कॉर्पोरेट बैलेंस शीट को सपोर्ट मिलता रहेगा, लेकिन आने वाली तिमाहियों में महंगाई का ट्रेंड ही सबसे अहम बात होगी जिस पर नजर रखनी होगी.
अपनाया जा सकता है न्यूट्रल रुख
वहीं, SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि RBI की आने वाली MPC मीटिंग में रेपो रेट के 5.25 फीसदी पर बने रहने की उम्मीद है और सेंट्रल बैंक के अपने न्यूट्रल पॉलिसी रुख को जारी रखने की संभावना है. आम उम्मीद यही है कि पॉलिसी बनाने वाले किसी भी पॉलिसी बदलाव से पहले आने वाले मैक्रोइकोनॉमिक डेटा का आकलन करना पसंद करेंगे. हालांकि हाल ही में महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच कई ग्लोबल सेंट्रल बैंक ज्यादा सतर्क हो गए हैं, लेकिन उम्मीद है कि RBI ग्रोथ और महंगाई के प्रति संतुलित रुख अपनाते हुए घरेलू आर्थिक स्थितियों को प्राथमिकता देगा.
उन्होंने कहा कि इसलिए, उम्मीद है कि फाइनेंशियल मार्केट पॉलिसी के फैसले के बजाय RBI गवर्नर की बातों पर ज़्यादा ध्यान देंगे. अगर कोई संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है या व्यापक हो रहा है, तो वित्त वर्ष 2027 में बाद में पॉलिसी रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ सकती है. इसके उलट, अगर महंगाई कम होती है और आर्थिक विकास स्थिर रहता है, तो RBI के पॉलिसी साइकिल में अपने ‘पॉज’ को जारी रखने की संभावना है.



