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रिटायरमेंट के बाद सिविल सर्वेंट्स का कार्यकाल कैसे बढ़ता है? चर्चा में कैबिनेट सचिव-केन्द्रीय गृह सचिव का एक्सटेंशन

भारत सरकार ने केन्द्रीय कैबिनेट सचिव सोमनाथन और केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने यह फैसला किया है. नए आदेश के मुताबिक कैबिनेट सचिव अब 30 अगस्त 2027 तथा गृह सचिव 22 अगस्त 2027 तक सेवा में रहेंगे.

रिटायरमेंट के बाद सिविल सर्वेंट्स का कार्यकाल कैसे बढ़ता है? चर्चा में कैबिनेट सचिव-केन्द्रीय गृह सचिव का एक्सटेंशन

दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों का रिटायरमेंट इसी महीने तय था. स्वामीनाथन तमिलनाडु कैडर के तथा गोविंद मोहन सिक्किम कैडर के अफसर हैं. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि अफसरों को सेवा विस्तार कैसे मिलता है? इसके लिए तय नियम क्या हैं?

क्या हैं रिटायरमेंट के सामान्य नियम?

देश में सरकारी अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष है. फिर भी कुछ अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद सेवा जारी रखने का अवसर मिल सकता है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति से जुड़े नियम मुख्य रूप से फंडामेंटल रूल 56 और संबंधित सेवा नियमों में मिलते हैं.

सामान्य नियम यह है कि कर्मचारी तय उम्र पूरी होने पर सेवा से रिटायर हो जाता है. रिटायरमेंट की तारीख आमतौर पर उस महीने के अंतिम दिन होती है, जिसमें कर्मचारी निर्धारित आयु पूरी करता है. अधिकारी स्वयं अपनी सेवा अवधि बढ़ाने का दावा नहीं कर सकता. सरकार भी विशेष परिस्थितियों में ही सेवा विस्तार जैसे निर्णय लेती है. अक्सर इसे जनहित में लिया गया फैसला कहा जाता है.

केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन.

किन अधिकारियों की अधिक संभावना रहती है?

वरिष्ठ सिविल सर्वेंट्स को कभीकभी रिटायरमेंट के बाद जिम्मेदारी दी जाती है. इनमें कैबिनेट सचिव, सचिव स्तर के अधिकारी, मुख्य सचिव, विशेषज्ञ अधिकारी और महत्वपूर्ण नियामक संस्थाओं से जुड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं. यहां यह समझना जरूरी है कि हर वरिष्ठ अधिकारी को एक्सटेंशन नहीं मिलता. पद की प्रकृति और सरकार की आवश्यकता सबसे महत्वपूर्ण होती है. कुछ क्षेत्रों में विशेष नियम लागू होते हैं. मसलन, सरकारी डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए अलग प्रावधान हो सकते हैं. कुछ डॉक्टरों को क्लिनिकल, शिक्षण या सलाहकार कार्यों के लिए अधिक उम्र तक सेवा का अवसर दिया जाता है.

सेवा विस्तार देने का अधिकार किसके पास है?

सेवा विस्तार का फैसला संबंधित सक्षम प्राधिकारी करता है. केंद्र सरकार में यह निर्णय विभाग, मंत्रालय और पद के स्तर के अनुसार बदल सकता है. कुछ मामलों में नियुक्ति संबंधी समिति की स्वीकृति जरूरी होती है. वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के लिए उच्च स्तर की मंजूरी ली जा सकती है. राज्य सरकारों में मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिमंडल, नियुक्ति समिति या संबंधित विभाग सक्षम प्राधिकारी हो सकता है. अंतिम फैसला सरकार का होता है. कैबिनेट सचिव एवं गृह सचिव के सेवा विस्तार की मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने की है.

यह प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?

सेवा विस्तार की प्रक्रिया में सामान्यतः कुछ चीजें तय हैं. इनमें विभागीय प्रस्ताव, कार्यक्षमता, किसी तरह की जांच आदि मुद्दे देखे जाते हैं.

  • विभागीय प्रस्ताव: संबंधित विभाग अधिकारी की सेवा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करता है. प्रस्ताव में कारण स्पष्ट किए जाते हैं कि अमुक अधिकारी की जरूरत क्यों हैं?
  • कार्य प्रदर्शन की समीक्षा: अधिकारी का पिछला प्रदर्शन देखा जाता है. उसकी ईमानदारी, दक्षता और प्रशासनिक क्षमता की समीक्षा की जाती है.
  • सतर्कता जांच: अधिकारी के खिलाफ कोई सतर्कता मामला, अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक जांच लंबित है या नहीं, यह भी देखा जाता है.
  • जनहित का आकलन: सरकार यह देखती है कि अधिकारी को बनाए रखना वास्तव में जनहित में है या नहीं. केवल व्यक्तिगत सुविधा को आधार नहीं बनाया जा सकता.
  • सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी: प्रस्ताव को निर्धारित प्राधिकारी के सामने रखा जाता है. मंजूरी मिलने के बाद आदेश जारी किया जाता है.
  • लिखित आदेश: सेवा विस्तार हमेशा लिखित आदेश के जरिए दिया जाता है. आदेश में अवधि, पद, वेतन, शर्तें और कार्यक्षेत्र का उल्लेख हो सकता है.

सेवा विस्तार कितने समय का होता है?

सेवा विस्तार की अवधि सभी अधिकारियों के लिए समान नहीं होती. यह कुछ महीनों से लेकर एक वर्ष तक हो सकती है. कुछ विशेष मामलों में इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. आम तौर पर हर अतिरिक्त अवधि के लिए अलग मंजूरी आवश्यक होती है. एक बार एक्सटेंशन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अधिकारी को अनिश्चित समय तक सेवा में रखा जाएगा. सरकार किसी भी समय शर्तों के अनुसार सेवा समाप्त कर सकती है. यह संबंधित आदेश और सेवा नियमों पर निर्भर करता है.

क्या सेवा विस्तार अफसर का अधिकार है?

किसी भी सिविल सर्वेन्ट को सेवा विस्तार देना सरकार का निर्णय है. निर्णय लेते समय समानता, पारदर्शिता और जनहित का ध्यान रखना होता है. यदि निर्णय मनमाना हो, तो उसे न्यायिक समीक्षा में चुनौती दी जा सकती है. यद्यपि, अदालतें सामान्यतः प्रशासनिक निर्णयों में सीमित हस्तक्षेप करती हैं. वे यह देखती हैं कि नियमों का पालन हुआ या नहीं. निर्णय दुर्भावना से तो नहीं लिया गया? और क्या उसमें जनहित का आधार मौजूद है.

पेंशन और अन्य लाभों पर असर

यदि अधिकारी को सेवा में औपचारिक सेवा विस्तार मिलता है, तो पेंशन की गणना पर असर पड़ सकता है. अतिरिक्त सेवा से पेंशन योग्य सेवा अवधि बढ़ सकती है. यदि अधिकारी रिटायर होकर पुनर्नियुक्त होता है, तो पेंशन और नए वेतन के संबंध में अलग नियम लागू होते हैं. कुछ मामलों में वेतन से पेंशन का समायोजन किया जाता है.

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