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ऐसी जगह जहां पांव रखने पर हिलती महसूस होती है जमीन, जानें कैसे पहुंचे यहां

आपने बोट पर बने घर देखे होंगे जो पानी पर तैरते हैं. हालांकि हम जिस जगह की बात कर रहे हैं वो देखने में जमीन जैसी लगती है, लेकिन असल में ये ठोस जमीन नहीं होती है. ये जगह भारत के मणिपुर राज्य में है. ये जमीन फुमदी कहलाती है, जो पानी के ऊपर मिट्टी और घास, झाड़ियों के सड़ने से होने वाले जमाव से बनकर तैयार होती है. ये इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि लोग इसके ऊपर अपने घर बनाकर रहते हैं. यहां के लोग झील में ही नाव से आनाजाना करते हैं और मछली पालन यहां का मुख्य व्यवसाय है.

ये फुमदियां झील का पानी बढ़ने या घटने पर छोटी या बड़ी हो जाती हैं. इसी के साथ हवा और पानी के बहाव की वजह से ये धीरेधीरे अपनी जगह से दूसरी जगह पर जाती रहती हैं, जिससे लोगों के आशियाने भी एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंच जाते हैं. चलिए जान लेते हैं इस अनोखी जगह के बारे में और आप यहां कैसे पहुंच सकते हैं.

क्या है इस गांव का नाम?

मणिपुर के विष्णुपुर जिले में स्थित इस गांव का नाम चंपू खंगपोक है, जिसे फ्लोटिंग विलेज यानी तैरता हुआ गांव भी कहते हैं. फुमदी यानी गलीसड़ी हुआ वनस्पतियों, मिट्टी और कार्बनिक पदार्थों से बने हुए बड़ेबड़े ढेले या जमीन जैसे टुकड़े होते हैं जो झील के पानी पर तैरते हैं. इस झील का नाम है ‘लोकतक’. इस स्पंजी सी महसूस होने वाली जगह पर लोग बांस की झोपड़ियां बनाते हैं.

स्कूल से लेकर हैं कई सुविधाएं

चंपू खंगपोक गांव में लोगों ने खुद को इसी एनवायरमेंट के हिसाब से ढाल लिया है. यहां पर मुख्यत: मैतेई समुदाय के लोग रहते हैं. मुख्य रूप से जीवन यापन के लिए ज्यादातर लोग यहां पर मिलने वाली नेचुरल चीजों और मछली पकड़ने के काम को करते हैं. यहां सिर्फ घर ही नहीं हैं, बल्कि बच्चों के लिए स्कूल भी बना हुआ है और कम्युनिटी हॉल भी है जहां लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर सामाजिक चर्चाओं के लिए बैठक तक करते हैं. यहां के लोग लकड़ी की डोंगी से ही अलगअलग जगहों पर पहुंचते हैं. अब यहां सोलर लाइट जैसी सुविधाएं भी पहुंच गई हैं.

तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान

यहां पर आना इसलिए भी खास रहेगा, क्योंकि आप एक अनोखी दुनिया में पहुंचने जैसा महसूस करेंगे और वहां की अनूठी संस्कृति को करीब से देख सकते हैं. इसके अलावा लोकतक झील पर ही तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान भी है जो दुनिया में एकमात्र ऐसी जगह है. यह खासतौर पर ‘संगई’ भी देखने को मिलेंगे जो बहुत ही दुर्लभ होते हैं.

कैसे पहुंचें चंपू खंगपोक?

इस गांव में आने का बेस्ट टाइम अक्टूबर में माना जाता है, क्योंकि मानसून खत्म हो चुका होता है और पानी थोड़ा कम हो जाता है. इसी के साथ हरियाली भी पीक पर रहती है. यहां पहुंचने के लिए फ्लाइट से आप बीर टिकेंद्रजीत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उतर सकते हैं. ट्रेन से आपको दीमापुर उतरना होगा. आपको इन जगहों से प्राइवेट या शेयर्ड टैक्सी लेनी होंगी जो झील के किनारे बसे मोइरांग या फिर थांगा तक पहुंचा जेती हैं. इसके बाद आप पारंपरिक नाव से चंपी खंगपोक जा सकते हैं.

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