
खजुराहो के पास बमीठा इलाके का एक छोटा-सा गांव। फरवरी की ठंडी सुबहें थीं और भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। आंगन में रिश्तेदारों की आवाजाही थी, घर की महिलाएं रस्मों की तैयारी में जुटी थीं और हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी—11 फरवरी को रचना की शादी है।
18 साल की रचना की शादी पास के गांव हीरापुर में तय हुई थी। परिवार अपनी हैसियत के मुताबिक शादी की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। कपड़े आ चुके थे, मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था और घर में शादी से पहले होने वाली रस्मों की तैयारी चल रही थी।
लेकिन इसी घर में एक ऐसी कहानी भी पल रही थी, जिसकी भनक परिवार को शायद पूरी तरह नहीं थी।
रचना बचपन से ही नीरज को जानती थी। दोनों एक ही इलाके के रहने वाले थे। बचपन की दोस्ती कब एक-दूसरे के लिए गहरी भावनाओं में बदल गई, शायद उन्हें भी पता नहीं चला। समय बीतता गया और दोनों का रिश्ता मजबूत होता गया।
रचना के लिए नीरज कोई अचानक आया हुआ रिश्ता नहीं था। वह उसके बचपन का साथी था, जिसे वह लंबे समय से जानती और समझती थी।
लेकिन परिवार ने रचना के लिए किसी और को चुन लिया था।
घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, मगर रचना के मन में कुछ और ही उथल-पुथल थी। एक तरफ परिवार की इच्छा थी, दूसरी तरफ वह रिश्ता था, जो उसके साथ बचपन से चला आ रहा था।
शादी में अब सिर्फ चार दिन बाकी थे।
घर में महिलाएं ‘छई माटी’ की रस्म की तैयारी कर रही थीं। बुंदेलखंड के गांवों में यह रस्म शादी से पहले बड़े उत्साह से निभाई जाती है। महिलाएं खेत से मिट्टी लेने जाती हैं, गीत गाती हैं और आने वाली शादी के लिए पूजा-पाठ करती हैं।
भैरो पटेल के घर में भी ऐसा ही माहौल था। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस बेटी की शादी के गीत गाए जा रहे हैं, वह कुछ ही घंटों बाद घर में नहीं होगी।
फिर अचानक रचना गायब हो गई।
पहले परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के यहां गई होगी। लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो घरवालों ने तलाश शुरू की। रिश्तेदारों से पूछा गया, आसपास के घरों में खोजा गया और गांव में भी खबर भेजी गई।
तभी परिवार को पता चला कि रचना नीरज के साथ घर से चली गई है।
यह खबर मिलते ही शादी वाले घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ देर पहले तक हंसी-खुशी और रस्मों की बातें हो रही थीं, वहां अब घबराहट और तनाव था। शादी की तैयारियां रुक गईं और परिवार बेटी की तलाश में जुट गया।
गांव में भी यह बात तेजी से फैल गई कि रचना अपनी शादी से सिर्फ चार दिन पहले बचपन के प्रेमी के साथ चली गई है।
लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इसे परिवार की इज्जत से जोड़कर देख रहा था, तो कोई कह रहा था कि रचना ने अपने पुराने प्यार को चुना है।
लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही था कि अगर रचना और नीरज एक-दूसरे से प्यार करते थे, तो परिवार को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और अगर जानकारी थी, तो रचना की शादी किसी और जगह क्यों तय की गई?
भैरो पटेल अपनी बेटी की शादी ऐसे परिवार में करना चाहते थे, जिसे वे अपनी हैसियत और सामाजिक स्थिति के मुताबिक मानते थे। उनके लिए यह शादी परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ी थी। दूसरी तरफ रचना के लिए यह उसके पूरे जीवन का फैसला था।
शायद यही वजह थी कि उसने आखिरी समय में वह कदम उठाया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
रचना के घर से जाने के बाद परिवार के सामने सिर्फ बेटी को ढूंढने की चिंता नहीं थी। शादी की तारीख नजदीक थी, रिश्तेदार घर पर थे और गांव में हर कोई इस घटना की चर्चा कर रहा था।
जिस आंगन में बेटी की डोली उठने वाली थी, वहां अब सन्नाटा पसरा था।
रचना और नीरज की कहानी को गांव में लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे थे। कुछ लोगों के लिए यह परिवार के खिलाफ उठाया गया कदम था, तो कुछ के लिए यह दो पुराने प्रेमियों का साथ रहने का फैसला।
लेकिन सच यह था कि दोनों का रिश्ता अचानक नहीं बना था। वे बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच समय के साथ भरोसा और लगाव बढ़ा था। रचना के सामने जब दूसरी शादी का फैसला रखा गया, तो शायद उसे लगा कि अगर अब उसने कुछ नहीं किया, तो वह अपने पुराने रिश्ते को हमेशा के लिए खो देगी।
और फिर शादी से चार दिन पहले उसने घर छोड़ दिया।
इस घटना ने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या परिवारों को बच्चों की पसंद के बारे में समय रहते बात करनी चाहिए? क्या रचना अपनी बात परिवार के सामने खुलकर रख पाई थी? क्या सामाजिक दबाव ने दोनों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया?
इन सवालों के जवाब शायद उस समय किसी के पास नहीं थे।
भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जिस उत्साह से शुरू हुई थीं, वह कुछ ही घंटों में चिंता में बदल गईं। रिश्तेदारों के बीच फुसफुसाहट शुरू हो गई। गांव के लोग घर के बाहर जमा होने लगे और हर कोई यही जानना चाहता था कि रचना कहां गई और अब आगे क्या होगा।
एक तरफ परिवार बेटी को वापस लाने की कोशिश कर रहा था, दूसरी तरफ रचना अपने बचपन के प्यार के साथ चली गई थी।
यह कहानी सिर्फ एक लड़की के घर से चले जाने की नहीं थी। यह उस टकराव की कहानी थी, जिसमें एक तरफ परिवार की उम्मीदें थीं और दूसरी तरफ दो लोगों का पुराना रिश्ता।
रचना की शादी 11 फरवरी को होनी थी, लेकिन उससे चार दिन पहले ही उसने अपनी जिंदगी का रास्ता खुद चुन लिया।
जिस घर में शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अचानक सवालों और सन्नाटे ने जगह ले ली।
और गांव में लंबे समय तक लोग यही कहते रहे—रचना ने शादी से भागकर सिर्फ एक घर नहीं छोड़ा, उसने अपने बचपन के प्यार को बचाने के लिए परिवार और समाज के सामने एक बड़ा फैसला रख दिया था।



