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​Gold Price: सस्ता होगा सोना या बनाएगा नया रिकॉर्ड? गोल्डमैन सैश ने खरीदारों को दी ये सलाह

सोने की कीमतों ने हाल के महीनों में निवेशकों को थोड़ा परेशान किया है लेकिन बाजार के दिग्गजों का नजरिया अभी भी सकारात्मक है. गोल्डमैन सैश के ग्लोबल हेड ऑफ मेटल्स ट्रेडिंग टोनी किम का कहना है कि सोने की मौजूदा गिरावट केवल एक अस्थाई ठहराव है. जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गोल्ड की चाल भले ही सुस्त पड़ गई हो लेकिन इसका बुल रन अभी खत्म नहीं हुआ है. अगर आप सोने में निवेश का मन बना रहे हैं, तो ये समय बाजार की बारीक चाल को समझने का है.

​Gold Price: सस्ता होगा सोना या बनाएगा नया रिकॉर्ड? गोल्डमैन सैश ने खरीदारों को दी ये सलाह

सोने की कीमतों में आई गिरावट का कारण

सोने की कीमतों में आई मौजूदा गिरावट के पीछे कुछ प्रमुख ग्लोबल कारण काम कर रहे हैं. फेडरल रिजर्व की नई नीतियों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. नए चेयरमैन केविन वॉर्श के मुद्रास्फीति नियंत्रण के तरीकों को लेकर निवेशक सतर्क हैं. इसके अलावा, अमेरिकाईरान तनाव ने भी ग्लोबल मार्केट पर असर डाला है. इसका सीधा प्रभाव 1 सितंबर को दिखा जब ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण हाजिर सोना 2.4% गिरकर 4,342.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. 4 सितंबर के अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने भी सोने पर दबाव बनाने का काम किया है.

बैंक बढ़ा रहे हैं सोने का भंडार

लंबे समय के नजरिए से देखें तो सोने का फ्यूचर काफी मजबूत नजर आता है. टोनी किम के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं. साल 2022 में रूसयूक्रेन युद्ध के बाद से इस ट्रेंड में भारी उछाल आया है. पहले जहां केंद्रीय बैंक सालाना 400 से 500 टन सोना खरीदते थे, वहीं अब ये आंकड़ा 1000 से 1100 टन तक पहुंच गया है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं. साल 2025 में केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, जबकि 2026 की पहली छमाही में ही 345 टन सोने की खरीदारी हो चुकी है. इससे आम निवेशकों के लिए बाजार में सोने की उपलब्धता कम हो रही है, जिससे कीमतों में उछाल की पूरी संभावना है.

एशिया में घटती घरेलू मांग

एशियाई बाजारों, खासकर भारत में हाल के समय में सोने की मांग में कुछ कमी देखी गई है. इसके पीछे बड़ी वजह ऊर्जा संकट है. अमेरिकाईरान तनाव के चलते ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने कई देशों को अपनी मुद्रा बचाने पर मजबूर कर दिया है. भारत जैसे देशों को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करेंसी को सुरक्षित रखना पड़ रहा है. इसी वजह से घरेलू मांग को नियंत्रित करने के लिए कुछ नीतियां लागू की गई हैं. टोनी किम का मानना है कि जब तक ऊर्जा बाजार पूरी तरह से सामान्य नहीं हो जाते, तब तक एशियाई मांग में पहले जैसी तेजी लौटना मुश्किल है.

चांदी के मुकाबले सोना क्यों बेहतर?

बहुत से निवेशक सोने के साथ चांदी में भी मौके तलाशते हैं. हालांकि, टोनी किम चांदी को लेकर अधिक सतर्क रहने की सलाह देते हैं. चांदी का बाजार सोने के मुकाबले काफी छोटा है. इसकी आधी से ज्यादा मांग औद्योगिक क्षेत्रों से आती है. इसलिए इसमें उतारचढ़ाव काफी तेज होता है. इसके विपरीत, गोल्ड में केंद्रीय बैंकों का बड़ा निवेश इसे एक सुरक्षित विकल्प बनाता है. निवेशकों के लिए 4,000 डॉलर का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है. अगर सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के आसपास आती हैं, तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये धीरेधीरे खरीदारी शुरू करने का एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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